दोस्त की लंडखोर मम्मी

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प्रेषक : राजेश …

हैल्लो दोस्तों, में राजेश एक बार फिर से हाज़िर हूँ और अपनी सच्ची कहानी को लेकर। दोस्तों में अपने एक दोस्त जिसका नाम रवि है, में उसकी माँ को चोदने का प्लान बनाता हूँ, में उसकी चुदाई के कोई ना कोई अच्छे मौके की तलाश में लगा रहता हूँ? और जब उस दिन मेरे ऊपर उनकी एक छोटी सी गलती की वजह से गरम चाय गिर जाती है, तब उस जगह पर क्रीम लगाने के बहाने उनके नरम हाथ का स्पर्श चाहता हूँ, इसलिए में अपने दोस्त की मम्मी को वो काम करने के लिए कहता हूँ और वो मेरा लंड सहलाकर मुझसे अपनी जवानी की प्यास को बुझाना चाहती थी, मुझे यह पता चला और फिर जब उसकी प्यास पूरी तरह से भड़क गयी और वो अंदर ही अंदर उस आग में जलने लगी, तब उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा तू तो पहले से ही नंगा है और अब में भी अपने कपड़े उतार ही देती हूँ? तो मैंने उनसे कहा कि आपको अभी इतनी जल्दी भी क्या है? आंटी पहले में आपसे थोड़ा कपड़ों के ऊपर से ही मज़ा तो ले लूँ, उसके बाद आप यह कपड़े उतार देना।

अब आंटी मेरी तरफ अपनी शरारती हंसी हंसते हुए मुझसे कहने लगी कि लगता है तुम पहले से ही खेले और खाय हुए लगते हो? और मेरे सामने जानबूझ कर बिल्कुल नादान बनने का नाटक कर रहे हो, मुझे लगता है कि तुम्हें यह खेल खेलना बहुत अच्छी तरह से आता है, तुमने इससे पहले भी बहुत सी मस्तियाँ जरुर करी होगी, लेकिन तुम मेरे सामने ऐसा देख रहे हो। तब मैंने मुस्कुराते हुए उनसे कहा कि हाँ आंटी में बहुत पहले से अपने लंड को बहुत तरह की चूत का मज़ा दे चुका हूँ। मैंने अब तक बहुत सारी अनगिनत चूत को अपने इस लंड से चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट किया है और में इस खेल में बहुत अच्छा अनुभव रखता हूँ। फिर आंटी ने मुझसे थोड़ा सा चकित होकर पूछा कि भला तुम्हें इतनी सी उम्र में यह सब मज़ा कहाँ और कैसे मिल गया, जैसा तुम मुझे बता रहे हो? तब मैंने उनसे कहा कि मेरी मम्मी ने ही मुझे सबसे पहले अपनी चूत का मज़ा चखाया था और उन्होंने ही मुझे चुदाई कैसे करते है वो सारी बातें उसका तरीका भी सही ढंग से बताया और में सब कुछ सीख गया। दोस्तों मेरे मुहं से यह बात सुनकर आंटी बड़ी चकित हुई और उनका मुहं खुला का खुला ही रह गया और वो मुझसे कहने लगी कि हाय राम बेटा क्या तुम्हारी मम्मी को तुम्हारे साथ ऐसा काम करने में बिल्कुल भी शर्म नहीं आती? मैंने कहा कि मम्मी ने मुझसे कहा था कि बेटा अब तू जवान हो गया है और इससे पहले कि तू बाहर जाकर किसी रंडी के साथ अपनी जवानी के पहले मज़े ले और उसकी चुदाई करे और अपने आपको एड्स का मरीज़ बना ले तो यह मेरा फ़र्ज़ है कि तुझे चूत का असली मज़ा अपने घर में ही दे दिया जाए, क्योंकि आजकल बाहर सेक्स करने में एड्स का बहुत ख़तरा है और में बिल्कुल भी नहीं चाहती कि तुम्हें भी दूसरों की तरह एसी कोई भी बीमारी हो, में तुम्हें हमेशा स्वस्थ देखना चाहती हूँ और इस तरह से यह बातें कहते मेरे बारे में अच्छा सोचते हुए मेरी मम्मी ने ही मुझे पहली बार अपनी चुदाई का मज़ा दे दिया और उसके बाद तो मेरी मम्मी ने मुझसे मेरी बहन को भी चुदवाया। उन्होंने मुझसे कहा कि यह अब बड़ी होने के साथ साथ जवान भी होने लगी है, जैसे तुम्हें चूत की जरुर महसूस होने लगी है, उसी तरह इसको भी किसी लंड की जरुरत पड़ने लगी है और इसलिए यह अगर कहीं बाहर जाकर किसी और से अपनी चूत को उससे चुदवाएगी उससे अच्छा तो होगा कि तुम ही इसकी चुदाई करके इसकी इच्छा को पूरी कर दो, जिसकी वजह से हमारी इज्जत बची रह जाएगी और किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा। फिर मैंने अपनी माँ के साथ साथ अपनी बहन की कुंवारी चूत को भी अपने लंड से पहली बार चोदकर उसकी चूत की सील को तोड़ दिया और अपने लंड के मज़े उसको भी बहुत बार दिए और इस तरह से अब हम दोनों भाई बहन एक दूसरे के साथ चुदाई के मज़े लेते हुए एकदम सुरक्षित है और हमारे मम्मी, पापा भी खुश है। आंटी में तो कहता हूँ कि हर माँ बाप को ऐसा ही करना चाहिए, उनकी भी सोच मेरी मम्मी पापा की तरह होनी चाहिए, वरना आंटी आप तो जानती ही है कि चाहे लड़का हो या लड़की जहाँ उसने अपनी उम्र के 15 साल पार किए बस उसके सर पर चुदाई की भूत चड़ जाता है और इस वजह से वो बहक जाते है, में तो कहता हूँ कि आप भी रवि को घर में ही जवानी का मज़ा दिला दो, वरना वो साला भी पता नहीं कब से रंडीबाज़ी में पड़ा हुआ है और कहीं उसको कुछ हो गया तो आपकी बहुत उसमें बड़ी बदनामी होगी और आपको बाद में पछताना भी बहुत पड़ेगा।

