भाभी और बहन की चुदास

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प्रेषक : रितेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रितेश है और मेरी उम्र 28 साल है और में दिल्ली में रहकर एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ और में आज तक में अपनी कॉलोनी की लगभग 12 शादीशुदा औरतों को चोद चुका हूँ और वो मेरी चुदाई से हमेशा बहुत संतुष्ट होती है, क्योंकि में चुदाई सिर्फ़ चुदाई के लिए नहीं करता बल्कि सामने वाले को पूरा मज़ा देना के लिए यह सब उनके साथ करता हूँ और यह मेरी एक आदत है साथ ही में उनकी चुदाई को हमेशा 100% गुप्त रखता हूँ।

यह घटना मेरे साथ उस समय घटी जब में अपनी पढ़ाई करने के लिए पुणे में रहता था और मेरे घर के पास वाले घर में एक भैया भी रहते थे उनका नाम जसवंत था और उनको में हमेशा भैया कहता था, उनकी बीवी जिसका नाम मंजुला और जिन्हे में भाभी कहता था वो बड़ी ही सुंदर और खुशमिजाज औरत थी और जसवंत भैया की एक बहन भी थी जिसका नाम नेहा था। दोस्तों कुछ दिन पास में रहने के बाद हम सभी आपस में बहुत घुलमिल गये थे और किसी ना किसी काम से उनका मेरे घर पर और मेरा उनके घर में आना जाना लगा रहता था। एक बार जसवंत भैया और भाभी अपने गाँव चले गये और इसलिए नेहा घर में बिल्कुल अकेली रह गयी और वहाँ पर कोई फोन भी नहीं था इसलिए उनसे बात करना भी मुश्किल था और जब वो बहुत दिनों तक भी वापस नहीं आए तो एक दिन नेहा मेरे पास आई और वो मुझसे कहने लगी कि रितेश क्या तुम मेरे साथ हमारे गाँव चल सकते हो क्योंकि अभी तक मेरे भैया और भाभी वापस नहीं आए है और मेरी उनसे कोई बात भी नहीं हुई है इसलिए मुझे उनकी बहुत चिंता हो रही है। दोस्तों वो मेरी बहन जैसी थी इसलिए मैंने उसको अपनी बहन मान लिया था, लेकिन दोस्तों पराई बहन तो पराई ही होती है और फिर हम चल दिए हम दोनों कुछ घंटो के सफर के बाद उनके गाँव वाले घर पहुंच गये। तो मैंने देखा कि मंजुला भाभी उस समय कुछ काम कर रही थी और भैया मुझे दिखाई नहीं दे रहे थे इसलिए मैंने उनसे पूछा कि भाभी, क्या भैया घर में नहीं है वो कहाँ गये?

मंजुला : क्यों यहाँ पर में नहीं हूँ क्या और तुम्हारा काम भैया के बिना नहीं चलेगा?

नेहा : हाँ क्यों नहीं चलेगा? हम तो आपको ही ढूँढने यहाँ तक आए थे? और अब नेहा उनको यह जवाब देते हुए बहुत उदास हो गयी और वो कहने लगी कि आप लोगों के बिना मेरा मन नहीं लगा।

में : क्यों भैया इतनी धूप में कहाँ गये है?

मंजुला : और कहाँ उनके पास तो बस एक ही काम होता है, उनको मेरी भी बिल्कुल चिंता नहीं है क्योंकि वो भले और उनके खेत भले? मुझे यह बात कहते कहते मंजुला भाभी का चेहरा एकदम उदास हो गया।

नेहा : क्या बात है भाभी आप बड़ी उदास दिखती हो, ऐसा क्या हो गया है जो आपका यह सुंदर चेहरा बिल्कुल उतर गया?

मंजुला : आप जाने भी दीजिए यह तो हर रोज का काम है, आप उसमे क्या करोगी?

