दीदी और उसकी चुदक्कड़ सास

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प्रेषक : राज …

हैल्लो दोस्तों, कैसे है आप सब? में आज बहुत दिनों के बाद कोई नयी कहानी पेश करने जा रहा हूँ। मुझे चुदाई का चस्का ही मेरी माँ और बुआ ने लगाया था और उन्होंने अपनी भोसड़ी में मुझे ऐसा घुसाया था कि आज तक मेरा उनकी भोसड़ी में ही घुसा रहने को जी चाहता है। हाँ कभी-कभी मेरी बड़ी दीदी भी अपना एक बच्चा पैदा की हुई चूत फैलाकर मुझसे चुदवा लेती है और जब से उसने मुझसे चुदवाया है, तब से वो अपने पति यानी कि जीजा जी का लंड अपनी चूत में लेना पसंद ही नहीं करती है। जब वो पिछली बार यहाँ आई थी, तब मैंने माँ और उसको एक साथ चोदा था, जिसके बारे में फिर कभी बताउंगा। अभी तो में फिलहाल उसकी सास के बारे में आप सबको बताने जा रहा हूँ कि कैसे इस बार मैंने उनकी सास को सैकड़ों धक्के दिए और उसकी भोसड़ी की चुदाई की? हाँ तो बहनों और भाइयों अपने लंड और चूत पर अपना हाथ रख ले। फिर इस बार जब में दीदी के ससुराल गया तो मैंने वहाँ दीदी और उनकी सास के अलावा एक हट्टे-कट्टे पहलवान जैसे आदमी को देखा, जिसकी उम्र 46-47 साल रही होगी और दीदी के ससुर और पति हर बार की तरह इस बार भी कहीं बाहर गये हुए थे।

फिर मैंने दीदी से उस अजनबी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि ये मामा जी है माँ के दूर के भाई लगते है, लेकिन असल में माँ जी इनके साथ खूब रंग रेलिया मनाती है, मैंने कई बार इन दोनों को खुद अपनी आँखों से चुदाई करते देखा है। अब मुझे तो यकीन ही नहीं आ रहा था, लेकिन जब दीदी ने बताया तो यकीन करना पड़ा, क्योंकि उसकी सास काफ़ी धर्म-कर्म वाली सीधी साधी औरत लगती थी।  फिर मैंने दीदी से कहा कि आपकी सास तो बहुत सीधी साधी लगती है। तो वो बोली कि हाँ बिल्कुल हमारी माँ जैसी ना और ये कहकर हम दोनों हँसने लगे। उनकी सास की उम्र भी हमारी माँ के जितनी ही थी, यानी कि 44-45 साल के करीब और उनकी बड़ी-बड़ी ठोस चूचीयाँ किसी का भी ध्यान अपनी तरफ खींच लेती थी। फिर मैंने दीदी से कहा कि क्या माँ जी मुझसे चुदवाएगी? तो दीदी हँसने लगी और बोली कि मुझे तो यकीन है कि वो चुदवा लेगी, लेकिन इस काम में पहल तुझको ही करनी पड़ेगी।

फिर मैंने कहा कि अगर में इन दोनों को चुदाई करते वक़्त रंगे हाथ पकड़ लूँ तो मेरा काम बन सकता है। तो फिर दीदी बोली कि हाँ तब तो तेरा काम आसान हो जाएगा। फिर मैंने पूछा कि क्या माँ जी रोज़ रात को मामा जी से चुदवाती है? तो दीदी बोली कि नहीं रोज़ तो नहीं, लेकिन अब ये तो खुजली की बात है कभी-कभी वो दोनों दिन में ही शुरू हो जाते है और मैंने तो अक्सर उन दोनों को दिन में ही चुदाई करते देखा है और तब मुझे तुम्हारे लंड की बहुत याद आती है मेरे भाई और इतना कहकर दीदी ने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर मैंने कहा कि हाय दीदी कोई देख लेगा, तो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा? फिर दीदी बोली कि आज रात को तुझे मेरी प्यास बुझानी है, मेरी चूत रानी बहुत दिन से सुलग रही है, अब तू आया है तो इस पर मेहरबानी करके जाना। फिर मैंने कहा कि ठीक है दीदी, आज रात को ही तुम्हारी चूत चोदूंगा और तुम्हारी सास को भी रंगे हाथ पकडूँगा।

