देवर के लंड का फव्वारा

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प्रेषक : विधि …

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विधि है और में एक शादीशुदा औरत हूँ। दोस्तों यह मेरी शादी के एक साल बाद की एक सच्ची घटना जिसको में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालो को सुनाने जा रही हूँ और इसको मैंने लिखकर आप सभी तक पहुँचाने के लिए बहुत बार विचार बनाया, लेकिन ना जाने क्यों हर बार में पीछे हट गई? और आज यह आप सभी के सामने है। दोस्तों में अपने पति के साथ बड़े मज़े से उन दिनों रहती थी और हमारे उस घर में बस हम दोनों ही रहते, वैसे में बहुत सेक्सी हूँ और मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता। दोस्तों मुझे शुरू से ही सेक्स के प्रति बहुत रूचि रही है और जब में शादी होकर अपने पति के पास आई, तब मैंने अपने चुदाई के उस सपने को पूरा करने के बारे में सोचा, लेकिन वो तब भी अधुरा ही रह गया। दोस्तों क्योंकि में आज भी अपने पति के साथ अपनी चुदाई में उनकी तरफ से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी, वैसे मेरे पति भी सेक्स में अच्छे है, लेकिन वो मुझे वो कभी भी उतना मज़ा नहीं दे सके जिसकी मुझे उनसे उम्मीद थी। एक दिन एक पत्र को पढ़कर वो मुझसे बोले कि विधि मेरा एक चचेरा भाई जो नज़दीक के एक छोटे गाँव में रहता है, उसके स.स.सी. के पेपर का सेंटर इस शहर में आया है।

अब वो अपनी आगे की पढ़ाई करने और अपने पेपर देने के लिए इसी शहर में आ रहा है और वो अगर कुछ दिन यहाँ पर रहे तो तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नहीं है? फिर मैंने उनको कहा कि भला मुझे इसमे क्या ऐतराज़ होगा? वो आपका भाई है, तो मेरा भी तो रिश्ते में देवर हुआ ना और इसलिए देवर के आने से भाभी को क्या ऐतराज़ हो सकता है? दोस्तों उसका नाम बंटी था और फिर वो आ गया, तब उसकी उम्र करीब 18 साल होगी, उसकी लम्बाई 5,8 और बड़ा मजबूत शरीर था। दोस्तों वो मोटा नहीं था, लेकिन उसका बदन बहुत कसा हुआ था उसके हल्की सी मुछे भी थी। अब हमारे घर में उसके आने के बाद बस्ती हो गयी, सुबह का नाश्ता हम तीनो में, मेरे पति और बंटी साथ में करने लगे थे। दोस्तों पहले मेरे पति के ऑफिस चले जाने के बाद में घर में हमेशा अकेली हुआ करती थी, लेकिन अब मेरे साथ बंटी भी था और बंटी पूरा दिन अपना मन लगाकर पढ़ाई करता। फिर में भी उसको कभी भी ज़्यादा परेशान नहीं करती और में उसको पढ़ने देती थी, लेकिन दिन का खाना और दोपहर की चाय हम साथ ही पीते थे।

दोस्तों दोपहर को जब में नींद से उठती, तब में एक बार बंटी के कमरे की तरफ चली जाती और उसको पूछ लिया करती क्यों पढ़ाई कैसी हो रही है? तब बंटी मुझसे कहता कि हाँ एकदम अच्छी हो रही है और फिर में उसको पूछती क्यों तुम चाय पियोगे ना? बंटी कहता कि हाँ और फिर में उसका यह जवाब सुनकर चाय बनाने रसोई में चली जाती। फिर कुछ देर बाद हम साथ में बैठ जाते चाय पीने और चाय पीते समय हम दोनों एक दूसरे से बहुत सारी बातें हंसी मजाक भी किया करते थे, लेकिन उस दिन जब में दोपहर की नींद से अपने उठने के समय से जल्दी ही उठ गयी और जब में हर दिन की तरह बंटी के कमरे में चली गई। फिर मैंने देखा कि उसके कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद था और मुझे उसके कमरे से कुछ अजीब सी आवाजे भी आ रही थी। अब में तुरंत वहीं पर रुक गयी और उन आती हुई आवाजो को में बहुत ध्यान से सुनने लगी थी। अब मुझे कमरे के अंदर से आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह की आवाज़ आती हुई सुनाई दे रही थी, लेकिन मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आया कि अंदर क्या हो रहा है? अब में दरवाज़ा बजाने ही वाली थी कि उसी समय मुझे ध्यान आया कि में पहले खिड़की से देख लूँ क्योंकि उस कमरे की एक खिड़की बाहर बरामदे में थी।