में : आप एक बार बताओ तो सही उससे आपका दिल हल्का हो जाएगा।

अब हम दोनों की बातें सुनकर मंजुला की आँखें भर आई और उस समय में और नेहा चार पाई पर बैठे हुए थे। हमारे बीच ज़मीन पर वो नीचे बैठ गयी और अब वो नेहा की गोद में अपना सर रखकर रो पड़ी, मैंने उसकी पीठ सहलाई और उसको आश्वासन दिया, तो कुछ देर बाद उसने हमे अपने मन की सभी बातें बताई। दोस्तों हुआ ऐसा था कि उसके पिताजी सूरत शहर में एक छोटी सी दुकान चलाकर अपने परिवार की सभी जरूरते पूरी कर रहे थे और भी मंजुला भी वहीं पर बड़ी हुई थी और जसवंत के साथ उसकी शादी होने के कुछ समय बाद किसी ने जसवंत को बताया कि वो जब कुंवारा था तब उसकी पत्नी मतलब कि मंजुला ने एक रतिलाल नाम के आदमी के साथ अपना चक्कर चलाया था और उनके बीच यह सब बहुत समय तक चला। उनके बीच वो सब कुछ हुआ जो नहीं होना था और फिर बस तब से ही जब से जसवंत को यह बातें पता चली वो मंजुला से बहुत नाराज़ रहने लगा था।

नेहा : क्या सच में तूने उस समय किसी दूसरे लड़के से अपना चक्कर चलाया था?

मंजुआ : नहीं तो यह सब झूठ है क्योंकि हमारी दुकान के सामने रतिलाल की पान की एक दुकान थी उसने मुझे अपने जाल में फंसाने की बहुत बार कोशिश की, लेकिन मैंने उसको ऐसा कभी कोई मौका ही नहीं दिया था जिसका वो फायदा उठाकर मेरे साथ कुछ भी गलत करता।

नेहा : रतिलाल हो या उसका कोई दूसरा, मुझे सच बता क्या तुझे किसी ने शादी से पहले चोदा था?

दोस्तों में सच अपने मन की कहूँ तो में नेहा के मुहं से वो एकदम खुली बात को सुनकर बिल्कुल चकित हो गया था, क्योंकि मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि नेहा ऐसे खुलकर बातें करेगी, लेकिन वो तो बड़ी आसानी से बातें किए जा रही थी।

मंजुला : किसी ने नहीं बस पहली बार तुम्हारे भैया ने मेरे साथ वो सब किया और मेरी सुहारात को मुझे खून भी निकाला था और वो उसने देखा भी था।

नेहा : क्यों भैया अब क्या करते है?

मंजुला : कुछ नहीं सुबह होते ही खेत में चले जाते है और रात को आते है खाना खाकर हर दिन की तरह खटपट करके वो सो जाते है।

में : वो क्या?

तभी नेहा ने मेरी जाँघ पर अपना एक हाथ मारते हुए कहा अरे बुद्धू कहीं के तू कुछ समय बाद पढ़ाई खत्म करके एक डॉक्टर बनने वाला है और तू इतना भी नहीं जानता है? चल भाभी तू इसको बता। तो मंजुला का चेहरा शरम से लाल हो गया, लेकिन वो कुछ नहीं बोली।

नेहा : क्यों भैया कितने दिनों से ऐसे करते है?

मंजुला : करीब पूरे दो महीने हो गये है।

में : किसके दो महीने हुए?