फिर रात को हम लोग खाना खाने के बाद जल्दी ही अपने-अपने रूम में चले गये। मेरी मामा जी से हाय हैल्लो हुई थी और सासू माँ ने भी मुझे सीने से लगाया था, तब ही से उनकी चूचीयाँ अब तक मेरे सीने में चुभती हुई महसूस हो रही थी। फिर मैंने दीदी से पूछा कि क्या मामा जी माँ के रूम में ही सोते है? तो वो बोली कि नहीं, वो दोनों काफ़ी देर तक बातें करते है और फिर मामा जी गेस्ट रूम में जाकर सो जाते है। फिर थोड़ी देर के बाद हमें सासू माँ के रूम से हंसने खिलखिलाने की आवाज़ आने लगी, तो मैंने कहा कि दीदी लगता है आज मेरी किस्मत अच्छी है, अब बगल वाले रूम में चुदाई का प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है। अब आप ये बताओं कि आप अपनी सास की चुदाई कहाँ से देखती हो? फिर दीदी मुझे बाथरूम में लेकर गयी, वहाँ की एक खिड़की आंटी के रूम की तरफ खुलती थी और जिस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता था। फिर मैंने देखा कि मामा जी साड़ी के ऊपर से ही माँ जी की चूचीयाँ दबा रहे थे और माँ जी अपने दोनों हाथ से मामा जी का लंड पजामे से बाहर निकालकर सहला रही थी और मामा जी का लंड खड़ा देखकर में और दीदी भी मस्त हो गये थे।

फिर मामा जी ने माँ जी की साड़ी उतारकर एक तरफ फेंक दी और उधर दीदी ने मेरा लंड बाहर निकालकर सहलाना चालू कर दिया था, जिससे वो भी खड़ा होने लगा था। अब उनकी सास को मामा जी ने पूरी तरह से नंगा कर दिया था और उनकी चूत पर ढेर सारे बाल भी थे। फिर मामा जी बोले कि  शोभा तुमने झाटें कब से नहीं बनाई? अगली बार बना लेना, मुझे बड़ी हुई झाटें अच्छी नहीं लगती है,  इधर देखो मेरा लंड कितना चिकना-चिकना है। तो माँ जी बोली कि वक़्त ही नहीं मिल पाता है, पूरे दिन तो बहु घर में रहती है और जब फ्री होती हूँ तो तुम अपना मूसल लेकर चुदाई करने लग जाते हो। अब जल्दी भी करो या बातें ही करते रहोगे? अब मामा जी ने तुरंत ही अपना आसान संभाल लिया और अपने लंड का सुपड़ा माँ जी की बालों से भरी चूत के मुँह पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा तो माँ जी की चीख निकल पड़ी।

अब उन्होंने अपने दोनों पैर मामा जी की पीठ से चिपका दिए थे और वो अपने चूतड़ उछालने लगी थी।   अब इधर दीदी ने भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और मुझसे बोली कि फटाफट मुझे चोदकर माँ जी के रूम में घुस जाओ, तब ही आज रंगे हाथ पकड़ पाओगे। फिर मैंने कहा कि आपको तो में बाद में भी चोद सकता हूँ, अगर मामा जी इतनी देर में झड़ गये तो सब गड़बड़ हो जाएगी। फिर इस पर दीदी बोली कि अरे मेरे भोले भाई में मामा जी को जानती हूँ, वो साला भड़वा पता नहीं क्या खाकर चुदाई करता है? वो बहुत देर तक टिकता है और माँ जी के पसीने छुड़वा देता है, तब तक तुम मुझको निबटा दोगे। तो मैंने कहा कि ठीक है दीदी तुम जानो, अगर आज में तुम्हारे चक्कर में आपकी सास को नहीं चोद पाया तो में आपकी चूत चोदने के बाद आपकी गांड भी फाड़ दूँगा और ये कहकर दीदी की एक टाँग अपने कंधे पर रख ली।

