दोस्त की प्यासी माँ

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, यह अभी कुछ दिन पहले की बात है जब यह घटना मेरे साथ घटी। मेरे घर के पास में एक 35 साल की औरत रहती है उनका नाम पुष्पा है, पुष्पाजी एक ग्रहणी है उनका लड़का 10th क्लास में पढ़ता है और उनके पति एक लोकल ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते है और इसलिए वो सुबह 7 बजे अपने घर से निकल जाते और रात को वो करीब 10 बजे तक वापस आते है।

दोस्तों में अक्सर उनके घर किसी भी काम से या उनके बेटे से मिलने चला जाता हूँ, क्योंकि पुष्पा का बेटा मेरा बहुत अच्छा दोस्त है। पुष्पा को में हमेशा उनके नाम से यानी पुष्पाजी कहकर बुलाता हूँ और में कभी कभी उनको पुष्पा आंटी भी कहता हूँ, पुष्पा का शरीर थोड़ा मोटा और उसके बूब्स बहुत बड़े आकार के है और उनकी गांड तो दिखने में एक बड़े आकार का कमरा है। दोस्तों जिसका मतलब वो ज्यादा आकर्षित औरत नहीं है, लेकिन मैंने कभी भी उनको अपनी गंदी नजर से नहीं देखा था। एक दिन में किसी काम की वजह से उसके घर चला गया, मैंने देखा कि वो उस समय आराम कर रही थी, मैंने उनसे पूछा कि पुष्पा आंटी अमित कहाँ है? अमित उसके लड़के का नाम है। फिर वो मुझसे कहने कि अमित अपने पापा के साथ उसकी बुआजी के घर गया है और वो कल तक वापस आ जाएगा। अब मैंने उनको कहा कि आप आज घर पर अकेले हो आपको अगर कुछ भी काम हो तो आप मुझे जरुर बताना आंटी। फिर उसने बड़ी गंदी नजर से मेरी तरफ देखा और फिर कुछ देर सोचने के बाद वो बोली कि हाँ बेटा मुझे तुझसे आज बड़ा काम है। अब मैने उनके मुहं से वो बात सुनकर तुरंत पूछा कि हाँ बताईए ना आंटी आपको मुझसे क्या काम है? वो कहने लगी कि में अभी बताती हूँ, पहले में तुझे चाय दे दूँ और फिर में वहां बैठ गया।

अब पुष्पा अंदर रसोई में चाय बनाने चली गई और कुछ देर बाद वो चाय लेकर आ गई और मुझसे पूछने लगी कि बेटा क्या तेरे पास कोई ब्लूफिल्म है? उनके मुहं से में यह बात सुनकर एकदम चकित हो गया और मन ही मन सोचने लगा कि आंटी यह क्या कह रही है? अब मैंने आंटी से पूछा क्या ब्लूफिल्म? वो बोली हाँ बेटा ब्लूफिल्म मैंने कभी नहीं देखी है। अब मैंने कहा कि हाँ मेरे पास है, वो बोली कि बेटा तू वो फिल्म लेकर आ मुझे आज उसको एक बार देखना है। फिर में उनका कहना मानकर घर से एक ब्लूफिल्म लेकर आ गया जब मैंने उस ब्लूफिल्म को चलाया, तब उस समय पुष्पा आंटी मेरे साथ बैठी हुई थी और फिर फिल्म में कुछ देर बाद चुदाई शुरू हो गई। अब पुष्पा आंटी मेरे पास बैठकर बड़े मज़े के साथ वो फिल्म देख रही थी, मुझे उनको देखकर बहुत हैरानी हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने कभी भी आंटी को इस रूप में नहीं देखा था। दोस्तों वो बिल्कुल मेरे पास बैठी हुई थी फिल्म देखते हुए वो मुझसे पूछने लगी कि बेटा तूने कभी यह सब किया है? उनकी यह बात सुनकर मेरे लंड में हरकत शुरू हो गई थी। अब मैंने कहा कि आंटी मैंने तो बहुत बार यह सब किया है, वो यह बात सुनकर खुश हो गई और अब आंटी ने अपना एक हाथ साड़ी के साथ पेटिकोट के अंदर डाल दिया और यह सब देखकर मेरा लंड तन गया।