दोस्तों मेरी बात उन दोनों में से किसी ने भी नहीं सुनी, उन दोनों ने आँख से आँख मिलाई और वो धीरे धीरे नज़दीक आते आते अब उनके होंठ एक दूसरे के साथ चिपक गये और में चकित होकर देखता ही रह गया। उन दोनों की वो किस बड़ी लंबी चली उनको देखकर अब मेरे लंड में भी जान आने लगी थी। तभी अचानक से चुंबन को खत्म करके नेहा ने मेरे हाथ को पकडकर मंजुला के स्तन पर रख दिया और वो मुझसे बोली कि उस दिन तू मेरे बूब्स को घूरकर कहता था ना कि तुझे हर कभी स्तन सहलाने का दिल हो जाता है तो आज तू शुरू कर दे।

में : में तो हमेशा तेरे स्तन को सहलाने के लिए कहता था।

नेहा : बहन के स्तन को कभी भी भाई नहीं छूता और भाभी की बात बिल्कुल अलग होती है इसलिए में आज तुझे यह मौका दे रही हूँ, भाभी अब तू जल्दी से अपना ब्लाउज खोल दे वरना यह मेरे कहने पर इसको पूरा फाड़ देगा, बाद में कुछ भी मत कहना।

फिर मंजुला ने तुरंत अपने ब्लाउज को खोलकर उतार दिया और उसके बड़े आकार के आकर्षक स्तन को देखकर मेरा लंड एकदम तन गया। में बहुत जोश में आ चुका था और अब मेरे दोनों हाथ उसके दोनों बूब्स को दबाने लगे थे और नेहा ने मेरा लंड टटोलना शुरू कर दिया। फिर मैंने उससे कहा कि आईईई यह भाई का है और उसको कभी भी बहन नहीं छुआ करती और फिर जवाब दिए बिना ही नेहा एक बार फिर से मंजुला को किस करने लगी और उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर ज़ोर से दबोच लिया वो मेरे लंड को दबाने सहलाने लगी थी। अब मैंने अपना एक हाथ मंजुला के स्तन पर रखते हुए अपने दूसरे से नेहा का एक स्तन पकड़ा और उसको भी ज़ोर से दबा दिया, लेकिन मेरे ऐसा करने पर इस बार उसने मेरा बिल्कुल विरोध नहीं किया और तभी अचानक से उसने मंजुला का मुँह छोड़कर अब मेरे मुँह पर अपने नरम होंठ रख दिए वो मेरे होंठो को चूसने लगी। दोस्तों किसी लड़की के साथ किस करने का यह मेरा पहला अनुभव था, जिसका मैंने भी पूरा पूरा मज़ा लिया और उसके यह सब करने से मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी झुरझुरी होने लगी थी और अब मेरे लंड से पानी भी निकलने लगा था। अब मंजुला ने मेरा सर पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और वो भी मुझे किस करने लगी, तभी नेहा ने मेरा लंड एक बार फिर से पकड़ा और वो उसको घिसकर दबाकर मज़े लेने लगी। फिर मैंने जब उसकी कुरती के बटन पर हाथ लगाया तब उसने मेरे हाथ को झटक दिया और उसने खुद ने ही अपनी कुरती को खोल दिया। उस समय मैंने देखा कि उसने अपनी कुरती के अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब में उसके पूरे नंगे गोरे गोलमटोल बूब्स को देखकर बिल्कुल चकित रह गया, क्योंकि वो दोनों बूब्स पपीते के आकार के उठे हुए थे और उन दोनों बूब्स के बीच में छोटी सी भूरे रंग की निप्पल थी जो उस समय खड़ी हो चुकी थी और जबकी मंज़ला के बूब्स उसकी छाती पर से नीचे की तरफ थोड़ा सा झुके हुए थे और नेहा के बूब्स बहुत उँचे उठे हुए थे। मंजुला के बूब्स की निप्पल और उसका आकार भी बड़ा था। फिर अपने एक हाथ से नेहा के बूब्स को सहलाते हुए मैंने नीचे झुककर मंजुला के निप्पल को में अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था और नेहा ने कब उठकर मंजुला को चार पाई पर लेटा दिया था और उसकी मुझे बिल्कुल भी खबर नहीं थी। अब नेहा मुझसे भैया तुम मेरे पीछे आ जाओ यह बात कहकर मंजुला की जाँघ पर बैठ गयी और तुरंत नाड़ा खोलकर उसने अपनी सलवार को उतार दिया और अब वो आगे की तरफ झुककर अपनी चूत से मंजुला की चूत को रगड़ने लगी थी। उसी समय मैंने पीछे से उसके दोनों बूब्स पकड़े और में उसकी निप्पल को मसलने लगा और आगे झुकी हुई होने से उसकी खुली हुई चिकनी गांड अब ठीक मेरे सामने थी, जिसको देखकर मैंने जोश में आकर झट से अपने पजामे का भी नाड़ा खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल लिया और में नेहा के कूल्हों के बीच में रखकर घिसने लगा था। तभी नेहा मुझसे कहने लगी कि अभी ठहरो ज़रा भैया तुम्हे पहले भाभी की चुदाई करनी है मुझे उसके बाद में करना और इतना कहकर वो ज़रा सी आगे सरक गई और मंजुला ने अपनी दोनों जांघें चौड़ी की और अब मेरा लंड उसकी चूत तक पहुंच गया। मंजुला और नेहा बहुत गरम हो गये थे और दोनों की चूत एकदम गीली हो गई थी। फिर अपने एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर मैंने अपने लंड का टोपा मंजुला की चूत में डाल दिया और में अपने दूसरे हाथ से नेहा की चूत के दाने को टटोलता रहा। फिर उसी समय एक धक्का ज़ोर से लगाया कि मेरा लंड भाभी की चूत में नीचे उतर गया, मंजुला ने अपनी दोनों जाघें ऊपर उठाकर उसको नीचे सरका दिया और नेहा उसके ऊपर झुकी हुई किस करती रही। अब मेरे धक्के देने की वजह से मंजुला के कूल्हे हिलने लगे थे और चूत में झटके पड़ने लगे।

