अपनी मौसी की चूत मारी

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प्रेषक : जसप्रीत …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम जसप्रीत है, में पंजाब का रहने वाला हूँ और में भी आप सभी लोगों की तरह कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ और पिछले कुछ सालों से लगातार सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ। दोस्तों में आज पहली बार अपनी यह सच्ची घटना के बारे में लिख रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को जरुर यह पसंद आएगी। अब में आप सभी को सबसे पहले अपने बारे में बताता हूँ, मेरी उम्र 23 साल है, मेरी लम्बाई 5.9 इंच अच्छी तरह से कसरत किया गया गठीला शरीर और मेरा रंग गोरा है। दोस्तों जब में अपनी किशोरवस्था में था, तब में अपने लंड के आकार के बारे में बड़ा ही चिंतित था, क्योंकि यह जब खड़ा होता तब करीब 6 इंच से अधिक लंबा नजर आता था। फिर मैंने इस बारे में एक डॉक्टर से सलाह ली, क्योंकि यह मेरे लिए असामान्य था, लेकिन डॉक्टर ने मुझे बताया कि कुछ लोगों के इस प्रकार का अंग होता है और यह आगे चलकर मेरे सामान्य जीवन को कभी भी प्रभावित नहीं करेगा। दोस्तों इस युग में मेरा विश्वास है कि मेरी यह सभी चिंताए गलत थी। अब में बहुत खुश हूँ कि मेरे पास किसी भी प्यासी महिलाओं को खुश करने के लिए एक अनूठा बलशाली लंड है। अब में आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों एक बार में कुछ दिनों के लिए दिल्ली मेरी मौसी से मिलने के लिए उनके पास चला गया, मेरी मौसी 40 वर्ष की है, उनके बूब्स का आकार 36-42-38 है और लम्बाई 5.6 इंच है। दोस्तों मेरा मौसा दुबई में काम करता है, वो दो-तीन साल में केवल एक बार ही घर आता है, उनके दो बच्चे है एक बेटी और एक बेटा, वो दोनों स्कूल जाते है। दोस्तों मेरी मौसी के पास दो बेडरूम का घर है, मौसी और उसकी बेटी दूसरे कमरे में बड़े आकार के पलंग पर सोती थी और उसका बेटा और में अलग पलंग पर सोते थे। फिर एक रात जब में मौसी के कमरे में टी.वी देख रहा था, तभी वहां मुझे नींद आने लगी और में वहीं पर सो गया, लेकिन मौसी ने मुझे दूसरे कमरे में जाने के लिए नहीं कहा। फिर उसने अपनी बेटी को वहां भेजा और स्वयं पहले से सोते हुए उस बड़े पलंग पर लेट गयी। फिर थोड़ी देर के बाद में प्यास और पेशाब करने के लिए देर रात को उठ गया और में रात को छोटे बल्ब के मंद प्रकाश में नींद में वापस अपने काम करके आ गया, तब मैंने पहली बार अपनी मौसी की वो सुंदरता देखी। दोस्तों वो उस समय अपनी पीठ के बल सो रही थी और अपने गाउन को मौसी ने जांघो तक उठा रखा था, उनकी जांघे एकदम गोरी और चिकनी थी।