अब मैंने देखा कि वो पूरी लगी हुई नहीं थी और इसलिए मैंने हल्का सा धक्का दे दिया और उसको थोड़ा सा खोल दिया। दोस्तों उसके बाद मैंने कमरे के अंदर का वो द्रश्य देखा और बस में देखती ही रह गयी, उस समय बंटी अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा खड़ा था और उसका लंड पूरा तना हुआ था। अब मैंने देखा कि बंटी अपने लंड को एक हाथ में लिए हुए था और वो अपने लंड से खेल रहा था और वो सब देखकर मेरी आंखे भी अब झपकना भूल गई थी। अब मेरे दिल की धड़कने पहले से ज्यादा बढ़ चुकी थी, क्योंकि अब मेरे सामने एक 18 साल का जवान लड़का अपने हाथ में तना हुआ लंड लेकर मुठ मार रहा था। दोस्तों वैसे मैंने मर्दों के मुठ मारने के बारे में कई बार सुन रखा था, लेकिन आज में उस काम को अपनी आँखों से पहली बार देख रही थी, ओह्ह्ह वाह क्या मस्त मज़ेदार द्रश्य था? क्योंकि आज एक पूरी जवानी से भरा हुआ कसरती बदन वाला नवयुवक मेरे सामने पूरा नंगा खड़ा हुआ था। दोस्तों उसकी खुली हुई छाती ही किसी लड़की को व्याकुल करने और उसको अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बहुत थी, लेकिन यहाँ तो उसकी सुद्र्ड़ जांघे भी मेरी आँखों के सामने थी, वाह क्या मस्त भरी हुई जांघे थी उसकी?

दोस्तों उसकी दोनों जांघो के बीच में पूरे जोश से उठा हुआ उसका लंड था, जिसको देखकर मेरे दिल की धड़कने तेज़ हो चुकी थी और अब मेरे संस्कार मुझसे कह रहे थे कि मुझे तुरंत वहाँ से हट जाना चाहिए, लेकिन मेरा मन नहीं मानता था इसलिए में रुक ही गई। फिर में वो दिलकश द्रश्य देखती ही रही और वो खिड़की थोड़ी ही खुली थी, इसलिए उसका ध्यान मेरी तरफ बिल्कुल भी नहीं था। फिर उस समय बंटी तो अपने उस काम में एकदम मगन होकर लगा हुआ था और उसके चेहरे से सेक्स की तड़प स्पष्ट रूप से झलक रही थी। अब धीरे धीरे उसका लंड और भी ज्यादा मोटा और कड़क होता जा रहा था, थोड़ी देर के बाद बंटी के लंड से पानी निकल गया और बंटी बिल्कुल ढीला हो गया, तब में मौका पाकर वहाँ से चली गयी। फिर मुझे ध्यान आया कि अब मेरी पेंटी भी वो द्रश्य देखकर गीली हो चुकी थी और फिर मैंने अपने कमरे में जाकर उसको बदल लिया, लेकिन वो द्रश्य अब भी मेरे दिमाग़ से हटता ही नहीं हर बार वही सब मेरे सामने आ रहा था। फिर रात को में अपने पति देव के साथ सोने लगी, लेकिन तब भी मेरे दिमाग़ में वही सब मंडरा रहा था, इसलिए उस रात को में बहुत गरम हो चुकी और में जोश में आकर अपने पति के ऊपर चड़ गयी।

अब मैंने उनको चूमना अपने हाथों से सहलाते हुए सेक्स करने के लिए तैयार करना शुरू किया क्योंकि मुझे अब अपनी गरम चूत को ठंडा करना था और कुछ देर बाद अपने पति से भी मैंने बहुत जमकर अपनी चुदाई के मज़े लिए। फिर वो भी मुझसे बोल उठे क्या बात है? आज तुझे क्या हुआ है? क्या कोई ब्लूफिल्म तो नहीं देख ली? दोस्तों में उनको क्या कहती? क्योंकि इससे बड़ी ब्लूफिल्म में क्या देखती? अब मैंने भी उनको कह दिया कि नहीं यह तो आप कल से दस दिन के लिए बाहर जाने वाले है ना इसलिए। फिर वो मेरी उस बात को सुनकर हंस पड़े और दूसरे दिन सुबह जल्दी ही मेरे पति अपने काम से बाहर निकल गये, लेकिन मेरा मन तो अब बंटी में अटका हुआ था और मेरा पूरा बदन उसके साथ अपनी चुदाई करवाने के लिए बड़ा ही तड़प रहा था। दोस्तों में उसको अपने मन की यह बात कहूँ भी तो कैसे? क्योंकि उसमे बड़ा ख़तरा था और बंटी बहुत सुशील लड़का था, वो मुझे ठुकरा देगा और मेरी इज़्ज़त पर ख़तरा हो जाएगा। फिर यह बात सोचकर में चुप थी और कुछ देर बाद मैंने सोचा कि मुझे कुछ ऐसा करना होगा जिसकी वजह से बंटी ही मुझे चोदने के लिए तरस जाए? फिर मैंने बड़े धीरज से काम लेना उचित समझा और में विचार बनाते हुए स्नान करके बाथरूम से बाहर निकली।