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अब आंटी ने मुझसे कहा कि बेटा तूने तो आज यह बातें कहकर मेरी आँखे ही खोल दी और अब में भी रवि को घर में ही अपनी चुदाई का पूरा मज़ा दूँगी, उसको में बाहर किसी रंडी के पास नहीं जाने दूँगी, वरना उसको कुछ हो जाने का खतरा बना रहेगा और फिर मैंने आंटी से कहा कि मुझे आपसे एक बात और कहनी है। फिर आंटी मुझसे पूछने लगी, वो क्या बेटा? तब मैंने उनसे कहा कि आंटी अब जब हम दोनों चुदाई करने जा ही रहे है तो आप मुझसे गंदी, गंदी बातें करो। तब आंटी ने कहा कि बेटा इतनी देर से हमारे बीच में यह सभी गंदी बातें ही हो रही है। फिर मैंने कहा कि अरे यार इसे गंदी बातें थोड़ी कहते है। तभी आंटी ने मुझसे पूछा तो फिर किससे गंदी बातें कहते है, तुम ही आज मुझे वो भी बता दो? तब मैंने उनसे कहा कि इस काम को करते समय चूत और लंड की बातें बिल्कुल खुले अंदाज़ में होनी चाहिए और अब हमारे बीच में कोई भी लाज, शर्म नहीं होनी चाहिए। तब आंटी ने मुझसे कहा कि हाँ ठीक है साले मादरचोद में तेरे कहने का मतलब अब समझ चुकी हूँ कि तू मुझसे क्या और कैसे करवाना चाहता है? दोस्तों आंटी के मुहं से इतना सब सुनते ही में बहुत खुश होकर उनसे कहने लगा, वाह साली, रंडी, छिनाल तू तो इतनी जल्दी एक बार में ही सब कुछ समझ गयी और में उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा। मैंने उसकी चूत को अपने एक हाथ में लेकर ज़ोर से दबा दिया और ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स को सहलाने लगा। तभी आंटी ने सिसकियाँ लेते हुए उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह कहा कि मेरे राजा तुम इतनी देर लगा रहे हो, कहीं ऐसा ना हो जाए कि रवि भी यहाँ पर आ जाए और हमारा यह सारा खेल बिगड़ जाए? तब मैंने उनसे कहा कि ऐसा कभी भी नहीं होगा मेरी जान तुम बिल्कुल शांति से अपनी चुदाई मुझसे करवाओ, क्योंकि रवि इतनी जल्दी नहीं आ सकता और यह बात कहकर में उसके बड़े बड़े बूब्स को दोबारा सहलाने लगा और उसके नरम गुलाबी होंठो को अपने होंठो में दबाकर उनको चूसने लगा। अब आंटी का एक हाथ भी मेरी जांघों को सहलाता हुआ धीरे धीरे मेरे लंड की तरफ बढ़ रहा था, जो कि पहले से ही खड़ा होकर उनकी चूत को अपनी तरफ से सलामी दे रहा था। उन्होंने तभी मेरे लंड को झपटते हुए अपने हाथ से पकड़कर बहुत खुश होकर मुझसे कहा, वाह राज यह तो बहुत लंबा और मोटा है, क्यों तुम्हारी मम्मी को तो इससे अपनी चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आता होगा? मैंने कहा कि हाँ मेरी मम्मी को इसकी चुदाई अच्छी लगती है और मेरी बहन को तो इसको अपनी चूत के अंदर लेने में बहुत ही ज्यादा मज़ा आता है। फिर आंटी बहुत ही प्यार से मेरे लंड को सहलाने लगी और अब तक उनके बूब्स के निप्पल भी दबाए, सहलाए जाने से तनकर किसी मटर के दाने की तरह ऊपर आ चुके थे, जो कि उनके ब्लाउज के ऊपर से भी साफ साफ नज़र आ रहे थे। अब मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया, जिसकी वजह से थोड़ी ही देर में वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में ही रह गयी। तब मैंने उनसे कहा कि मेरी रानी अब यहाँ मज़ा नहीं आ रहा है, चलो अब हम बेडरूम में चलते है और वो किसी छिनाल की तरह मेरा लंड पकड़े पकड़े अपने बेडरूम में मुझे अपने साथ खींच लाई और लंड को एक जोरदार धक्का देते हुए उन्होंने मुझे बेड पर गिरा दिया। उनके इस तरह करने से मुझे अपने लंड में बहुत दर्द हुआ, लेकिन में उनसे कुछ नहीं बोला। मैंने दिल में सोच लिया था कि आज में इस साली की चूत की अपने लंड से चुदाई करके इसकी धज्जियाँ उड़ा दूँगा और फिर मैंने उसको भी अपने ऊपर गिरा लिया और उसकी ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसके मुलायम बूब्स को में किसी हार्न की तरह ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा, जिसकी वजह से उसके मुहं से चीख निकल पड़ी, उूउउइईई माँ आह्ह्ह्हह्ह मेरे राजा यह क्या कर रहे हो ज़रा आराम से दबाओ स्सीईईईईईइ बहुत दर्द कर रही है में कहीं भागी नहीं जा रही हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उससे कहा कि मेरी जान इस तरह ही तो असली मज़ा आता है और वैसे भी तुम्हारे बूब्स कितने मस्त मजेदार है, में इनको ऐसे नहीं छोड़ सकता मुझे आज इसका पूरा मज़ा लेने दो। तभी उसने मेरा लंड बहुत ज़ोर से पकड़कर दबा दिया और दर्द की वजह से मेरे मुहं से आअहहहह उफ्फ्फ्फ़ की आवाज़ निकलने ही वाली थी, लेकिन में तुरंत समझ गया कि यह साली कुतिया मुझसे बदला लेना चाह रही है, इसलिए में बिना आवाज के रहा और अब में उसकी ब्रा को उतारकर एक तरफ फेंक चुका था और बिना देर किए उसका पेटीकोट भी मैंने तुरंत नीचे उतार दिया। उसकी बड़ी सी चूत पर बहुत छोटी सी पेंटी थी, जो उसकी बड़ी आकार की उभरी हुई चूत को पूरी तरह से छुपा भी नहीं पा रही थी। फिर मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और अब तो उसके मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर में कुछ देर उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाता रहा और फिर उसको बेड पर धकेलते हुए में उसकी जांघों की तरफ आ गया और में अपने मुहं को उसकी पेंटी के पास ले जाकर दाँत से उसकी पेंटी को खींचने लगा और आंटी अपना सर उठाकर यह नज़ारा देख रही थी और मैंने अपने दाँत से खींचकर उसकी छोटी सी पेंटी को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और उस पर पूरी तरह से मस्ती सवार थी और वो मुझसे कहने लगी कि राजा अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं हो रहा है प्लीज अब अपना लंड मेरी चूत में डाल दो ना, मुझे बहुत खुजली मच रही है।