अब मौसी के बूब्स उसके सांस लेने से हलचल कर रहे थे और में चकित होकर यह सब थोड़ी देर तक देखता ही रहा और वो सब देखकर मेरा मन मचलते हुए ललचाने लगा था। फिर में पलंग पर लेट गया और सोचने लगा कि मौसी को कैसे पटाया जाए? कुछ देर के बाद मैंने मौसी के ऊपर अपना एक हाथ रखा और इंतज़ार करने लगा कि कहीं हाथ लगाने से मौसी नींद से उठ तो नहीं रही है, लेकिन उनकी तरफ से मुझे कोई भी हलचल नजर नहीं आई। अब में हिम्मत करके अपने एक हाथ को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले गया और उसके बूब्स पर रख दिया, लेकिन मौसी की तरफ से तब भी कोई हरकत नहीं हुई। फिर थोड़ी देर के बाद में उसके बूब्स को दबाने लगा, जिसकी वजह से मेरे लंड में तनाव आने लगा था और में मन ही मन बहुत खुश था। अब मैंने मौसी के गाउन के हुक को खोल दिया और अपने एक हाथ को अंदर उनके बूब्स पर पहुंचा दिया, लेकिन उसने कुछ देर तक कोई हरकत नहीं की। फिर थोड़ी देर के बाद में उनके बूब्स को सहलाने लगा था, मौसी अभी तक भी मस्त होकर गहरी नींद में सो रही थी। अब उसके बूब्स पर अपना हाथ फैरने की वजह से उसके निप्पल खड़े होकर सख्त हो गये थे और मेरा लंड भी तन चुका था।

फिर मैंने कुछ देर बाद उसके बूब्स से अपना हाथ हटाया और मौसी की चूत पर उस गाउन के ऊपर से ही अपने हाथ को रख दिया। दोस्तों उस समय मैंने महसूस किया कि मौसी की चूत डबल रोटी की तरह फूली हुई थी और मौसी ने पेंटी भी नहीं पहनी थी, उनकी चूत मुझे छूकर बहुत गरम महसूस हो रही थी। फिर थोड़ी देर तक में उसकी चूत को ऊपर से ही सहलाता रहा, लेकिन मौसी की तरफ से मुझे कोई हरकत नजर नहीं आई। अब में बहुत डर रहा था कि कहीं मौसी जाग ना जाए, लेकिन अब में बुरी तरह से गरम भी हो चुका था। फिर मैंने हिम्मत करके धीरे से मौसी के गाउन को ऊपर करना शुरू किया, लेकिन में उसका गाउन ऊपर नहीं कर सका और इसलिए में थोड़ा पलंग से नीचे सरक गया और धीरे से उनके गाउन के अंदर अपना एक हाथ डालकर उसकी चूत पर रखकर लेट गया। अब मुझे पता चला कि मौसी की चूत एकदम चिकनी बिना बालों की बहुत गरम थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने मौसी की चूत को सहलाना शुरू किया, जिसकी वजह से शायद मौसी को भी बड़ा मज़ा आ रहा था और तब तक मौसी जाग भी चुकी थी, लेकिन मौसी ने अपनी आंखे नहीं खोली थी और उन्होंने अपनी तरफ से कोई भी हरकत नहीं की थी, बस थोड़ा सा अपने दोनों पैरों को फैला दिया था।

फिर मैंने कुछ देर तक मौसी की चूत पर अपने हाथ से कोई हरकत नहीं की, अब मुझे डर भी लग रहा था कि मौसी नाराज ना हो जाए। फिर थोड़ी देर के बाद में फिर से मौसी की चूत सहलाने लगा और फिर में धीरे से उनकी चूत के होंठो पर अपनी उंगली को फैरने लगा था और ऊँगली को अंदर डालने की कोशिश करने लगा था, लेकिन मौसी के पैर उस समय कम फैले हुए थे इसलिए मेरी उंगली अंदर नहीं गयी। फिर मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया और पलंग पर ठीक तरह से होकर लेट गया और अब में मन ही मन में सोचने लगा कि मौसी की चूत के मज़े कैसे लिए जाए? तभी उसी समय मौसी ने करवट ली और उन्होंने मेरी तरफ अपनी पीठ को कर लिया, लेकिन मौसी ने अपने गाउन को ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की और ना ही हुक को बंद किया था। फिर में थोड़ी देर तक तो मौसी से दूर हटकर ही लेटा रहा और अपने लंड को सहलाता रहा, उसके बाद मैंने भी मौसी की तरफ करवट ली और में मौसी के साथ चिपककर लेट गया। अब थोड़ी देर के बाद मैंने मौसी के ऊपर से अपना हाथ उसके बूब्स पर रखा और में बूब्स को दबाने सहलाने लगा था। दोस्तों उस समय मौसी का एक बूब्स गाउन के बाहर ही था, में उसको सहलाने लगा था और अपने लंड को मौसी की गांड पर रगड़ रहा था।