अब वो एक पैर से खड़ी थी और में अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था। अब हम लोग माँ जी की घमासान चुदाई भी देख रहे थे। फिर मैंने एक धक्का मारा तो मेरा लंड दीदी की चूत में पूरा जा घुसा और फिर हम लोग भी धक्के लगाने लगे। अब चुदाई दोनों तरफ चालू थी, अब एक तरफ सास चुद रही थी तो दूसरी तरफ बहु चुद रही थी, लेकिन वहाँ पर आवाज़ें ज़्यादा माँ जी की ही आ रही थी, जिसका कारण था कि मामा जी बहुत जोरदार चुदाई कर रहे थे। अब एक पैर पर खड़े-खड़े दीदी थक गयी थी तो वो बोली कि राज मुझे अपनी गोद में उठा लो, में तो थक ही गयी हूँ। फिर उसके बाद मैंने दीदी को अपनी गोद में भर लिया और दीदी अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगी। अब उनके उछलने से उनकी बड़ी-बड़ी चूचीयाँ भी हिल रही थी, जिसे में अपने मुँह में भरकर चूस रहा था। अब दीदी आह आआआआ करके झड़ने लगी थी और कुछ धक्को के बाद में भी किनारे लग गया, मगर मामा जी थे कि अभी भी लगे हुए थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर दीदी अपनी चूत को साफ करते हुए बोली कि देखा मैंने कहा था ना कि ये भड़वा साला झड़ता ही नहीं है, काश में भी इससे कभी चुदवा पाती। अब दीदी के मुँह से ऐसी बात सुनकर मुझे थोड़ी हैरानी हुई। फिर मैंने कहा कि क्या आप मामा जी से चुदवाना चाहोगी? तो दीदी बोली कि हाँ क्यों नहीं? आख़िर कौन औरत अपनी चूत में मर्द का लंड ज्यादा देर तक डलवाना पसंद नहीं करेगी? तो मैंने कहा कि ठीक है अगर आज मेरा काम बन गया, तो में तुझे भी मामा जी की टाँगों के नीचे लाने का इंतज़ाम कर दूँगा। फिर इसके बाद मैंने अपना पजामा पहनकर माँ जी के रूम में जाने की तैयारी कर ली और में अचानक से दीदी की सास के कमरे में धड़ाक से दरवाज़ा खोलकर घुस गया और मुझे इस तरह आया देखकर सासू माँ के होश ही उड़ गये थे, लेकिन मामा जी अड़ियल किस्म के लग रहे थे, अब जहाँ सासू माँ ने अपने नंगे बदन को चादर में छुपा लिया था, वहीं मामा जी पूरी तरह से वैसे ही नंगे बैठे रहे थे।

फिर सासू माँ झिझकते हुए बोली कि अरे राज बेटा तू यहाँ इस वक़्त? तुझे तो आराम करना चाहिए था ना? फिर में बोला कि आराम ही करने की कोशिश कर रहा था आंटी, लेकिन आप लोग सोने दो तब ना? इतनी ज़ोर-ज़ोर से धड़ाधड़ आवाजे आ रही थी कि में तो यही सोच रहा था कि कहीं चोर तो नहीं घुस आया और यहाँ आकर देखा तो नज़ारा ही बदला हुआ है। फिर मामा जी बोल पड़े कि हाँ बेटा में समझ गया तुझे यहाँ क्या चीज़ खींचकर लाई है? आख़िर तू है भी ना लंड धारी, बता चूत मारनी है ना इसकी? तो फिर मैंने झूठ का नाटक दिखाते हुए कहा कि मामा जी आप भी कैसी गंदी बातें कर रहे है, भला में आंटी से इस तरह का बर्ताव कैसे कर सकता हूँ? ये मेरी दीदी की सास है और मेरी मम्मी के बराबर है। फिर मामा जी बोले कि अब नाटक मत कर और अपनी लूँगी उतारकर मैदान में आ जा। फिर में झिझकते हुए बेड की तरफ बढ़ा तो मामा जी ने लपककर मेरी लूँगी खोल दी जिससे में पूरा नंगा हो गया।