फिर मैंने कहा कि मेरी चुदक्कड़ रानी तुझे अब इतनी जल्दी भी क्या है? अभी तो में पूरी तरह से गरम ही नहीं हुआ, अभी पहले में तेरी चूत को ज़रा चखकर तो देख लूँ। तभी आंटी ने थोड़ा सा चकित होकर मुझसे पूछा कि क्या मतलब? मैंने कहा कि यार अभी पहले में तेरी चूत की चूसाई तो कर लूँ। आंटी ने कहा कि यानी तुम मेरी चूत को अपने मुहं से चूसोगे? क्या ऐसा भी किया जाता है? इतनी गंदी जगह पर तुम अपने होंठ लगाओगे और ना सिर्फ़ तुम मेरी चूत को चूमोगे, बल्कि उसको अपने मुहं से चूसोगे भी? तो मैंने उनसे कहा कि वाह मेरी रंडी तेरे इतने बड़े, बड़े बच्चे हो गये और आज तक तूने अपनी चूत को किसी से नहीं चुसवाया? अब वो कहने लगी कि रवि के पापा तो खाली कुछ देर मेरे बूब्स को मसलने के बाद मेरी चुदाई शुरू कर देते है और हमारी यह चुदाई कुछ देर ही चलती है। उसके बाद वो झड़ जाते है और में हमेशा प्यासी तरसती हुई रह जाती हूँ, लेकिन उनके कुछ भी फर्क नहीं पड़ता और वो थककर सो जाते है और हाँ आज तक उन्होंने कभी भी मेरी चूत को अपने लंड के अवाला छुआ तक भी नहीं, इसको अपना मुहं लगाकर चूसना और अपना हाथ लगाना तो बहुत दूर की बात है, लेकिन में कई बार ब्लूफिल्म में देख चुकी हूँ कि उसमें वो लड़के उन लड़कियों की चूत को अपने मुहं को पूरा अंदर तक घुसाकर उनकी चूत को चाटते है और अपनी जीभ से वो चूत की चुदाई भी बहुत अच्छी तरह से करते है, जिसको देखकर में हमेशा सोचती थी कि ऐसा गंदा काम सिर्फ़ बाहर वाले ही करते होंगे, इसके बारे में वो लोग ही ज्यादा समझते होंगे? अब मैंने उससे कहा कि वाह मेरी जान क्या खूब कही तुमने, अरे जब महा मुनि का कामसुत्र यहाँ लिखा गया है और अजंता अलोरा की गुफ़ाओं में जो चुदाई के कामुक द्रश्य है, उनको ही देखकर तो बाहर वाले सेक्स करना सीखे है, वरना उन सालों को क्या पता कि सेक्स किस चिड़िया का नाम है? और तब मैंने उसकी गुलाबी चूत को पहली बार देखा, वाह क्या मस्त कितनी सुंदर चूत थी उस साली की, उसकी चूत से बहुत अज़ीब सी मनमोहक खुशबू आ रही थी। मैंने उसकी चूत के दोनों होंठो को अपनी उंगलियों से फैलाया और देखा कि उसकी की दरारों से उसके अंदर का हिस्सा पूरी तरह से गुलाबी मस्त नज़र आ रहा था और मैंने उसकी चूत का दाना फड़फडा रहा था। मैंने उसकी चूत के छेद पर धीरे से अपने होंठो को रख दिया। फिर मेरे होंठो का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर वो सिसक पड़ी, आईईई उूउफफफ्फ़ राजा क्या कर दिया तूने आह्ह्ह्ह उूउउफ्फ मुझे बहुत गुदगुदी लग रही है प्लीज अब कुछ करो ना आह्ह्ह्हह्ह।