फिर उसी समय मैंने अपने धक्के की रफ़्तार को बढ़ा दिया और तभी कुछ देर बाद मंजुला ज़ोर से झड़ पड़ी और वो एकदम शांत हो गयी। फिर मैंने उसकी चूत के रस से गीला अपना लंड बाहर निकाला और नेहा ने अपने दोनों कुल्हे थोड़े से ऊपर उठाए और वो पीछे की तरफ खिसक गई और अब उस वजह से मेरे लंड का टोपा नेहा की चूत के मुँह में लग गया, लेकिन दोस्तों मंजुला की चूत और नेहा की चूत में बहुत बड़ा फ़र्क था, जबकि भाभी की चूत में मेरे लंड को जाने में कोई भी तकलीफ़ नहीं हुई और नेहा की चूत कुँवारी होने से मेरा लंड उसकी चूत में नहीं जा रहा था। सिर्फ लंड का टोपा ही उसकी चूत में गया था और उसके लिए भी मुझे बहुत ज़ोर लगाना पड़ा और फिर मैंने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और एक बार फिर से जोरदार धक्का देकर अंदर डाल दिया। नेहा अब सीईईईईईइ सीईईईईई आवाज़ करते हुए बोली आप मेरे दर्द की बिल्कुल भी चिंता मत करना भैया, आप डाल दो अपना लंड। फिर मैंने अपने एक इंच लंड को अंदर डालकर उसका इस्तेमाल करते हुए करीब दस बार धक्के लगाए और नेहा की चूत को चौड़ा होने दिया और वैसे भी मुझे उसकी चूत की सील को अब तोड़ना तो था।