अब तक मेरे दिमाग़ में एक योजना बन चुकी थी और वो बात सोचकर मैंने अपने कपड़ो में बड़ा परिवर्तन करना शुरू किया। अब मैंने एक गहरे गले का मेरी शादी के समय का पुराना ब्लाउज निकला उस समय की अपेक्षा अब मेरे बूब्स ज्यादा बड़े हो चुके थे क्योंकि वो हर दिन मेरे पतिदेव के हाथों से मसले जो जाते थे। फिर जैसे तैसे करके अपने बड़े आकार के बूब्स को दबाकर मैंने उस कसे हुए ब्लाउज को पहन लिया वो गहरे गले का था इसलिए मेरे उभरे हुए बूब्स का पूरा मस्त द्रश्य साफ दिख रहा था और बूब्स को दबाकर अंदर डालने से निप्पल भी उभरकर बाहर से दिख रहे थे। फिर मैंने अपनी साड़ी भी इस तरह पहनती थी कि मेरी पूरी छाती खुली ही रहे मेरे बूब्स कहीं आँचल के पीछे ना छुप जाए। फिर मैंने कांच में अपने बदले रूप को देखा और में बहुत खुश संतुष्ट हो गई, उसके बाद मैंने नाश्ते की तैयारियाँ कि उसके बाद खाने की टेबल पर वो सभी चीज़े सजाकर रखी। फिर नाश्ता करने के लिए मैंने बंटी को आवाज देकर बुला लिया और बंटी आकर बैठ गया, लेकिन उसका ध्यान मेरी छाती की तरफ बिल्कुल भी नहीं गया, क्योंकि वो तो हमेशा अपनी पढ़ाई के विचारों में ही व्यस्त था।

दोस्तों मैंने जानबूझ कर खाना उसको कम ही दिया था और उतना वो झट से खा गया, उसने मुझसे अब और माँग लिया। अब में अपने प्लान के पूरा होने पर मन ही मन मुस्कुराई और में उठकर खड़ी हो गई और अब में उसको खाना परोसने के लिए बंटी के बिल्कुल पास आ गई, उस समय में उसके एक तरफ खड़ी हुई थी। फिर में वहीं खड़े होकर आगे झुककर खाना उठाने लगी, स्वाभाविक है कि मेरे बूब्स बंटी के मुहं के एकदम पास आ गये। अब उसकी नज़र मेरी छाती पर चली गई और वो मेरे खुले हुए गोरे गोरे बूब्स को अपनी चकित नजरो से घूर घूरकर देखता ही रह गया। दोस्तों बड़े आकार के गले से वो मस्त द्रश्य उसको बिल्कुल साफ दिखने लगा था और मेरे बूब्स पर उसकी नज़र चिपकी ही रह गई। अब में उसके सामने जानबूझ कर ऐसा व्यहवार कर रही थी, जैसे कि मुझे कुछ पता ही नहीं हो। फिर मैंने एक लंबी साँस भरी और हल्के से छोड़ी जिसकी वजह से मेरे बूब्स पहले से ज्यादा बाहर आ गए और बूब्स में हलचल भी हुई। अब उसको बिल्कुल भी ध्यान ही नहीं रहा कि मैंने उसकी प्लेट में खाना परोस दिया है और मैंने मुस्कुराते हुए उसको कहा कि देवरजी अब आप नाश्ता भी कर लो क्या इनको देखकर ही आज अपना पेट भरने का इरादा है?

अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम से चौंक गया और वो अपनी नजर मेरी छाती से तुरंत हटाकर खाने लगा, लेकिन मेरी नज़र अब उसी पर लगी हुई थी और वो बार बार अपनी चोर नजर से मेरे बूब्स को देख रहा था। दोस्तों में अपने उस प्लान में एकदम सफल रही जैसा मैंने सोचा था, ठीक वैसा ही हुआ आज मैंने बंटी के मन में मेरे नाम का बीज बो दिया था। फिर दूसरे दिन से में हर दिन अपने कपड़ो में एक कदम आगे जाने लगी थी और दूसरे दिन भी मैंने ऐसा ही गहरे गले का और बिना बाह का ब्लाउज पहन लिया, जिसकी वजह से अब उसको मेरी गोरी बाहें भी साफ दिखने लगी थी और उसने बड़े मस्त मज़े किए। फिर तीसरे दिन मैंने एकदम पारदर्शक जालीदार ब्लाउज पहन लिया और उस ब्लाउज से मेरी काले रंग की ब्रा भी एकदम साफ दिखाई दे रही थी। अब बंटी हर दिन चोरीछिपे मेरे स्तन को देखने लगा था और उसको ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरा मन भी बहुत खुश हो रहा था। फिर चौथे दिन से मैंने अब ब्रा ही पहनना छोड़ दिया था, मेरा ब्लाउज तो पहले से ही पारदर्शक बिना बाह का और गहरे गले का था।

फिर उस रात को मैंने अपने ब्लाउज को भी एक तरफ से आकार देकर ऐसा बना दिया था कि उसको मेरे बूब्स के सामने के अलावा अब साइड से भी मेरे बूब्स के दर्शन होने लगे थे और पाँचवे दिन मैंने उस ब्लाउज को पहना। दोस्तों अब जब में उसको खाना परोस रही थी, तब दूसरी तरफ रखे हुए सामान को उठाने के लिए में उसके सामने इतना नीचे झुक गई कि उसकी तेज गति से चलती हुई गरम सांसे मेरे स्तन को छु रही थी कभी कभी तो उसका चेहरा भी मेरे बूब्स को छु जाता में इतना ज्यादा उसके ऊपर झुक रही थी। अब मुझे उसकी आँखों में एक प्यास साफ नज़र आ रही थी और में बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि में अपने काम में कामयाब होती जा रही हूँ। फिर छ्टे दिन मैंने अपनी सारी को भी एकदम नीचे पहना था और में उस दिन अच्छी तरह से सजधजकर तैयार हुई और अब हर दिन की तरह बंटी आज भी मेरे उभरे हुए दोनों बूब्स को अपनी आंखे फाड़ फाड़कर देखता रहा और में उन्हे लंबी लंबी साँस लेकर ऊपर नीचे करती रही। दोस्तों मैंने अपने ब्लाउज का एक हुक पहले से थोड़ा ढीला कर दिया था जो थोड़ी देर बाद मेरे तेज साँस लेने की वजह से खुल गया और अब मेरे दबे हुए स्तन एक ही बार में पूरे उछलकर उसके सामने आ गये।

अब मैंने उसके सामने थोड़ा सा शरमाने का ढोंग किया और में अपने नज़ारा में जाकर हुक को ठीक तरह से लगाकर वापस उसके पास आ गयी, उस समय उसकी हालत तो देखने लायक हो चुकी थी। फिर उसी दिन दोपहर के समय में हॉल में ही सो गयी और मैंने एक सेक्सी किताब अपने पास लाकर रखी हुई थी जो देवर भाभी के नाज़ायज़ संबंध पर थी। दोस्तों उस किताब में दोनों के सेक्स संबंध का खुला ब्योरा था वहाँ तक मैंने पेज को खोलकर उल्टी करके उस किताब को रख दिया और जैसे में वहाँ तक उस किताब को पढ़ते हुए सो गयी हूँ। अब में सोने का ढोंग करते हुए लेटी हुई थी, मैंने अपनी साड़ी को घुटनों तक सरका रखा था। फिर हर दिन की चाय का समय हुआ, लेकिन में उस दिन जानबूझ कर नहीं उठी और थोड़ी देर के इंतज़ार के बाद बंटी चाय के लिए बताने अपने कमरे से बाहर आया। फिर उसने आकर देखा कि में सोई हुई हूँ, बंटी मेरे पास आ गया और उसने वो किताब उठाई और जैसे ही वो उसको पढ़ने लगा वो जोश से भरने लगा क्योंकि उस किताब में देवर भाभी के बीच सेक्स का खुला ब्योरा था। अब उसको पढ़कर उसकी कामवासना भड़क उठी और उतने में मैंने करवट बदलने का बहाना किया और करवट बदलते हुए मैंने मेरे एक पैर को भी घुटनों से ऊँचा उठा लिया जिसकी वजह मेरी साड़ी जो घुटनों तक थी।

