चुदाई की आग ही आग

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प्रेषक : अरुण …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अरुण है और में गुजरात का रहने वाला हूँ। दोस्तों में आज एक बार फिर से आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालो को मेरे साथ हुई एक घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। दोस्तों में जिस कंपनी में नौकरी करता हूँ वहीं पर एक लड़की नौकरी करती है, उसका नाम कृष्णा है। दोस्तों हम दोनों अपने ऑफिस में एक अच्छे दोस्त की तरह ही रहते है और वो लड़की दिखने में बहुत हॉट सेक्सी है। दोस्तों उसके बूब्स का आकार 36-30-36 इंच के करीब होगा और उसके उस गोरे सेक्सी बदन को देखकर में उसका दीवाना हो चुका था, जिस दिन पहली बार मैंने उसको देखा उस दिन से में उसको पाने के सपने देखने लगा था। दोस्तों वो बहुत सुंदर हंसमुख स्वभाव की होने के साथ बड़े ही खुले विचारों की पढ़ी लिखी लड़की थी और में मन ही मन उसको प्यार करने लगा था, लेकिन उसको अपने मन की बात बताने में मुझे ना जाने क्यों डर लगता था? और वैसे हम सभी को पहले से ही पता था कि उसकी सगाई हो चुकी है, लेकिन फिर भी दोस्तों जो कुछ भी आपकी किस्मत में होगा वो सभी आपको जरुर ही एक दिन मिल जाता है। एक दिन में अपने ऑफिस से शाम के करीब 7.30 बजे अपने घर के लिए निकला ही था कि तभी अचानक से बहुत तेज बारिश होना शुरू हो गयी।

दोस्तों में उसकी वजह से पूरी तरह भीग चुका था और फिर आगे जाने के बाद मैंने देखा कि हमारे ऑफिस के थोड़ी दूरी पर उस एक मोड़ पर कृष्णा पहले से ही खड़ी हुई थी। दोस्तों शायद वो किसी ऑटो या बस का इंतजार कर रही थी और उसी वजह से वो अब तक मुझे उस जगह खड़ी मिली वरना वो मुझसे पहले ऑफिस से निकली थी और अब तक तो उसको अपने घर भी पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन बारिश की वजह से उसको कोई साधन नहीं मिला और किस्मत से वो मुझे उस जगह खड़ी मिल गई। फिर में खुश होकर उसके पास जाकर खड़ा हो गया और अब मैंने उसको पूछा क्यों क्या हुआ तुम्हे कोई ऑटो नहीं मिला क्या? जो तुम इतना परेशान नजर आ रही हो? तभी वो बोल पड़ी हाँ परेशान होने की तो यह बात ही है, देखो ना आज कितनी तेज बारिश हो रही है, इसलिए में इतनी देर से अकेली खड़ी थी और मुझे कोई ऑटो भी नहीं मिल रहा था, लेकिन अब तुम आ गए हो तो मुझे ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। फिर मैंने उसको हिम्मत करके कहा कि अगर तुम्हे आपत्ति ना हो तो चलो में तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ देता हूँ? अब वो मेरे कहते ही तुरंत मेरी मोटरसाइकिल पर मेरे पीछे बैठ गई और हम दोनों उसके घर के लिए निकल पड़े। फिर जाते समय रास्ते में कोई खड्डे आते तब में गाड़ी को ब्रेक मारता उसी समय उसके बूब्स मेरी कमर पर छू जाते, जिसकी वजह से में मन ही मन खुश हो जाता।