अब आंटी जोश में आकर उस फिल्म को देखने के साथ साथ अपनी चूत में ऊँगली भी कर रही थी और में चुपचाप बैठा हुआ था, तभी वो मुझसे बोली कि बेटा क्या तुम मेरी चूत में ऊँगली करोगे? तब मैंने चकित होकर उनको पूछा कि आंटी आप मुझसे यह क्या कह रही हो? वो बोली कि बेटा में सिर्फ अपनी चूत में ऊँगली डालकर ही अपने शरीर की गरमी को निकालती हूँ क्योंकि अमित के पापा मेरे साथ सेक्स नहीं करते, उनको बहुत साल हो गये है मेरी चुदाई किए हुए और इसलिए यह काम मुझे हर कभी करता पड़ता है। अब मैंने उनको कहा कि आंटी मैंने कभी भी आपको इस नजर से नहीं देखा, वो कहने लगी कि बेटा में जानती हूँ कि तुमने मुझे कभी भी इस नजर से नहीं देखा, लेकिन मैंने हमेशा से तुझको अपनी गंदी नजर के साथ ही देखा है। फिर मैंने उनको कहा कि आंटी आप तो बहुत मोटी हो, वो पूछने लगी कि बेटा तो क्या समस्या है? उन्होंने तुरंत ही अपने पेटिकोट को ऊपर उठा दिया जिसकी वजह से अब उसकी चूत मेरी आँखों के सामने थी। अब मैंने देखा कि उसकी चूत आकार में ज्यादा बड़ी थी और उसके चारो तरफ काले घुंघराले बाल थे।

अब वो अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए बोली कि बेटा क्या तुम मेरी इस चूत में अपना लंड डालोगे? मैंने बोला कि आंटी हाँ मेरा दिल तो कर रहा है कि में अपना लंड इसमे डाल दूँ, लेकिन आपका बेटा मेरा दोस्त है और अगर उसको पता चलेगा तो वो क्या सोचेगा कि उसके पक्के दोस्त ने उसकी माँ को चोद दिया? पुष्पा आंटी ने कहा कि बेटा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अमित को कुछ भी पता नहीं चेलेगा। फिर मैंने उनको कहा कि ठीक है पुष्पा आंटी, चलो आज में आपको शांत कर देता हूँ आप भी क्या याद रखोगी? मेरे मुहं से यह बात सुनकर पुष्पा आंटी बड़ी खुश हो गई, उसने बिना देर किए तुरंत अपने सारे कपड़े खोल दिए और वो अब बिल्कुल नंगी होकर मेरे सामने खड़ी हो गई। अब उसको अपने सामने पहली बार पूरी नंगी देखकर मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था, उसके बूब्स बहुत बड़े आकार के थे, उसका पेट भी बाहर निकला हुआ था और उसके कुल्हे भी बहुत मोटे थे। फिर मैंने पुष्पा को कहा कि आंटी आपका यह शरीर तो बहुत बुरी हालत में है, तब वो बोली कि हाँ बेटा मुझे पता है क्योंकि बहुत दिनों से इसको किसी का लंड नहीं मिला है इसलिए इसकी यह हालत हो चुकी है, लेकिन अब तुम्हारा लंड मिल गया है तो इसकी वजह से मेरा फिगर भी अच्छा हो जाएगा।

दोस्तों मैंने अपने भी कपड़े खोल दिए, जिसकी वजह से मेरे लंड को देखकर पुष्पा चकित होकर घूरते हुए बोली कि वाह क्या मस्त सेक्सी लंड है तेरा? और वो मेरे लंड को पकड़कर हिलाने लगी। अब मैंने कहा कि पुष्पा आंटी प्लीज आप इसको अपने मुहं में ले लो आपको बड़ा ही मज़ा आएगा ऐसा करके। फिर वो मुझसे बोली कि बेटा यह भी क्या कोई कहने की बात है? अभी पहले तो में इसको अच्छी तरह से देख तो लूँ और उसके बाद में इसके साथ वो सब कुछ करूंगी और वैसे भी एक जवान लंड के दर्शन मुझे बहुत दिनों के बाद हुए है और वो भी इतना दमदार लंड जिसकी तारीफ करने के लिए मेरे पास कोई भी शब्द नहीं है। अब मैंने उनको पूछा क्यों अंकल का लंड कैसा है? तब वो बोली कि उनका लंड तो पूरी तरह से खड़ा भी नहीं होता, उस लंड से चुदाई करने का सवाल ही नहीं उठता वो बस देखने और दिखाने के काम ही आ सकता है। फिर मैंने पूछा कि तुम फिर अब तक क्या करती थी? वो बोली कि बस बेटा में अपनी उंगली से ही अपनी चूत को शांत करती थी और कभी कभी में मोमबत्ती से भी काम चला लेती हूँ, लेकिन वो सब करके किसी को वो मज़ा शांति नहीं मिल सकती जो एक लंड से मिलती है।