फिर बहुत देर तक यह सब करने के बाद मैंने मौसी का गाउन उनके कूल्हों के ऊपर से हटा दिया, तब देखा कि मौसी की गांड एकदम गोरी और बहुत चिकनी भी थी। अब मैंने उसकी गांड पर अपना एक हाथ रखा और में सहलाने लगा था, कुछ देर के बाद मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया और अपने लंड को लुंगी के बाहर करके धीरे से मौसी की गांड पर लगा दिया। फिर कुछ देर के बाद मैंने अपना एक हाथ मौसी के बूब्स पर रखा और धीरे-धीरे में अपने लंड से उसकी गांड पर धक्का लगाने लगा। फिर बड़ी देर तक जब मौसी की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई, तब जाकर मैंने धीरे से मौसी के कूल्हों को फैलाकर अपने लंड का टोपा अंदर रख दिया और अब धीरे से धक्के लगाने शुरू किए। अब मौसी की चूत से पहले जो पानी निकला, उसकी वजह से मौसी की गांड कुछ चिकनी हो गयी और इसलिए मेरा लंड धीरे धीरे आगे सरकने लगा था और फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने चालू रखे और में उनके बूब्स को दबाता रहा। अब मेरे लंड से भी वीर्य निकला और मौसी की गांड तो पहले से ही चिकनी हो चुकी थी और इसलिए मेरा लंड धीरे-धीरे अंदर जा रहा था, लेकिन मेरे लंड की ज्यादा मोटाई की वजह से ज्यादा अंदर नहीं गया था। अब में ज़ोर से धक्का लगाकर मौसी को जगाना नहीं चाहता था और इसलिए मैंने धक्का नहीं लगाया और कुछ देर तक में ऐसे ही पड़ा रहा।

फिर कुछ देर के बाद मौसी के शरीर में कुछ हरकत हुई, जिसकी वजह से में डर गया और मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकालकर में एकदम सीधा होकर पलंग पर लेट गया, लेकिन में अपना लंड लुंगी के अंदर करना भूल गया था। फिर बहुत देर के बाद मौसी ने मेरी तरफ करवट ली, लेकिन में सोने का नाटक करने लगा और मैंने अपने लंड पर मौसी के हाथ का स्पर्श भी अब महसूस किया। दोस्तों मेरा लंड जो अब थोड़ा ढीला पड़ चुका था, वो दोबारा से अपने उसी आकार में आने लगा था और थोड़ी देर के बाद मौसी ने मेरे लंड को अपने नरम हाथ से सहलाना शुरू किया। फिर थोड़ी देर के बाद जब मौसी ने मेरे लंड की मोटाई और लंबाई महसूस की और तब उनसे रहा नहीं गया और वो तुरंत पलंग पर बैठी होकर मेरे लंड को अपनी आँखों को फाड़कर घूरते हुए देखने लगी। अब मौसी ने धीरे से नीचे झुककर मेरे लंड पर एक चुम्मा किया, मौसी पागल सी हो चुकी थी और वो मेरे लंड पर बार-बार चुम्मे कर रही थी। फिर मौसी ने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़े रखा और अपने दूसरे हाथ से वो अपने बूब्स को दबाने लगी। अब में यह सब देख रहा था, लेकिन में लगातार अपनी आँखों को बंद करके उनके सामने सोने का नाटक करता रहा और फिर मैंने देखा कि मौसी अब गरम होकर अपनी चूत में उंगली कर रही थी और मेरे लंड को धीरे से दबा भी रही थी।