अब मेरा लंड लटका हुआ था, जिसे मामा जी अपने हाथ से पकड़कर आंटी को दिखाते हुए बोले कि लो भाई अब आज तुम भी जवान लंड का मज़ा ले लो, तुम मुझसे चुदवा-चुदवाकर बोर हो गयी होगी, चलो अब तुम भी चादर हटाकर अपनी चूत इस बेचारे को दिखा ही डालो। फिर उन्होंने सासू माँ की चादर हटा दी और मुझसे बोले कि बेटा सारी शर्म को इसकी चूत में डालकर खुद भी इसकी चूत में घुस जाओ। अब में तो पहले से ही सासू माँ को चोदने की सोचकर आया था और जब रूम में आने के बाद उनका नंगा बदन देखा तो मुझे अपनी मम्मी की याद आ गयी, बिल्कुल वैसी ही बड़ी-बड़ी चूचीयाँ और उन पर उभरे हुए ब्राउन कलर के निप्पल्स तनकर लंबे शेप में थे, जिसे फ़ौरन अपने होंठ में दबाकर चूसने का मन हुआ। फिर मैंने आंटी की चूची पर बहुत आहिस्ता से अपना एक हाथ रख दिया और सहलाने लगा।

अब आंटी भी मुझसे शर्मा नहीं रही थी और तब मामा जी ने उनकी चूत पर अपना हाथ फैरते हुए कहा कि लो रानी ठीक से मज़ा लो, आज दो मर्द तुम्हें एक साथ मज़ा देंगे, में तुम्हारी चूत चूसता हूँ। जब तक तुम मुन्ने को थोड़ा दूध पिलाकर तैयार करो और मेरे मुँह को उनकी चूची की तरफ को बढ़ाते हुए बोले कि लो बेटा दूध पीकर अपने लंड में ताक़त लाओ, साली बहुत लंड मार औरत है। जब में दो बार पेलता हूँ, तब साली का पानी झड़ता है। अब ये सब बातें मेरी दीदी खिड़की से सुन भी रही थी और अंदर का माज़रा देख भी रही थी। में पहले से ही उनसे कहकर आया था कि मामा जी का लंड तेरी चूत में डलवाकर रहूँगा। फिर मैंने सासू माँ की चूचीयाँ अपने मुँह में भर ली और चूसने लगा और उधर मामा जी उनकी चूत अपने होंठो से चूस रहे थे। अब माँ जी की हालत खराब थी, फिर वो बेड पर लेट गयी और में उनके सिरहाने जाकर आराम से उनकी चूची पीने लगा और मामा जी उनकी चूत चूस रहे थे, जिससे उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

फिर वो मुझसे बोली कि बेटा और ज़ोर से चूस, दबा-दबाकर चूस। अब में उनके साथ थोड़ी नरमी दिखा रहा था। फिर थोड़ी देर में आंटी पूरी तरह से गर्म गयी और मेरा लंड भी फंनफनाने लग गया तो मामा जी ने कहा कि बेटा अब अपना लंड इसकी चूत घुसेड़ डाल और इसकी चूत का भुर्ता बना डाल। अब मामा जी मम्मी के मुँह के पास जाकर बैठ गये और अपना लंड उनके होंठ पर फैरने लगे थे। अब में अपने लंड की टोपी को उसकी चूत से रगड़ रहा था। तब आंटी ज़ोर से बोली कि साले हरामी रगड़ता ही रहेगा या अंदर भी डालेगा। फिर उसके बाद मुझे भी गुस्सा आ गया और मैंने एक ही बार में अपना 8 इंच लंबा लंड उनकी सूखी चूत में अंदर तक घुसा दिया, जिससे उनकी जोरदार चीख निकल पड़ी आआईयईईईईईईईई आआआआआहह आआअहह हरामी मादरचोऊऊऊऊऊऊऊद, तेरी माँ को कुत्ता चोदे, बहन के लंड कहीं के इतनी ज़ोर से डाला जाता है क्या? पहले कभी चूत नहीं मारी क्या? हरामजादे।