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अब मैंने नेहा के दोनों कूल्हों को कसकर पकड़ा और अपने लंड को उसकी चूत में एक ज़ोर का धक्का लगा दिया। मेरा लंड उसकी चूत की सभी दीवारे तोड़ता हुआ अंदर जा पहुंचा और उस दर्द की वजह से नेहा के मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी उसी समय में थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा, लेकिन मेरा लंड हल्के हल्के झटके देता रहा और वो ज़्यादा मोटा होने की वजह से चूत को भी ज़्यादा चौड़ा कर रहा। अब खुद नेहा ने मुझसे कहा कि अब उसको दर्द कम हो रहा है भैया अब आप मुझे बहुत आराम से बिना किसी डर के धक्के देकर चोदो, आप मेरे दर्द की आप बिल्कुल भी चिंता या फिक्र मत करो। फिर मैंने अब उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर बहुत धीरे से धक्के लगाने शुरू किए और उधर आगे की तरफ झुककर नेहा ने अपने दोनों बूब्स को भाभी के मुँह के पास लाकर रख दिए और उसका इशारा समझकर मंजुला भाभी अब नेहा के मुलायम बूब्स की खड़ी निप्पल को अपनी जीभ से चाट रही थी और वो उनको चूस भी रही थी और उसका एक हाथ नेहा की चूत के दाने से खेल रहा था और जब नेहा की चूत गीली होकर फट फट आवाज करने लगी तो मैंने अपने धक्को की रफ़्तार को पहले से भी तेज कर दिया। फिर नेहा ने मुझसे कहा कि भैया आप मेरे साथ साथ भाभी को भी मज़ा चखाते रहना और वैसे मंजुला की चूत मेरे लंड से दूर कहाँ थी? इसलिए मैंने उसी समय तुरंत नेहा की चूत से अपने लंड को बाहर निकालकर मंजुला की चूत में डाल दिया और अब में उसको धक्के देकर चोदने लगा था।

अब मंजुला मुझसे बोली आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ देवर जी, में तो एक बार पहले भी झड़ चुकी हूँ इसलिए तुम अब नेहा बहन की चूत का ध्यान रखिएगा क्योंकि मेरे से ज्यादा उसको आपके लंड की आज कुछ ज्यादा ही जरूरत है। फिर मैंने अपने लंड को भाभी की चूत से बाहर निकालकर एक बार फिर से नेहा की चूत में डाल दिया और में उसको धक्के देकर चोदने लगा। दोस्तों ऐसे चार पाँच बार चूत बदलते बदलते मैंने उन दोनों को एक साथ धक्के देकर चोदा, जिसमें उन दोनों को भी मेरे साथ साथ बड़े मज़े आए। दोस्तों अब आप मुझसे जानना चाहते होंगे कि में इतनी देर तक उन दोनों को कैसे चोदता रहा और में झड़ा क्यों नहीं? इसका एक राज़ यह है कि भाभी के घर पर आने से पहले ही मैंने एक बार उनको सोचकर अपने लंड को हिलाकर मतलब कि मुठ मारकर शांत किया था, इसलिए में इतनी देर तक उसकी चुदाई के समय बिना झड़े चुदाई करता रहा और फिर लगातार आधा घंटे तक धक्के देकर चुदाई करने के बाद में मंजुला की चूत में झड़ गया। उस चुदाई के बीच नेहा एक बार और मंजुला दो बार झड़ चुकी थी। फिर उन दोनों ने उठकर मेरा लंड साफ किया और नर्म होकर अपने छोटे आकार में आते ही मेरे लंड को अपने एक हाथ में पकड़कर नेहा ने मुझसे पूछा कि भैया अगर आपको एतराज ना हो तो में क्या तुम्हारे लंड को अपने मुँह में ले लूँ? दोस्तों मुझे उससे क्या परेशानी थी? मैंने इसलिए उसको मुस्कुराकर कहा कि यह अब तुम्हारा ही है, तुम जो चाहो इसके साथ करो, मुझे उससे कोई भी आपत्ति नहीं है और में चार पाई पर एकदम सीधा लेटा रहा।