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फिर मौसी ने मेरे लंड पर लगातार चूमना शुरू किया और वो धीरे से मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटने भी लगी थी, जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। अब मौसी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसको चूसना शुरू किया और कुछ देर तक वो मेरे लंड को चूसती और चाटती रही और अपनी चूत में उंगली भी करती रही। दोस्तों उसके बाद मौसी ने वो किया, जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। अब मौसी ने अपना गाउन उतारा और वो मेरे ऊपर आ गयी, उसके बाद मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पर रखकर धीरे से लंड के ऊपर बैठकर अंदर डालने लगी। दोस्तों उनके इतना सब करने की वजह से मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन में सोने का नाटक करता रहा। अब मौसी धीरे-धीरे अपना दबाव मेरे लंड पर दे रही थी, लेकिन मेरा लंड मोटा होने की वजह से अंदर जा ही नहीं रहा था। फिर मौसी से रहा नहीं गया, तब उसने मेरे सोने की परवाह ना करते हुए ज़ोर से एक झटका लगा दिया जिसकी वजह से मेरा लंड कुछ इंच अंदर चला गया। दोस्तों मौसी ने वो धक्का बड़ा ज़ोर से लगाया था, इसलिए मैंने अब सोने का नाटक छोड़कर अपनी आँखों को खोल दिया था। उसके बाद मैंने मौसी की तरफ देखा और चकित होने का नाटक किया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब मेरी और मौसी की आँखें एक दूसरे से मिली, मौसी ने मेरी तरफ एक बार बड़ी सेक्सी तरह से मुस्कुरा दिया। फिर मैंने पूछा कि मौसी तुम यह क्या कर रही हो? तब मौसी बोली कि मेरी चूत में आग लगाकर तुम कैसे सो सकते हो? तब मौसी ने इतना कहकर दोबारा से एक ज़ोर का झटका लगा दिया, मेरा लंड थोड़ा और अंदर चला गया। अब मेरा आधा लंड मौसी की चूत में था और मौसी की चूत मुझे बड़ी टाईट लग रही थी। फिर मैंने देखा कि मौसी धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी थी, जब मौसी नीचे होती तब वो थोड़ा सा ज़ोर लगाती, इस तरह से मेरा लंड मौसी की चूत में पूरा चला गया था और फिर मौसी ने कुछ देर तक कोई हरकत नहीं की। अब में मौसी के बूब्स को धीरे-धीरे से मसलने लगा था और में हंसते हुए उनको बोला कि मौसी तेरी चूत तो बड़ी टाईट है। फिर वो कहने लगी कि तेरे मौसा का लंड तो तेरे लंड से आधा है और में पिछले दो साल से नहीं चुदी हूँ, आज तेरा लंड देखा तो में इसको चूत में लिए बिना कैसे रह जाती? और कोई भी औरत तेरे लंड को अपनी चूत में लेना चाहेगी। अब मौसी ने धक्के लगाने चालू कर दिए थे और वो सिसकियाँ ले रही थी उनके मुहं से आहहहह ऊह्ह्ह की आवाजे आ रही थी। फिर मैंने मौसी के एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और में चूसने लगा था।

दोस्तों मौसी की हालत जोश मस्ती की वजह से बड़ी खराब हो चुकी थी और मौसी बड़ी ज़ोर-जोर से धक्के मार रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मौसी झड़ गयी और वो मेरी छाती पर लेटकर सुसताने लगी, लेकिन मेरा लंड अब भी मौसी की चूत में खूटे की तरह गड़ा हुआ था। अब में मौसी की पीठ को सहलाने लगा था और उसके होंठो को भी चूमने लगा था, क्योंकि मेरा लंड अब तक झड़ा नहीं था। फिर मैंने मौसी को धीरे से अपना लंड बाहर निकाले बिना पलंग पर लेटा दिया और अब में उसके बूब्स को मसलने और निप्पल को चूसने लगा था। अब मौसी एक बार फिर से जोश की वजह से गरम हो रही थी और मैंने धक्के लगाना चालू कर दिया। अब मौसी की गरमी बढ़ रही थी और मौसी के मुँह से वो बड़ी सेक्सी आवाजें निकल रही थी आह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह और अब मौसी अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा साथ दे रही थी। फिर मौसी मुझसे कहने लगी कि हाँ और ज़ोर से तू आज मेरी चूत को धक्के मार वाह मज़ा आ गया ऊह्ह्ह्ह हाँ पूरा अंदर डाल ऊउफ़्फ़्फ़ में ऐसे मज़े लेने के लिए कब से कितना तरस रही हूँ। दोस्तों वो सब सुनकर देखकर में भी बहुत गरम हो चुका था और अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकालकर दोबारा से मैंने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया, तब उस धक्के से मौसी के मुँह से एक ज़ोर की चीख निकल गयी।