अब मुझे और गुस्सा आ गया था, तो मैंने और ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब सासू माँ मुझे गंदी-गंदी गालियाँ देने लगी थी। अब उनकी गालियों से माहौल और मस्त हो रहा था। फिर मामा जी ने जब देखा कि आंटी गालियाँ बक रही है तो तब उन्होने अपना लंड उनके मुँह में नहीं डाला और उनकी चूची को ज़ोर-ज़ोर से दबाकर मज़ा लेने लगे। तब तो आंटी और भी जल गयी और बोली कि अब भोसड़ी के बहनचोद तुझे भी मस्ती सवार हो गयी, जो मेरी मुलायम चूचीयों को आटे की तरह बेदर्दी से गूँथ रहा है, आराम-आराम से कर वरना कल तेरी बहु को बुलाकर इसका लंड अंदर घुसवा दूँगी, हरामी कहीं का, भोसड़ी वाला फ्री में चोदने को क्या मिल जाता है? तो अपनी औकात ही भूल जाता है। अब इधर मेरे धक्के जारी थे, तभी आंटी फिर दर्द से कराह उठी क्योंकि मैंने अपना पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से अंदर घुसेड़ दिया था। अब ये सब देखकर दीदी की चूत भी गीली हुए जा रही थी, जो बाहर खिड़की से सब देख रही थी।

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फिर मामा जी ने अपना लंड आंटी के मुँह में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगे। अब में भी झड़ने के करीब आ गया था तो तब ही में झड़ गया और मामा जी ने मुझे धकेलकर तुरंत अपना लंड सटाक से उनकी चूत में डाल दिया और फटाफट चोदने लगे। अब में अपना लंड उनके मुँह में डाले हुए था और मामा जी आंटी की चूत चोद रहे थे। फिर कुछ देर में ही आंटी भी झड़ गयी और फिर मामा जी भी झड़कर एक तरफ लेट गये। अब में अभी भी आंटी के मुँह में अपना लंड डाले हुए था, तब ही मेरे लंड से पानी की बौछार होने लगी, जिसे आंटी बहुत मज़े लेकर चूसने लगी। फिर मैंने अपना थोड़ा सा रस उनके मुँह पर भी गिराया और ढेर सारा उनके बालों में और उनकी चूचीयों पर भी गिरा दिया, जिससे उनकी चूची चमक उठी। फिर आंटी बोली कि लड़के तेरे लंड का पानी तो बहुत रसदार है, तूने बेकार ही इसे बाहर गिरा दिया, भैय्या ज़रा अब तुम मेरी चूची पर गिरा रस चूसकर देखो, इसका पानी कितना मज़ेदार है?

फिर मामा जी सासू माँ की चूचीयों पर सना हुआ मेरा रस चाटने लगे। फिर उसके बाद हम लोग वहीं बेड पर लेट गये। अब में बेचारी दीदी के बारे में सोच रहा था कि अब उनको अपनी उंगली से ही काम चलाना पड़ेगा। तब मैंने यूँ ही सासू माँ से पूछा कि माँ जी आप कह रही थी कि मामा जी की बहु को मुझसे चुदवाओगी? क्या सही में आप मुझसे उनकी बहु को चुदवाओंगी? तो इतने में मामा जी बोल पड़े कि हाँ बेटा क्यों नहीं? तू मेरी बहु को चोद और में तेरी दीदी को चोदूंगा? क्यों तैयार है ना तू? फिर में गुस्सा दिखाता हुआ बोला कि कैसी बातें कर रहे है आप? आपको शर्म आनी चाहिए, आंटी जी आप भी कुछ नहीं बोल रही है ये दीदी के बारे में कैसी कैसी बात कर रहे है? तो मामा जी बोले कि भोसड़ी वाले अब बड़ी मिर्ची लग रही है, मेरी बहु को फ्री में चोदगा क्या?

तब आंटी बोली कि बेटा इसमें बुरा क्या है? अपनी बहन को इनसे चुदवा देना, वैसे भी मेरा बेटा कई कई दिनों तक बाहर रहता है, तो वो बेचारी लंड की चाहत में तड़पति रहती है, मैंने कई बार उसको अपनी चूत में उंगली करते हुए देखा है। अब में तो चाहता ही यही था तो मैंने कहा कि ठीक है आंटी, अब आप कह रही है तो मुझे कोई हर्ज़ नहीं है। फिर चुदाई का दूसरे दिन का प्रोग्राम सेट हो गया, फिर इसके बाद किस तरह से मामा जी ने मेरे सामने मेरी बहन को चोदा? और मैंने उनकी बहु को और दीदी की सास ने मिलकर उनकी बहु को चोदा, इसके बारे में अगले पार्ट में बताउंगा ओके, तब तक अपने हाथ लंड पर रखे रहिए और अपनी चूत में उंगली डाले रहिए ।।

धन्यवाद …

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