अब मेरा लंड उस बारिश के ठंडे पानी और मेरी गाड़ी पर पीछे बैठी उस लड़की के गरम बूब्स को छू जाने की वजह से एकदम टाईट हो गया था। दोस्तों पानी से भरे खड्डे नजर ना आने की वजह से मैंने उसको मुझे ठीक तरह से पकड़कर बैठने के लिए कहा था और अब उसका एक हाथ मेरी छाती पर था और उसके बूब्स मेरी पीठ पर छूकर मुझे स्वर्ग का आनंद दे रहे थे में उसके मुलायम बूब्स को अपनी कमर पर महसूस करके मन ही मन बहुत खुश था और में खुश होते हुए गाड़ी को चला रहा था। फिर करीब तीस मिनट के बाद मैंने अपनी गाड़ी को ठीक उसके घर के सामने ले जाकर रोक दिया। अब वो गाड़ी से नीचे उतारकर मेरे सामने खड़ी हो गई और उसने मुझे भी अंदर आने को कहा और मैंने उसको कहा कि अभी बारिश बहुत तेज है, इसलिए आज नहीं फिर कभी में आ जाऊंगा, में अभी चलता हूँ। अब वो मुझसे कहने लगी कि बाहर बारिश कुछ कम हो जाए उसके बाद आप चले जाना, तब तक आप बैठकर चाय या कॉफी पी लो। अब मैंने उसकी वो बात मान ली और में उसके साथ चला गया, उसके कपड़े पूरी तरह से भीगकर उसके गोरे गदराए हुए बदन से चिपक चुके थे और में बड़े प्यार से चकित होकर लगातार घूरकर बस उसको ही देख रहा था।

दोस्तों उन भीगे कपड़ो के चिपके होने की वजह से मुझे उसके शरीर पर अब उसकी वो ब्रा और साथ ही उसकी पेंटी की लकीर भी साफ नजर आ रही थी, जो उसकी गदराई हुई जांघो को अपने में समाये थी। फिर घर के दरवाजे पर लगे उस ताले को खोलते समय उसकी नज़र मेरी नज़र पर पड़ी और उस समय मेरी नज़र उसके बूब्स पर थी, क्योंकि वो उस समय झुकी हुई थी और उसके वो उभरे हुए बूब्स बड़े ही आकर्षक नजर आ रहे थे। फिर हम दोनों घर के अंदर चले गये और अंदर जाते ही उसने तुंरत ही लाकर मुझे मेरे हाथ में एक टावल दिया और मैंने उसको खोलकर देखा उसमे एक बरमूडा भी था। फिर वो अंदर कमरे में जाने से पहले मुझसे कहने लगी कि अपने बदन को अच्छे से साफ कर लो और उसके बाद इसको पहन भी लेना वरना इतना गीला होने की वजह से कहीं आपको सर्दी ना लग जाए? और वो चली गयी। फिर मैंने अपने गीली बदन को उस टावल से साफ किया और वो बरमूडा पहन लिया। दोस्तों अपने सभी कपड़े पानी से गीले हो जाने की वजह से मैंने उनको उतार दिया था और अब मेरे शरीर पर सिर्फ़ बरमूडा ही बाकि बचा हुआ था और फिर थोड़ी देर के बाद वो उस कमरे से बाहर आ गई।

अब मैंने देखा कि उसने एक पतला सा गाउन पहना हुआ था और उसके बड़े आकार के गले से मुझे उसकी ब्रा से बाहर झलकते हुए वो गोरे गोरे बूब्स साफ साफ नजर आ रहे थे। फिर वो मेरे पास आकर मुझसे पूछते हुए कहने लगी हाँ अब बोलो क्या पियोगे चाय या कॉफी? अब में उसको लगातार घूरता रहा, तभी उसने फिर दोबारा मुझसे पूछा और मैंने जैसे में कुछ पल की नींद में से जगा हूँ ऐसे जागते हुए उसको कहा कि कॉफी बना लो। अब वो मेरी तरफ देखकर हंसते हुए किचन की तरफ चली गयी और में उसको जाते हुए पीछे से उसके मटकते हुए कूल्हों को देखकर खुश होने लगा और उसके सपनों में दोबारा खो गया। फिर कुछ देर बाद उसने मुझे भी आवाज़ देकर वहीं पर बुला लिया, में नींद से जागकर उसके सपनों की दुनिया से बाहर निकलकर, अब किचन में चला गया। फिर मैंने रसोई में जाकर देखा वो हमारे लिए कॉफी बना रही थी और में उसके पास खड़ा होकर उसको देखने लगा। अब वो मेरी तरफ देखकर हंसते हुए मुझसे कहने लगी कि अरुण में देख रही हूँ कि तुम मुझे बहुत देर से ऐसे ही पागलों की तरह घूरकर देख रहे हो, क्यों आज क्या मेरे अंदर कुछ खास बात है? जो तुम्हारी नजर मेरे ऊपर से हटने को तैयार ही नहीं है, तुम्हे ऐसा क्या मुझ में मिल गया, मुझे भी तो बताओ?