फिर नेहा ने मेरे मुहं से यह जवाब सुनकर खुश होकर तुरंत मेरे लंड की चमड़ी को नीचे सरकाकर उसका टोपा खुला कर लिया और वो टोपे को अपनी जीभ से चाटने लगी। उसी समय तुरंत ही मेरा लंड दोबारा से तन गया और मैंने उससे मेरा लंड अपने मुँह में लेने के लिए कहा और उसके लिए नेहा को अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा, लेकिन फिर भी बड़ी मुश्किल से वो मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में ले नहीं पाई और जब लंड अपने सही आकार में आया तब उसकी आखें उसको देखकर एकदम चौड़ी हो गयी और मेरे लंड का टोपा अपने मुँह में ही पकड़े हुए उसने अपने एक हाथ से लंड को सहलाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मेरे लंड से अब पानी निकलने लगा, तो अपने सर को आगे पीछे हिलाकर नेहा मेरे लंड को अब अंदर बाहर करने लगी थी और साथ ही साथ वो अपनी जीभ से उसको टटोलने भी लगी थी। अब मंजुला ठीक उसके पीछे बैठकर अपने एक हाथ से नेहा के बूब्स को धीरे धीरे सहलाती रही और वो साथ में अपने दूसरे हाथ से नेहा की चूत के दाने को भी सहलाने घिसने लगी थी जिसकी वजह से नेहा का जोश अब बहुत बढ़ गया था। फिर उसी समय मैंने उससे अपना लंड छुड़वाया और तेज़ी से मैंने उसको ज़मीन पर लेटा दिया उसने अपनी दोनों जांघे ऊपर उठाई और उनको चौड़ी करके पकड़ लिया। फिर मैंने उसकी खुली हुई चूत में तुरंत अपने लंड को एक जोरदार झटके से अंदर डाल दिया। वो उसकी गीली चिकनी चूत में बहुत आराम से फिसलता हुआ पूरा अंदर जा पहुंचा और अब में तेज़ी से लगातार धक्के देकर उसको चोदने लगा। उसके मुहं से सिसकियों की आवाज आने लगी और दस बीस धक्के देने के बाद हम दोनों ही एक साथ झड़ गए। फिर नेहा मुझसे कहने लगी कि भैया, मुँह में लंड लेने का मज़ा चूत में लेने जैसी ही है भाभी, तू भी एक बार यह मज़ा लेकर देख लेना उसके बाद मुझे बताना यह बात नेहा ने अपनी भाभी से हंसकर कहा। फिर मैंने उससे कहा कि अब मेरे लंड में ज्यादा देर चुदाई करने की ताक़त नहीं बची है। फिर मंजुला बोली देखूं तो शब्द कहकर मंजुला ने मेरे नरम लंड को अपने मुँह में ले लिया और वो उसको चूसने लगी। उसको थोड़ी देर जरुर लगी, लेकिन लंड दोबारा से तनकर खड़ा हो ही गया और उसके बाद हमारी करीब दस मिनट की एक और चुदाई चली और तब मंजुला ने मुझसे आग्रह करके मेरे लंड को अपने मुहं में झड़ने के लिए कहा मैंने उसका कहना मानकर अपने लंड को उसके मुहं में डाल दिया और मेरे लंड ने जो भी वीर्य बाहर निकाला उसको भाभी सारा पी गयी, लेकिन अब हम तीनों बहुत थके हुए थे इसलिए हम अपने अपने कपड़े पहनकर सो गये। हमें समय का पता ही नहीं चला। फिर शाम को भैया भी आ गए वो मुझे और नेहा को अचानक से वहां पर देखकर बड़ा चकित हुए नेहा ने उनको कहा कि मुझे आपकी बहुत चिंता हो रही थी इसलिए हम दोनों यहाँ पर चले आए। फिर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं है तुम अब आराम कर लो क्योंकि में भी तुम्हारे साथ जाने के बारे में सोच रहा था और फिर रात को एक साथ बैठकर खाना खाया और एक दूसरे से इधर उधर की बातें हंसी मजाक करके हम सभी सो गए। फिर उसके बाद हम सभी दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर वापस पुणे आ गये ।।

धन्यवाद …

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