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अब कमर तक आ चुकी थी और उस वजह से मेरी गोरी जाँघ अब पूरी तरह से दिख रही थी, मैंने हल्की सी अपनी आंख खोली। अब मैंने देखा कि उसका लंड एकदम खड़ा हो चुका था उसने अंडरवियर पहन रखी थी, वो अपने एक हाथ में किताब पकड़े हुए था और दूसरा हाथ अब उसने अपनी अंडरवियर में डाल दिया और उसने अपने खड़े लंड को मजबूती से पकड़ लिया, थोड़ी देर वो उसको पढ़ता रहा और मेरी जाँघ और बूब्स की तरफ वो देखता रहा। फिर मैंने देखा कि उसने अपना दूसरा हाथ बाहर निकालकर मेरी तरफ बढ़ा दिया, में एकदम खुश हो गयी और में अपनी दोनों आँखों को बंद करके इंतज़ार करने लगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। फिर मैंने अपनी आंखे खोली और देखा तो बंटी उस समय वहाँ पर नहीं था शायद उसकी हिम्मत नहीं बनी थी इसलिए वो अब अपने कमरे में चला गया था हाँ, लेकिन वो किताब को अपने साथ जरुर ले गया था। अब में उठी और बंटी के कमरे की तरफ चली गयी, मैंने देखा कि बंटी अब अपने कमरे के दरवाज़ा बंद करके एक बार फिर से मुठ मार रहा था आज तो उसने अपना घोड़े जैसा लंड खड़ा किया हुआ था। अब मुझे बहुत अफ़सोस हो रहा था क्योंकि जिस लंड को आज मेरी चूत में होना चाहिए था आज वो लंड बंटी के हाथों में था, लेकिन मुझे भी तो उसके सामने नहीं आना था यह बात सोचकर में मजबूरी में उसको देखती रही।

फिर थोड़ी देर बाद बंटी के लंड से वो फव्वारा निकला और उसका लंड शांत हो गया और उसी रात को मैंने सातवे दिन का प्लान पहले से ही बना लिया था क्योंकि इतना सब कुछ देखने के बाद बंटी के दिल में कामवासना तो में पहले से ही जगा चुकी थी। अब तो मुझे उसकी उस हिम्मत को थोड़ा सा बढ़ाना ही बाकी था इसलिए मैंने सातवे दिन सुबह अपने कमरे का फ्यूज़ बाहर निकाल दिया और गीजर खराब है कहकर मैंने बंटी के साथ बाथरूम में नहाने का प्लान बना लिया था। अब में अपने कपड़े लेकर बाथरूम के अंदर चली गयी, तभी थोड़ी देर नहाकर बाहर निकली उस समय मैंने अपने बदन पर सिर्फ़ टावल को लपेटा हुआ था, ऊपर मेरे बूब्स की निप्पल से शुरू करके चूत तक टावल से मैंने अपने गोरे सेक्सी बदन को ढाका हुआ था। अब मेरे निप्पल से ऊपर के बूब्स का हिस्सा और चूत के नीचे की जांघे सब खुली हुई थी, मेरे सर के बाल गीले थे और मेरे गोरे बदन पर पानी सरककर नीचे आ रहा था, में उस रूप में बड़ी सेक्सी लग रही थी। दोस्तों उन दिनों गरमी भी बहुत थी इसलिए बंटी सिर्फ़ अंडरवियर पहनकर पंखे के नीचे खड़ा हुआ था, जब उसने मुझे देखा तो बस वो देखता ही रह गया क्योंकि इतना नंगा मुझे उसने आज पहली बार ही देखा था में उधर ही खड़ी रही।

अब बंटी भी अपनी सारी शरम को छोड़कर मुझे लगातार अपनी खा जाने वाली नजरो से देख रहा था और मैंने उसके पलंग पर वो किताब पड़ी हुई देखी। फिर मैंने उसी समय उसको पूछ ही लिया क्यों कैसी लगी तुम्हे यह कहानी? उसने कहा कि यह तो बड़ी ही मजेदार रोचक है, लेकिन ऐसा तो बस कहानियों में ही होता है ना? अब मैंने उसको कहा कि कहानियाँ भी तो हमारे समाज से ही मिलती है ना और अब बंटी ने मेरे मुहं से वो बात सुनकर थोड़ी हिम्मत कि तब जाकर वो हंस सका। दोस्तों वो हंसा इसलिए था क्योंकि किस्मत से उस किताब में देवर भाभी के नाम भी हम दोनों के थे। अब मैंने उसको कहा कि आख़िर शुरुआत तो मर्द को ही करनी पड़ती है और वो यह बात सुनकर मंद मंद हंसा और मेरी उस बात का मतलब भी वो तुरंत ही समझ गया और अब वो मेरे पास आ गया। फिर में भी तुरंत समझ गयी कि आज मेरा काम पूरा हो गया है, उसने मेरे पास आकर अपने दोनों हाथ उठाए और मेरे पूरे खुले हुए गीले बालो में फंसाते हुए हाथों को दोनों कान पर रखा और फिर उसने मेरा चेहरा ऊँचा किया। अब में भी कामवासना से भरी नज़र से उसको देख रही थी, वो थोड़ा नीचे झुका और उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए।