फिर मैंने उससे कहा कि कृष्णा आज मौसम बहुत मस्त है और इस मौसम ने तुम्हे और भी ज्यादा सुंदर आकर्षक बना दिया है इसलिए मेरी नजर तुम्हारे से हटने को तैयार ही नहीं है, मुझे भी पता नहीं तुमने मेरे ऊपर ऐसा क्या जादू कर दिया कि में तुम्हारा दीवाना बन बैठा। दोस्तों उसको इतना कहकर मैंने झट से बिना समय खराब किए, उसके नरम गुलाबी होंठो पर चूम लिया, मैंने खड़े खड़े ही उसकी गर्दन को पीछे से पकड़कर उसके होंठो का मज़ा वो रस चूसना शुरू कर दिया और करीब पांच मिनट तक उसको प्यार करने के बाद मैंने उसको छोड़ दिया और में उसके बदन से दूर हट गया। अब कृष्णा ने मुझसे कहा अरे अरुण तुम यह सब क्या कर रहे हो? क्या तुम बिल्कुल पागल हो चुके हो, तुम्हे पता होना चाहिए कि मेरी सगाई हो चुकी है और तुम अपने आप पर काबू रखो, यह सब गलत है। अब मैंने उसको कहा कि कृष्णा में अपने पर बिल्कुल भी काबू नहीं रख सकता, इसलिए अब तुम ही मुझे बताओ कि में क्या करूं? में अपने आपे में तुम्हे देखकर नहीं रहता तुम बहुत सुंदर हो और में बड़े दिनों से तुम्हे अपने मन की बात कहना चाहता था कि में तुमसे प्यार करने लगा हूँ, लेकिन मुझे कोई ऐसा मौका नहीं मिला और आज में तुम्हे अपने मन की सच्ची बात कह रहा हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उसने मेरी पूरी बात को सुनकर मेरी तरफ देखा और मेरे गाल पर अपने एक हाथ को रख दिया और वो मुझसे कहने लगी, देखो अरुण मुझे बड़ी अच्छी तरह से पता है कि इस समय तुम्हारी क्या हालत है? और तुम्हारी इस हालत को देखकर मुझे भी कुछ हो रहा है, लेकिन फिर भी देखो मैंने मन को बड़ा काबू में रखा है ना वैसे ही तुम भी थोड़ी सी हिम्मत करो तुम्हे जरुर सफलता मिलेगी, क्योंकि हम दोनों इसके अलावा और कुछ कर भी नहीं सकते, यह हम दोनों की मजबूरी है। अब मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही उसका एक हाथ पकड़कर उसको झट से अपनी बाहों में ले लिया और में एक बार फिर से उसको चूमने लगा। दोस्तों उसी समय मेरे हाथ उसकी छाती पर चले गये, तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसके निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे। अब उसने मेरी इस हरकत का बिल्कुल भी विरोध नहीं किया और अब वो भी मेरा साथ देने लगी, गरम हो जाने की वजह से उसके मुहं से अब हल्की हल्की सिसकियों की आवाज भी आने लगी थी। फिर मैंने भी उसका वो जोश देखकर अब उसको पहले से भी ज्यादा कसकर अपनी बाहों में भर लिया, जिसकी वजह से उसके वो बूब्स मेरी छाती से बदने लगे थे और में खुश होकर उसके नरम होंठो को चूसने लगा था।