अब मैंने उनको पूछा कि क्या हुआ? तब वो बोली कि थोड़ा धीरे कर तेरा लंड इतना मोटा और लंबा है कि यह आज शायद मेरी चूत को फाड़ देगा और मेरे पेट में जाकर बच्चेदानी पर चोट मार रहा है और में वो बात मौसी की सुनकर थोड़ा आराम से चोदने लगा था। फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद अब हम दोनों ही पूरी तरह से जोश में थे और झड़ने वाले थे, तब मैंने अपनी गति को थोड़ा तेज कर दिया और फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये। अब जब मेरा लंड मौसी की चूत में अपना पानी छोड़ रहा था, तब मौसी ज़ोर से मेरी छाती से चिपक गयी थी और वो सिसकियाँ भर रही थी। फिर में कुछ देर तक मौसी के ऊपर ही लेटा रहा, मैंने अपना लंड जो कि अब ढीला हो चुका था, मौसी की चूत से धीरे से बाहर निकालना शुरू किया। अब मौसी ने एकदम से मेरी कमर को पकड़ लिया और वो मज़े में अपने होंठो को काटने लगी। फिर मेरा लंड पचक की आवाज के साथ मौसी की चूत से बाहर निकला, उसकी चूत से हम दोनों का मिला हुआ पानी बाहर निकलने लगा था और हम दोनों कुछ देर तक चिपककर ऐसे ही लेटे रहे।

अब मैंने देखा कि मौसी बहुत खुश थी, वो मुझसे कहने लगी कि तेरे लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाकर में आज धन्य हो गयी और मुझे ज़ोर से होंठो पर एक चुम्मा किया। फिर हम दोनों कपड़े पहनकर सो गये, अगले दिन जब में उठा तब सुबह के 9 बज रहे थे और में उठकर सीधा बाथरूम जाकर नहा धोकर बाहर आया, तब मैंने देखा कि मौसी उस समय रसोई में काम कर रही थी। अब में भी सही मौका पाकर रसोई में चला गया और मैंने मौसी को एक चुम्मा किया, आज मौसी बड़ी खुश थी। फिर मौसी बर्तन साफ करने लगी, में कुछ देर तक तो मौसी को देखता रहा और रात के बारे में बात करने लगा। अब मेरा मन दोबारा से मौसी की चुदाई करने को तैयार होने लगा था, उसी समय वहीं पर मैंने मौसी को पीछे से पकड़ लिया और में उसके बूब्स को दबाने लगा। तभी मौसी मुझसे बोली कि अभी नहीं नाश्ते के बाद में करते है, लेकिन मेरा मन तो उस समय करने के लिए बड़ा ही मचल रहा था। फिर मैंने मौसी का गाउन ऊपर किया, उसके बाद में मौसी की चूत के पास आकर नीचे बैठ गया और मौसी की चूत पर चूमने लगा, लेकिन तब भी मौसी ने मना नहीं किया। फिर कुछ देर बाद मौसी ने एक स्टूल को अपने पास किया और अपने एक पैर को उस पर रख दिया।