दोस्तों उसके ऐसा करने से में एकदम रोमांचित हो उठी मैंने उसको अपने होठों को कुछ देर चूसने दिया, अपनी तरफ से कोई भी विरोध नहीं किया जिसकी वजह से उसकी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और उसने मुझे अपने पास खीच लिया। अब में भी झट से उसके पास जा सरकी, लेकिन सरकने से पहले ही मैंने अपने एक हाथ से बड़ी सफाई के साथ उस टावल को खोल दिया था, जिसके खुलते ही वो टावल तुरंत नीचे गिर पड़ा। दोस्तों अब में पूरी नंगी खड़ी थी और वो सिर्फ़ अंडरवियर पहने हुए था में एकदम पास जाकर उसके बदन से एकदम चिपक गयी। अब उसने जोश में आकर मुझे थोड़ी तेज़ चूम लिया, लेकिन वो इस काम में नया नया था इसलिए उसको इतना नहीं आता था और इसलिए अब मैंने भी अपना काम करना शुरू कर दिया। अब मैंने अपने होंठो और जीभ से उसका पूरा साथ दिया, बंटी किसी भी काम को सीखने में बड़ा तेज था, उसने मेरे साथ वो सब करना तुरंत ही सीख समझ लिया था और अब हम दोनों ही एक लंबी अच्छी चुम्बन में खो गये। अब हम दोनों के होंठ से होंठ और जीभ से जीभ मिल चुके थे हम दोनों एक दूसरे का रसपान करते रहे। फिर मैंने उसी समय अपनी गोरी बाहों को बंटी के गले में डाल दिया और अब उसकी बाहें मेरी पीठ पर घूम रही थी, मैंने उसको कहा दोनों हाथों को सिर्फ़ ऐसे ही मत घुमाओ।

अब उनसे मुझे अपनी तरफ दबाया साथ ही उसने ज़ोर भी बढ़ाया और फिर मेरे बूब्स और निप्पल बंटी की छाती से चिपक गये, उसको भी ऐसा करने में बड़ा मस्त मज़ा आ गया और उसने ज़ोर बढ़ा दिया था, जिसकी वजह से उसको भी आनंद आने लगा था। अब में उसको बोल उठी दबा दो मुझे बंटी दबा दो, यह बात सुनकर उसने एकदम अपना जोश पहले से ज्यादा बढ़ा दिया और मुझे ज़ोर से दबा दिया जिसकी वजह से मेरे स्तन तो बंटी की छाती से दबकर मानो चौपट ही हो चुके थे और उठे हुए निप्पल भी अब उसके बदन से चिपक रहे थे। अब मुझे भी बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था मेरे मुहं से आहह्ह्ह उफ्फ्फ वो आवाज निकल गई और वैसे भी मुझे यह बहुत पसंद है। अब में किसी दमदार मर्द की बाहों में दबकर चूर चूर होने का नशा लेने लगी थी, कोई भी अनुभवी औरत ही समझ सकती है कि बंटी मुझे उस समय कैसे पिसता रहा और वो मेरे होंठो को चूसता बभी रहा। फिर थोड़ी सी अपनी पकड़ को ढीली करके बंटी मेरे होठों को छोड़कर अब नीचे भी आने लगा था वो अब मेरी गर्दन पर फिर कंधो पर भी चूमने लगा था। अब उसको कुछ सीखने की ज़रूरत नहीं थी क्योंकि बंटी के अंदर का असली मर्द अब नींद से जाग उठा था और वो अपना आगे का काम बड़ी अच्छी तरह से करना जानता था।