फिर मैंने उसकी चूत को चूमना शुरू कर दिया और वो अपनी गांड को नीचे ऊपर करने लगी। फिर कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत की दरार को फैलाकर उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ को डाल दिया, जिसकी वजह से वो सिसक पड़ी, आआअहह आईईईईईई मेरे राजा ऊऊफफफ्फ़ वाह बहुत मज़ा आ रहा है प्लीज तुम जल्दी जल्दी से अपनी जीभ से ही मेरी चूत को चोद डालो और में उसकी चूत के स्वाद को बहुत ही मज़े लेकर चाट रहा था। आज मैंने पहली बार ऐसा मज़ा लिया है, कोई मेरी चूत में अपनी जीभ से मेरी चूत की चुदाई कर रहा है, वो बहुत मस्ता गयी थी और वो अपने दोनों बूब्स को अपने हाथ से रगड़ने लगी थी और निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच में लेकर मसल रही थी। यह तो मुझे पता ही था कि आज उसकी चूत की पहली बार ऐसे मस्त चुसाई हो रही थी, इसलिए उसको जल्दी झड़ना तो नहीं था। अब में जी जान से उस साली की चूत की चुसाई कर रहा था। तभी थोड़ी देर के बाद ही उसने अपने दोनों हाथ से मेरे सर के बाल पकड़ लिए और वो मेरे सर को अपनी चूत में दबाते हुए अपने दोनों पैरों को आपस में दबाने लगी। फिर में तुरंत समझ गया कि यह साली अब झड़ने वाली है, लेकिन में फिर भी लपड़ चपड़ करके उसकी चूत को लगातार चाट रहा था और वो अपनी गोरी गरम जांघो से मेरे सर को दबाये चली जा रही थी, जिसकी वजह से मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे वो आज मुझे उन पैरों की बीच में पीस डालेगी, लेकिन में भी कम नहीं था, इतना सब कुछ होने पर भी मैंने बस नहीं किया और में अपने काम में तब भी लगा रहा और अब मैंने अपनी दो उँगलियों को भी अपनी जीभ के साथ साथ उसकी चूत में अंदर तक डाल दिया, जिसकी वजह से वो तड़प गई और चिल्लाने लगी आआअहहहह उउउइईईईईईईई ऊऊऊओफफफ्फ़ करती हुई झड़ने लगी और अब उसका पूरा गरम गरम माल वो चूत रस सीधे मेरे मुहं में जा रहा था, जिसको में बहुत मज़े लेकर किसी भूखे कुत्ते की तरह चाट रहा था और वो बुरी तरह से अपनी चूत से पानी छोड़ रही थी।