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फिर मैंने कुछ देर उसके पूरे बदन पर अपने हाथ को घुमाने के बाद जोश में आकर बिना देर किए उसके गाउन को खोल दिया, लेकिन उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया। दोस्तों वो मेरे सामने अब नंगी खड़ी थी, उसके बदन को बस उसकी वो काली रंग की ब्रा और उसी रंग की पेंटी का सहारा था, जो अब उसकी चूत और बूब्स की निप्पल को ढके हुए थे। दोस्तों अब मैंने उसके दोनों गोरे नरम कंधो से पकड़कर उसको उल्टा घुमाकर तुरंत ही पीछे से उसकी कमर से ब्रा के हुक को खोलकर ब्रा को उतारकर दूर फेंक दिया और उसके बाद पेंटी को भी उसके कूल्हों से पकड़ते हुए उसके घुटनों तक लाकर अपने एक पैर की मदद से नीचे लाकर उतार दिया। दोस्तों अब मैंने उसको दोबारा अपनी तरफ घुमाकर देखा उसके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था और वो अपने एक हाथ से चूत और दूसरे हाथ से अपने निप्पल को छुपाए शरमाती हुई मेरी तरफ देख रही थी। अब मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसी बात का फायदा उठाकर उसने मेरा भी बरमूडा खोलकर नीचे कर दिया, जो अब एकदम सीधा खड़ा होकर उसकी चूत को छूकर मुझे गरमी का अहसास दे रहा था, जिसकी वजह से में जोश में भरता जा रहा था।

अब उसने मेरे तनकर खड़े लंड को अपने एक हाथ में लेते हुए अपनी सारी लाज शरम को भूलकर वो मुझसे कहने लगी, देखो अरुण मेरा आज यह सब पहला अनुभव है, शायद तुमने तो अपने इस हथियार से ना जाने कितनी चूत को ढेर किया होगा, लेकिन प्लीज तुम आज मेरे साथ यह सब धीरे धीरे करना क्योंकि मुझे इन सब की आदत नहीं है और तुम मेरे मना करने के बाद भी इतना आगे बढ़ चुके हो इसलिए अब तुम्हे मना करना मुझे अच्छा नहीं लगा, क्योंकि ऐसा करने से तुम्हारा दिल टूट जाता और अब तुमने वैसे भी मेरे अंदर की आग को इतना भड़का दिया है कि मुझे भी अपने को अब रोक पाना बड़ा मुश्किल है। अब तुम्हे थोड़ा आराम से करना होगा, क्योंकि मुझे तुम्हारे इस हथियार को देखकर ही बहुत डर लग रहा है, पता नहीं यह अंदर जाकर जाने क्या करेगा? प्लीज तुम्हे अपने मज़े से ज्यादा मेरे दर्द का भी ध्यान रखना होगा, वरना सोच लेना कि इसके बाद में दोबारा तुम्हारे साथ ऐसा करना तो बहुत दूर की बात है, में तुमसे बात भी नहीं करूंगी। फिर मैंने उसी समय उसको बड़े प्यार से समझाते हुए कहा कि तुम बिल्कुल भी मत डरो मेरी रानी आज यह मेरा हथियार तुम्हारे साथ देखना बड़े ही प्यार से पेश आएगा, में कसम खाता हूँ कि में जैसा तुम कहती हो ठीक वैसा ही करूंगा और बस तुम्हे पहली बार यह सब होने की वजह से थोड़ा सा दर्द सहना जरुर पड़ेगा और उसके बाद तुम भी मेरे साथ वो मज़े लेना।