अब मौसी को भी मेरा वो सब करने की वजह से बड़ा मज़ा आ रहा था, उसकी चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया था और अब उसके पैर को ऊपर रखने की वजह से में उसकी चूत को आराम से चाट सकता था। फिर मैंने अपनी जीभ को मौसी की चूत के दाने पर छुआ, जिसकी वजह से मौसी कांप गयी और अब में उसकी चूत में अपनी जीभ को डालकर मौसी को अपनी जीभ से चोद रहा था। तभी मौसी बोली कि मुझे आज तक ऐसा मज़ा कभी नहीं आया और फिर दस मिनट के बाद वो झड़ गयी। फिर में उठा और मैंने मौसी को झुकने के लिए कहा, मौसी टेबल पर अपने हाथ रखकर खड़ी हो गयी। अब में मौसी की गांड की तरफ आया और अपने लंड को उसकी चूत पर रखकर एक ज़ोर से धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड मौसी की चूत में चला गया और मौसी दर्द से थोड़ी कसमसाई और वो मज़े लेने लगी। फिर मैंने एक और धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड मौसी की चूत में चला गया। अब में मौसी को ज़ोर-जोर से धक्के देकर चोदने लगा था और साथ में उसके बूब्स को भी दबाने लगा था। फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये, मैंने मौसी की चूत से अपना लंड बाहर निकाला और मौसी को लंड चूसने के लिए कहा।

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फिर उसी समय मौसी ने मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और मेरे लंड को चाटकर एकदम साफ कर दिया। अब मौसी ने मुझे एक ज़ोरदार चुम्मा किया और वो बोली कि अब तुम नहा लो, में नाश्ता लगाती हूँ, मैंने मौसी से पूछा क्या नाश्ता तैयार है? तब वो बोली कि हाँ। अब मैंने कहा कि चलो फिर एक साथ नहाते है और फिर हम दोनों बाथरूम में नहाने चले गये और कुछ देर नहाने के बाद हम दोनों बिना कपड़ो के ही बाहर आए और नाश्ता करने लगे। फिर नाश्ता करते हुए मैंने थोड़ी क्रीम मौसी के बूब्स पर लगा दी और तब मौसी पूछने लगी कि यह तू क्या कर रहा है? तब में हंस पड़ा और फिर उसके बूब्स पर क्रीम को मसलने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद में उसके बूब्स से उस क्रीम को अपनी जीभ से चाटने लगा और उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। फिर कुछ देर के बाद मैंने मौसी की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मौसी अब दोबारा से गरम हो रही थी। फिर मौसी ने थोड़ी क्रीम मेरे लंड पर लगाकर सहलाना चालू कर दिया, मेरा लंड भी जोश में आकर पूरा तन गया था।

अब मौसी ने झट से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और वो उसको चूसने लगी, मेरा लंड मोटा होने की वजह से मौसी को अपना पूरा मुँह खोलकर अंदर लेना पड़ रहा था। फिर कुछ ही देर में मौसी का मुँह दर्द करने लगा, मौसी खड़ी हुई और मेरे लंड को सीधा करके अपनी चूत को अपनी उँगलियों से पूरा फैलाकर उस पर बैठ गयी, मेरा लंड अब धीरे-धीरे मौसी की चूत में पूरा समा गया। अब मौसी का मुँह मेरी तरफ था और अब हम दोनों एक दूसरे को होंठो को चूमने लगे थे, जो कि करीब पांच मिनट तक चला था। फिर मौसी बोली कि अब हम कुछ नाश्ता करते है और फिर हमने उसी आसन में ही नाश्ता करना शुरू किया। अब नाश्ता करने में हम दोनों को करीब आधा घंटा लगा और मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर ही था, वो धीरे-धीरे ऊपर नीचे हो रही थी। दोस्तों नाश्ता करते हुए मेरा लंड मौसी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था और हम दोनों को बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। दोस्तों यह था मेरे मस्त मज़े लेने का सच अपनी मौसी की चुदाई की सच्ची घटना ।।

धन्यवाद …

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