फिर बंटी नीचे उतरा और उसने मेरे स्तानो को चूमना शुरू किया और उनको सहलाने दबाने भी लगा था और बड़े जोश के साथ मसलने भी लगा था। अब वो मेरी छाती से खेलता रहा मेरे दोनों निप्पल को चूसता रहा और अंत में एक निप्पल को अपने मुहं में लेकर ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे स्तन को बुरी तरह से मसलने लगा था आऊच उफ्फ्फ मुझे बड़ा दर्द होने लगा था और मैंने दर्द की वजह से सिसकियाँ भी भरी, लेकिन बंटी अब कहाँ कुछ सुनने वाला था और में उसको रोकूँ तो भी वो रुके नहीं, बड़ी ही बेरहमी से उसने मेरे दोनों बूब्स को मसल डाले आहह्ह्ह् मैंने उसको कहा आईईईई हाँ तुम आज अपनी भाभी के बूब्स को ऐसे ही दबाओ मुझे बहुत मज़ा आ रहा है उफफ्फ्फ्फ़ मेरे अंग अंग में आग लगी हुई है मेरा पूरा बदन गरम हो गया है। अब बंटी मुझे चूमते हुए और नीचे उतरने लगा था, लेकिन उसके हाथ तो उसने मेरे बूब्स पर ही टीका रखे थे, वो अब मेरी कमर को चूमते हुए जांघो को छुते हुए मेरी चूत के निकट जा पहुँचा, लेकिन वहाँ पर जाकर वो थोड़ा सा उलझ गया और फिर रुक गया क्योंकि यह उसके लिए एक नई जगह थी। अब मैंने बड़े ही प्यार से बंटी के सर पर अपना एक हाथ फिराया अपने दोनों पैरों को पूरा फैलाया और बंटी के सर को पकड़कर बंटी के होंठो को अपनी चूत के होंठो पर जाकर ठहरा दिया।

अब बंटी चूमने लगा, थोड़ी देर उसने लगातार चूमा और मैंने उसको अपनी तरफ से इशारा किया जिसके बाद हम दोनों पलंग पर चले गये। अब में अपने पैरों को पूरा फैला सकती थी, बंटी फिर से मेरी चूत के पास आ गया और मैंने उसको कहा कि तुम अब अपनी जीभ से काम लो होंठो से नहीं उसके लिए इतना इशारा बहुत था। अब बंटी अपने काम को बड़े अच्छे से करने लगा था वो मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने चूसने लगा और मैंने अपने हाथ से मेरी चूत के होंठो को थोड़ा सा फैलाकर उसकी जीभ को चूत के अंदर डलवाया, बंटी सब कुछ करना सिख गया और उसने मेरे हाथ हटाए और बागडोर को एक बार फिर से संभाल लिया। अब बंटी मेरी चूत के बहुत अंदर तक बड़ी सफाई से चाटे जा रहा था और में अहह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ़ बंटी जी मेरे प्यारे देवर जी अपनी जवान भाभी को आईईईई आज बड़ा मस्त मज़ा आ रहा है। दोस्तों में तो पहले से ही गरम हो चुकी थी और अब में पूरी तरह से जोश में आ चुकी थी इसलिए मेरा पूरा बदन अब बंटी के साथ उस मस्त मजेदार चुदाई के लिए बड़ा तड़प रहा था। अब मुझे उसका लंड मेरी चूत के अंदर चाहिए था, मेरे बदन में एक करंट सा पैदा हो रहा था। फिर मैंने एक कड़क अंगड़ाई ली, उसका मुहं अपनी चूत से दूर हटा दिया और उसको कहा कि अब मेरी बारी है और में अब तक नीचे लेट चुकी थी।

अब उठकर बैठ गई और मैंने उसकी अंडरवियर को उतार दिया, उसके बाद देखकर में पूरी तरह जोश से भरकर पागल हो गई क्योंकि उसका वो कितना मस्त पूरा तनकर खड़ा लंड स्प्रिंग की तरफ उछलकर तुरंत बाहर मेरे सामने आ गया। फिर मैंने उसको आंड के पास से चूमना शुरू किया उसके बाद चारो तरफ से मैंने उसको चूमा और फिर में लंड के टोपे के पास पहुँच गई और उसी समय उसके लंड को अपनी दोनों हथेलियों के बीच में लेकर मैंने उसको रगड़ डाला, जैसे कि हम लस्सी बनाते समय घूमते है ठीक वैसे ही मैंने उसके लंड के साथ किया। दोस्तों मेरे यह सब करने की वजह से लंड एकदम जल्दी से तैयार हो गया और मुझे भी तो अब उस लंड से अपनी चुदाई करवाने की जल्दी लगी हुई थी, उसका लंड पहले से भी ज्यादा बड़ा हो गया। अब मैंने लंड के टोपे की चमड़ी हटाई और बंटी के लंड का वो गुलाबी आकर्षक टोपा मैंने अपने मुहं में ले लिया, लेकिन बंटी तो मेरे ऐसा करने से बिल्कुल पागल हो गया और वो मुझसे बोला ओह्ह्ह्ह विधि आईईईई भाभी मेरी जान और चूसो, ऊऊह्ह्ह्ह अपने प्यारे देवर का लंड और ज़ोर से मेरी रानी उऊईईईईई।