अब मैंने पूछा कि आंटी आपने मुझसे पहले कभी क्यों यह सब नहीं बोला? तब वो बोली कि बेटा में तुझसे बात करने का कोई अच्छा मौका देख रही थी और वो मौका मुझे आज मिल ही गया। फिर मैंने उनको कहा कि चलो अब इसको चूसू और मज़ा करो, इतना सुनते ही पुष्पा अब किसी भूखी कुतिया की तरह मेरे लंड टूट गई और वो बहुत तेज़ी से मेरे लंड को चाटने लगी और उसको चूसने लगी, वो उस समय बहुत जोश में थी। अब मैंने उसको कहा कि पुष्पा प्लीज थोड़ा सा आराम से करो हमारे पास आज का पूरा दिन पड़ा हुआ है, तुम जितना चाहो इसका मज़ा ले सकती हो यह आज से बस तुम्हारा ही है। फिर वो मुझसे कहने लगी कि बहुत साल के बाद इतना मस्त स्वादिष्ट मजेदार लंड मिला है, इसलिए मुझसे अब रुका ही नहीं जा रहा है और वो मेरे लंड को ऐसे चाट रही थी जैसे कि वो एक अनुभवी रंडी हो, मैंने उसके बूब्स को पकड़ लिए और उनको दबाने मसलने लगा। फिर वो मुझसे कहने लगी कि बेटा थोड़ा ज़ोर से दबाओ ना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और फिर मैंने उसके बूब्स को ज़ोर से मसलना, दबाना शुरू कर दिया, वो साथ में मेरा लंड भी चूस रही थी और मुझसे अपने बूब्स भी मसलवा रही थी।

फिर वो मुझसे बोली कि बेटा दिल तो करता है कि में तेरा लंड हमेशा ऐसे ही चूसती रहूँ, लेकिन अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम अब मेरी चूत को तेज तेज धक्के मारो। अब मैंने उसको बोला कि हाँ ठीक है मेरी रंडी आंटी चल में आज तेरी चूत मारता हूँ और अब वो अपने दोनों पैरों को फैलाकर पलंग पर लेट गई। फिर उसी समय बिना देर किए उसकी चूत में मैंने अपना लंड डाल दिया और उस दर्द की वजह से उसका ज़ोर से चिल्लाना शुरू हो गया, मैंने अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के देने लगा। अब वो बोली कि बेटा मुझे आज स्वर्ग का मज़ा मिल रहा है प्लीज़ ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर इसको पूरा अंदर डालो और मेरी इस चूत को आज तुम पूरा फाड़ दो, इसकी मजेदार चुदाई करो इस मेरी चूत ने मुझे इतने दिनों से बहुत तकलीफ़ दी है। फिर में इसकी वजह से हर दिन अपनी उंगली को डालकर शांत किया करती थी, लेकिन फिर भी यह कभी भी शांत नहीं हुई क्योंकि इसको सिर्फ़ लंड की भूख थी और इसलिए आज तुम इसकी पूरी भूख को मिटा दो शांत कर दो इसको। अब मैंने उसको बोला कि चुपकर साली बहुत ज्यादा बोलती है, में उसकी चूत में धक्के मारे जा रहा था और वो मज़े के साथ अपनी चूत मरवा रही थी।

