दो परिवारों की सेक्स कहानी 2

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प्रेषक : जय …

“दो परिवारों की सेक्स कहानी 1” से आगे की कहानी …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी का जय एक बार फिर से हाजिर है और आप सभी के सामने अपनी कहानी का अगला भाग लेकर। दोस्तों आशीष अब तक देहरादून पहुंच चुका था और वो आशीष के बताए हुए पते पर हितेश के घर चला गया और फिर उसने घंटी बजाई। तो संजना ने दरवाज़ा खोला आशीष उसे देखता ही रह गया। वो दिखने में बिल्कुल मस्त, गोरी पहाड़ी लड़की की तरह लग रही थी और उसका फिगर ना ज्यादा बड़ा था और ना ज्यादा कम था। अब संजना आशीष को हितेश समझकर उसे देखते ही गले लग गई उस वजह से आशीष थोड़ा सा सकपका सा गया कि वो अब क्या करे, लेकिन उसने ज्यादा दिमाग ना लगाते हुए उस भी अपने गले से लगा लिया, लेकिन तभी उसे अपना वो वादा याद आ गया (कि वो हितेश की पत्नी हो हाथ नहीं लगाएगा) और वो यह बात सोचकर तुरंत संजना से अलग हो गया और अपना सामान लेकर अंदर चला गया। इस बात से संजना को थोड़ा अटपटा सा लगा, लेकिन फिर उसने सोचा कि शायद सफ़र की वजह से वो थोड़ा ज्यादा थक गये होंगे और उसने कुछ नहीं बोला वो भी चुपचाप अंदर चली गई। फिर वो किचन में जाकर आशीष के लिए चाय और नाश्ता बनाकर ले आई। तो आशीष ने बाहर आकर उससे थोड़ी बहुत बात की ताकि संजना उससे ज्यादा सवाल ना करे।

फिर कुछ घंटो के बाद रात का खाना खाने के बाद वो दोनों सोने की तैयारी करने लगे (हितेश और संजना सेक्स में एक दूसरे से हमेशा बहुत खुलकर बातें करते थे, लेकिन संजना ग्रूप सेक्स के लिए कभी भी राज़ी नहीं थी) तो संजना ने कहा कि आज मेरा बड़ा मन हो रहा है प्लीज चलो ना करते है कितने दिन भी तो हो गए है आज मेरा बड़ा मन कर रहा है। संजना के मुहं से यह बात सुनकर आशीष भी थोड़ा गरम हो गया, लेकिन फिर उसे अपनी वो शर्त याद आ गई और उसने एक बहाना बना दिया कि वो थक गया है और अब उसे बहुत नींद आ रही है और संजना ने भी मन ही मन सोचा कि रहने दो शायद सच में थके होंगे। अब अगले दिन से वो हितेश की लाईफ जीने लगा और उसे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और वो इस बात का फायदा उठाकर पूरा देहरादून घूमता तो कभी कभी वो मसूरी भी चला जाता और बहुत मजे करता रहा, लेकिन वो भी अब थोड़ा थोड़ा संजना की तरफ खिंच रहा था, लेकिन उसने आपने मन को बहुत काबू में रखा हुआ था। एक सुबह सुबह जब आशीष उठा तो वो क्या देखता है कि संजना बाथरूम से सीधी बाहर निकलकर टावल लपेटकर बेडरूम में आ गई है और अब वो उसके सामने ही कपड़े बदल रही है। अब आशीष उसकी जवानी को देखकर बिल्कुल पागल होने लगा था, लेकिन वो कुछ करना नहीं चाहता था इसलिए वो वहां से उठकर बाहर चला गया और उसका ऐसा व्यहवार देखकर संजना को बहुत बुरा लगा, लेकिन आशीष सीधा बाथरूम में गया और वो संजना के नाम की मुठ मारने लगा और अपने आपको शांत करने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर शाम को जब वो वापस आया तो संजना बहुत प्यार के मूड में थी और उसके अंदर आते ही उसने आशीष को तुरंत अपने गले से लगा लिया और फिर वो उसे जबरदस्ती प्यार करने लगी, लेकिन आशीष ने उसे दूर हटा दिया और आगे बढ़ गया। फिर संजना ने उसे और भी मनाने की कोशिश की और उसने आशीष को पीछे से पकड़ लिया और हग करने लगी, लेकिन आशीष ने उसे एक बार फिर से अपने से अलग कर दिया। अब तो संजना आशीष का उसके लिए ऐसा बर्ताव देखकर और भी उदास होने लगी थी और उसे पता नहीं चल रहा था कि आशीष उसके साथ ऐसा क्यों कर रहा था और वो भी अब अपनी पूरी जवानी उस पर उड़ेलना चाह रही थी, लेकिन आशीष था कि उसे पूरी तरह से नकार रहा था। फिर उसका ऐसा व्यहवार देखकर संजना तुरंत उसके आगे चली गई और अब उसने अपने बूब्स को खोलकर उससे कहा कि क्या हो गया है तुम्हे, मुझमें ऐसी क्या कमी है ध्यान से देखो में तुम्हारी वही पुरानी संजना हूँ?