अब मैंने उसकी बड़े आकार की गहरी नाभि पर चूमना शुरू किया और में उसके पूरे मुलायम पेट को चूमता ही रहा और उसके बाद मैंने उसके दोनों गोरे गोल गोल कूल्हों पर भी चूम लिया और उसी समय मेरा एक हाथ उसके बूब्स को दबाने के साथ साथ निप्पल को सहला भी रहे थे, जिसकी वजह से वो जोश में आकर अब पागलों की तरह सिसकियाँ लेकर अपने मुहं को वो इधर उधर करने लगी थी। फिर मैंने उसकी वो बैचेनी देखकर समझकर तुरंत ही उसको नीचे लेटा दिया और अब मैंने उसके दोनों पैरों को पूरा फैला दिया। दोस्तों अब मेरी आँखों के सामने एकदम चिकनी उभरी हुई उसकी वो गीली रसभरी चूत थी। वो दोनों पैर खुले होने की वजह से अब खुली हुई मेरी आँखों के सामने थी और मुझे उसकी उस कुंवारी गुलाबी रंग की चूत के अंदर का वो उठा हुआ दाना भी नजर आ रहा था। दोस्तों में अब नीचे आकर उसकी गीली चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। ऐसा करने में मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था में सातवें असमान में था। फिर मैंने महसूस किया कि वो मेरे यह सब करने की वजह से इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी कि वो अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर अब मेरे मुहं में अपनी चूत को डालने लगी थी और में उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से टटोलने लगा था।

दोस्तों जिसकी वजह से वो जोश में भरकर मेरे मुहं को अपनी चूत में दबाने लगी थी और में खुश होकर उसकी रसभरी चूत को चूसने लगा था। अब वो मुझसे बोली कि अरुण प्लीज अब कुछ करो अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ प्लीज जल्दी से तुम कुछ करो, मुझसे अब रहा नहीं जाता। फिर उसी समय उसने मेरे सर को अपनी गोरी गरम जांघो के बीच दबा लिया और अब उसकी चूत से गरम और चिकना पानी बाहर निकल रहा था। फिर कुछ मिनट बाद ठंडे होकर उसने अपनी पकड़ को ढीला छोड़ दिया, उसी समय मैंने बिना देर किए अपना लंड उसकी रसभरी चूत के मुहं पर रख दिया और एक धक्का दे दिया। अब मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के अंदर जाते ही वो दर्द से चिल्ला उठी ऊऊईईईई माँ अरून में मर गई उफ्फ्फ्फ़ मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है देखो में इस दर्द से मरी जा रही हूँ आह्ह्ह्ह तुमने यह क्या किया? प्लीज अब तुम इसको बाहर निकालो छोड़ दो मुझे। फिर मैंने देखा कि मेरे उस धक्के की वजह से दर्द होने से उसकी आँखों में पानी आ गया था और वो दर्द की वजह से तड़पने लगी थी। अब में उसका वो दुःख दर्द देखकर थोड़ी देर वैसे ही रुक गया और अब में उसके बूब्स को सहलाते हुए उसकी नाभि पर अपनी जीभ को घुमाने लगा। फिर थोड़ी देर बाद जब वो मज़े कर रही थी तो मैंने धीरे से एक और धक्का दे दिया जिसकी वजह से मैंने अपना पूरा 7 इंच लंबा लंड उसकी चूत में अंदर गहराईयों तक डाल दिया।

दोस्तों पूरा लंड अंदर जाते ही जैसे हम दोनों ने राहत की साँस ली। वो एक जोरदार चीख के साथ मुझे अपने से भींचकर एकदम शांत हो गई और अब में भी उसके ऊपर ही लेट गया, में उसके होंठो को चूसते हुए उसके बूब्स को सहलाकर उसको शांत करने लगा। जब वो मुझे शांत लगने लगी तब मैंने हल्के धक्के देने शुरू किए और अब में उसको चोदने लगा था। दोस्तों मेरा पूरा लंड अब बिना किसी रुकावट के उसकी चूत के अंदर जाकर बाहर आ रहा था और उसको मेरे हर एक धक्के से अब ज्यादा मज़े आने लगे थे। फिर करीब दस मिनट तक धक्के लगाने के बाद मुझे लगा कि वो अब झड़ गयी है। दोस्तों वो अब बड़ी शांत एकदम निढाल पड़ी हुई थी उसका पूरा जोश ठंडा हो चुका था, लेकिन में अभी ठंडा नहीं हुआ था और इसलिए मैंने अपने धक्कों की रफ्तार को पहले से ज्यादा बढ़ाते हुए अपने धक्के चालू रखे। अब वो एक बार फिर से गरम हो चुकी थी, उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और में उसका जोश देखकर उसको ताबड़तोड़ धक्के देकर चोदने लगा था। दोस्तों एक बार फिर से करीब दस मिनट के बाद वो आआह्ह्ह्हह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ करती हुई दोबारा से झड़ गयी और मैंने उसकी चिपचिपी चूत में अपने लंड को वैसे ही आगे पीछे करके अपनी तरफ से धक्के देना चालू रखा।