अब यह सब कहकर वो अपने लंड को मेरे मुहं में धक्के मारना लगा था, मैंने थोड़ी देर उसका लंड चूसा और महसूस किया कि उसको कोई इतना चूसने की ज़रूरत नहीं है इसलिए मैंने उसको नीचे चूत की तरफ धकेल दिया। अब में वापस नीचे लेट गयी और उसको मैंने अपने ऊपर खीच लिया मैंने अपने दोनों पैर पूरे खोल दिए और उसका लंड अपनी चूत के मुहं पर रख लिया। अब उसने अपनी तरफ से एक ज़ोर का धक्का मारा और फिर उसका पूरा लंड मेरी गीली चूत के अंदर चला गया आह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फ बंटी जी प्लीज थोड़ा धीरे करो ऊऊईईईइ इसी के लिए तो मैंने यह सारा खेल खेला था। अब उसने मुझे लगातार धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया, उसका लंड वैसे ज्यादा बड़ा और गरम था में अंदर कुछ अलग ही मज़ा महसूस कर रही थी वैसे मुझे हल्का सा दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था। फिर कुछ देर बाद उसकी धक्के देने की गति पहले से ज्यादा बढ़ गई और में दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्लाने लगी ओह्ह्ह् बंटी जी उफ्फ्फ् हाँ ऐसे ही चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो आज तुम मेरी चूत को पूरा फाड़ दो हाँ बंटी आज तुम मुझे बुरी तरह से धक्के देकर चोदो आईई फाड़ डालो इस चूत को चोदो ऊह्ह्ह्हह बंटी चोदो।

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फिर मेरे मुहं से ऐसे जोश भरे शब्द सुनकर बंटी बहुत चकित हो गया, लेकिन फिर वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया और बोला कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी रानी आज में इस चूत को फाड़े बिना नहीं छोडूंगा क्योंकि पिछले एक सप्ताह से मेरी नींद हराम कर रखी है साली आईईईई तू कभी मुझे अपने बूब्स दिखाती है, तो कभी अपनी चूत आज तो में इस चूत को फाड़कर ही रहूँगा और फिर बंटी मेरी चूत में तेज तेज लगातार धक्के देकर मुझे वैसे ही चोदता रहा चोदता रहा और चोदता ही गया। अब उसने जोश में आकर मुझे बड़े ज़ोर से धक्के दे देकर चोदा इसलिए हम दोनों को बड़ा मज़ा आया और चुदाई के पूरा हो जाने के बाद तक भी हम वैसे ही लेटे रहे। फिर उसने अपना पूरा वीर्य मेरी चूत में डाल दिया था जो अब हम दोनों का एक साथ मिलकर मेरी चूत से सरककर बाहर आने लगा था, लेकिन में उसकी उस मस्त मजेदार धक्कों वाली चुदाई से पूरी तरह से खुश बड़ी संतुष्ट थी क्योंकि उस दिन पहली बार मेरी चूत ने किसी दमदार लंड को अपने अंदर लिया था, इसलिए मेरा पूरा जिस्म आज बंटी से चुदाई करवाकर ठंडा हो चुका था।

दोस्तों उस पहली जोश भरी चुदाई के बाद तो अब हम दोनों के पास पूरे तीन दिन और तीन राते भी थी जिसका हमे पूरा पूरा फायदा उठाना था और अब तो अपने देवर को मुझे कोई भी बात बताने या समझाने की जरूरत ही नहीं थी। फिर हम दोनों ने वो सारा समय एक साथ ही रहकर गुजारा और उन दिनों ना जाने कितनी बार उसने मुझे वैसे ही पूरी तरह जोश में आकर किसी जानवर की तरह चोदा और हर बार मेरी चूत को ठंडा किया और में सच कहूँ तो मेरी चूत ने अब उसके लंड के सामने अपने घुटने टेक दिए थे, मेरी चूत में उसको अब ज्यादा लेने की शमता पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी क्योंकि वो तो अब मुझे जानवरों की तरह हर एक तरह से नये नये तरीको से चोदने लगा था।

दोस्तों यह थी मेरी सच्ची चुदाई की कहानी जिसमे मेरे साथ क्या हुआ मैंने अपनी चुदाई अपने देवर से कैसे करवाई उसके मज़े कैसे लिए वो सब मैंने लिखकर बताया है मुझे उम्मीद है कि यह आप सभी को जरुर पसंद आई होगी।

धन्यवाद …

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