दोस्तों मैंने उसका बहुत सारा रस पी लिया और फिर उसकी सुंदर सी पेंटी को उठाकर उससे उसकी पसीज़ी हुई चूत को और उसके साथ साथ अपने मुहं को साफ करने लगा। फिर उसने मुझसे कहा कि हाय तुम मेरी प्यारी पेंटी को इस तरह से क्यों खराब कर रहे हो? तो मैंने उससे कहा कि जब में तुम्हारी चूत को में चाट रहा था, तब तो तुमने मुझसे नहीं कहा कि क्यों तुम अपना मुहं इस चूत के अंदर डालकर गंदा कर रहे हो? और अब में इस पेंटी में चूत रस को साफ कर रहा हूँ, तो तेरी गांड फटी जा रही है? तभी आंटी ने हंसते हुए मेरे लंड पर थोड़ा प्यार से अपने एक हाथ से थपकी मारते हुए कहा कि हाय मेरे राजा बस तुम मेरी इतनी सी बात का बुरा मान गये, तुम तो मेरी यह पेंटी क्या चीज़ है? आज से हर चीज़ तुम्हारी हुई और तुम्हारे जो भी जी में आये वो करो, कसम से आज तो तुमने जवानी का असली मतलब ही मुझे बता दिया। फिर मैंने उससे कहा कि अब रवि भी आता होगा, तुम जल्दी से अपने कपड़े पहन लो, वरना हमें इस हाल में देखकर वो क्या सोचेगा? तब उसने कहा कि आने दो साले को आज में उससे भी अपनी चुदाई करवाउंगी, नहीं तो वो बाहर रंडियों के पास जाकर पैसा भी खर्च करेगा और अपनी जवानी को भी खराब कर लेगा। दोस्तों आंटी को मेरी चुदाई का तरीका बहुत पसंद आया और हमने खूब मजा किया ।।

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धन्यवाद …

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