फिर करीब 15 मिनट के बाद में भी झड़ने वाला था और कुछ धक्के देकर मैंने अपना पूरा पानी उसकी चूत की गहराईयों में ही छोड़ दिया और फिर में थककर उसके ऊपर ही ढेर होकर लेट गया। फिर थोड़ी देर के बाद में उसके ऊपर से हटकर उसके पास ही लेट गया, तब वो उठकर बाथरूम में चली गयी और कुछ देर बाद अपने कपड़े पहनकर वापस आकर उसने मेरे कपड़े को प्रेस करके सुखा दिया। अब मैंने अपने कपड़े पहने उसी समय मैंने उसके चेहरे को देखा वो अब ख़ुशी उस हमारी चुदाई की वजह से एकदम संतुष्ट नजर आ रही थी उसने अपने मुहं से मुझे कुछ कहा तो नहीं लेकिन में उसके मन में चल रही सभी बातों को भली भांति समझ चुका था कि वो मेरे साथ अपनी पहली चुदाई से बहुत खुश है और फिर में उसको बाय कहकर अपने घर आ गया। दोस्तों उसके साथ उस चुदाई ने मेरा पूरा जीवन बदल दिया था मुझे भी इस बात की बहुत खुशी थी क्योंकि में अब उसकी चुदाई करने के सपने देखने लगा था और उस दिन मैंने अपने मन की इच्छा को उसकी चुदाई करके पूरा कर लिया था।

फिर मैंने दूसरे दिन अपने ऑफिस में जब उसको देखा, में उसके पास गया और उसने मुझे ऑफिस के स्टोर रूम में मुझसे मिलने के लिए कहा और फिर वो चली गई कुछ देर बाद में उसके पास उसी स्टोर में पहुंच गया, वहां पर जाते ही उसने बड़ी चिंता के साथ मुझसे पूछा क्यों अरुण कुछ होगा तो नहीं ना? अब मैंने बिल्कुल ना समझ बनकर उसको कहा तुम्हारा कुछ का मतलब क्या है? अब वो तुरंत बोल पड़ी मेरे मतलब था कि हमारे बीच कल रात को हुए उस काम की वजह से मुझे बच्चा वच्चा कुछ होगा तो नहीं? अब मैंने उसको कहा कि ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम इस बात के लिए इतना डरती क्यों हो? वैसे भी यह काम हम दोनों की मर्जी से हुआ है तुमने डरने की जरूरत नहीं है में हूँ ना तुम्हारे साथ में सब सम्भाल लूँगा। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर तुरंत मुझसे वहीं पर लिपट गयी और धीमी आवाज में कहने लगी कि मुझे ना जाने क्यों फिर भी डर लगता है? फिर मैंने उसको कहा कि ऐसा कुछ भी तुम्हारे साथ नहीं होगा, तुम डरो मत और यह बात कहते हुए मैंने उसके होंठो पर एक किस कर दिया और में उसके होंठो को चूसने लगा, जिसमे कुछ देर बाद वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर वापस अपने ऑफिस में आ गए और उसके बाद से मैंने देखा कि उसका चेहरा अब पहले से ज्यादा सुंदर होने के साथ साथ वो खुश भी रहने लगी थी और में भी यह देखकर बड़ा खुश था। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची चुदाई की घटना मेरा अपने साथ काम करने वाली बड़ी सुंदर लड़की के साथ अपना वो पहला सेक्स अनुभव ।।

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धन्यवाद …

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