आशीष : हाँ में वो सब अच्छी तरह से जानता हूँ।

संजना : तो तुम आज मुझसे ऐसा व्यहवार क्यों कर रहे हो, जैसे में कोई अजनबी हूँ?

आशीष : ऐसी कोई भी बात नहीं है जैसा तुम सोच रही हो।

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संजना : फिर क्या बात है? मैंने तुम पर बहुत ध्यान दिया है और तुम्हे परखकर भी देखा है कि तुम जब से आए हो मुझे एक बार भी ध्यान से देख भी नहीं रहे हो?

आशीष : क्यों देख तो रहा हूँ? तो तुम ही मुझे बताओ कि में कैसे देखूं?

संजना : क्या देख रहे हो तुम मुझे प्यार क्यों नहीं करते, तुम्हे ऐसा क्या हो गया है?

अब संजना ने आशीष का हाथ उठाकर जबरदस्ती अपने बूब्स पर रख दिया और कहा कि तुम मुझे प्यार करो में पूरी तरह से तुम्हारी हूँ। फिर आशीष ने जैसे ही उसके बूब्स छुए तो उसके बदन में जैसे कोई करंट सा दौड़ गया, लेकिन उसने कुछ सोचकर तुरंत अपना हाथ हटा लिया और वो वहां से घर छोड़कर चला गया और अपने पीछे संजना को रोता बिलखता हुआ छोड़ गया। अब संजना बिल्कुल भी समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या करे? लेकिन उसने भी मन ही मन ठान रखी थी कि वो इस समय यमराज से भी अपने पति को लेकर ही रहेगी और रात के करीब दस बजे आशीष आया और आते ही वो सीधा अपने कमरे में जाकर सो गया, लेकिन संजना भी आज अपने पूरे प्लान के साथ तैयार थी और उसने आशीष के लेटते ही उसे प्यार करना शुरू कर दिया, वो कभी उसे किस करती तो कभी उसके लंड को रगड़ती। अब उसके यह सब करने से आशीष का अपने ऊपर से काबू भी धीरे धीरे खोने लगा था, लेकिन इसके बाद जो संजना ने किया उस काम से आशीष के सब्र का बाँध टूट गया और वो अब अपने काबू से बाहर हो चुका था, वो अब कामवासना की उस आग में जलने लगा था, क्योंकि संजना ने आशीष का लंड उसकी पेंट से बाहर निकालकर जबरदस्ती अपने मुहं में डाल लिया था और वो उसका लंड लोलीपोप की तरह बहुत मज़े लेकर चूसने लगी जिसकी वजह से आशीष एक बिना पानी के तड़पती हुई मछली जैसा हो गया था, लेकिन अब आशीष से ज्यादा देर रहा नहीं गया और उसने संजना के सर को पकड़कर अपने लंड पर दबाने लगा जिसकी वजह से संजना और तेज़ी से उसका लंड चूसने लगी और वैसे भी आशीष बहुत दिनों से सेक्स से बहुत दूर था तो वो दस मिनट लंड को चूसने में ही उसके लंड का लावा संजना के मुहं में अब पूरी तरह से फूट पड़ा और संजना उसे पी गयी।

अब आशीष ने संजना की मेक्सी को उतारकर दूर फेंक दिया और उसने अपनी जीभ से उसके सारे बदन को नाप डाला, उसने ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहाँ पर उसने उसे चूमा ना हो जैसे एक बांध टूटने के बाद पानी सभी जगह पर पहुंच जाता है ठीक उसी तरह आशीष संजना के पूरे कामुक जिस्म पर टूट पड़ा था। इस बीच उसका लंड एक बार फिर से धीरे धीरे खड़ा होकर सांसे लेने लगा था और संजना की वो आहें उसके लंड को अपनी चूत में बुला रही थी। अब आशीष ने अपना लंड संजना की चूत के मुहं पर लगाकर एक जोरदार धक्का मार दिया जिससे उसका आधे से ज्यादा लंड अब संजना की चूत में था और वो एकदम के चीखकर रह गई, लेकिन आशीष पर हवस अब इतनी बुरी तरह से हावी हो चुकी थी कि उसे संजना का दर्द से तड़पना, आहें, चीखे और अपनी वो शर्त कुछ भी याद नहीं थी और अब माहोल में आशीष के लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने की थप थप और संजना की चीखे पूरी तरह से घुली हुई थी। इस बीच आशीष का बदन अकड़ गया और वो संजना के अंदर ही झड़ गया और निढाल होकर उसके ऊपर गिर गया और वो दोनों उसी हालत में सो गया। सुबह आशीष की पहले नींद खुल गई उसने अपने आपको नंगी संजना के ऊपर पाया और फिर उसे लगा कि यह उसने क्या कर दिया? और वो वहीं पर बैठकर अपने आपको दोष देने लगा ।।

धन्यवाद …

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