फिर करीब दस मिनट तक बिना रुके लगातार जोरदार धक्के देकर उसकी चूत मारने के बाद मैंने उसको बोला कि चल पुष्पा अब तू उल्टी लेट जा क्योंकि अब तेरी गांड की बारी है, में आज तेरी गांड को भी अपने लंड के मज़े देना चाहता हूँ। अब पुष्पा मेरे मुहं से वो बात सुनकर बड़ी खुश होकर कहने लगी कि आज तुमने मेरे दिल की बात को अपने मुहं से कह दिया, में भी तुमसे आज अपनी गांड को मरवाना चाहती हूँ और में अपनी गांड में भी तुम्हारे लंड को महसूस करना चाहती हूँ और इसकी ताकत को देखना चाहती हूँ। फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर उसकी गांड के छेद पर अपने लंड का टोपा रखकर ज़ोर से दबाव बनाकर उसको गांड के अंदर डालना चाहा, लेकिन मैंने बहुत बार कोशिश करके देखा वो नहीं जा रहा था। अब में पुष्पा से पूछा कि हरामजादी तेरी गांड इतनी टाइट क्यों है? इसमे मेरा लंड इतना ज़ोर लगाने पर भी अंदर नहीं जा रहा है ऐसा क्यों हो रहा है? फिर वो बोली कि बेटा आज पहली बार कोई मेरी गांड मार रहा इसलिए यह इतनी टाइट है और फिर मैंने बड़ी मेहनत से उसकी गांड के छेद में अपना लंड डाल दिया। दोस्तों उस दर्द की वजह से पुष्पा अब ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी दर्द की वजह से तड़पने लगी थी।

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फिर उसी समय मैंने उसके मुहं पर अपना एक हाथ रख दिया क्योंकि मुझे पता है कि पहली बार गांड मारने पर औरत दर्द की वजह बहुत ज्यादा चीखती चिल्लाती है, लेकिन मैंने उसके मुहं पर अपना हाथ रखकर उसकी बहुत जमकर गांड मारी। अब मुझे उसके साथ यह सब करने में बहुत मस्त मज़ा आ रहा था, लेकिन इतनी देर तक धक्के देने के बाद भी मेरा लंड अब भी तना हुआ था। फिर मैंने पुष्पा की गांड से अपना लंड बाहर निकालकर उसके मुहं में डाल दिया और वो उसको मज़े लेकर चाटने और चूसने लगी और उसी समय मैंने उसको कहा कि पुष्पा जी अब आप इसको चूस चूसकर इसका पूरा पानी निकाल दो। अब वो कहने लगी वाह क्या मस्त दमदार लंड है तेरा? मेरी चूत और मेरी गांड दोनों को इतनी देर तक धक्के मारने के बाद भी यह अभी तक तना हुआ खड़ा है। अब वो मेरे लंड को चाटते चाटते मेरे आंड को भी चाट रही थी और उसी समय मैंने उनसे पूछा क्यों पुष्पा तुम्हे कुछ शांति मिली या नहीं? तब वो बोली कि में अब तक तीन बार झड़ चुकी हूँ और मेरी चूत अब एकदम शांत है, लेकिन मेरी चूत को आज तक किसी ने भी नहीं चाटा, क्या तुम मेरी चूत को चाटोगे? तब मैंने बोला कि हाँ, लेकिन एक शर्त पर। अब वो पूछने लगी कि हाँ बताओ वो क्या है? मैंने उसको बोला कि तुम हमेशा मेरी रंडी बनकर रहोगी और मेरे लिए नई नई चूत का इंतज़ाम भी करोगी।

अब वो मेरी बात को सुनकर मेरी तरफ मुस्कुराते हुए बोली कि हाँ ठीक है में अपनी सहेलियों को भी तुम्हारे लिए तैयार करके ले आउंगी। फिर मैंने उसको कहा कि चुप साली रंडी मुझे तेरी उम्र की नहीं जवान चुदाई के लिए प्यासी औरते, लड़कियाँ चुदाई करने के लिए चाहिए। अब वो कहने लगी कि बेटा औरत जवान हो या बूढी मतलब तो उसकी चूत से होता है और वैसे भी तुम्हे एक जवान लड़की वो सब मज़ा नहीं दे सकती जो मज़ा हम अनुभवी औरते दे सकती है, क्योंकि हमे चुदाई के साथ साथ सभी बातों का पूरा पूरा अनुभव और उसकी पूरी जानकारियां भी होती है। अब मैंने कहा कि हाँ चल ठीक है और हम दोनों 69 आसन में लेट गये और में उसकी चूत को चाटने लगा, पुष्पा भी मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूस रही थी। दोस्तों पुष्पा की चूत आकार में इतनी बड़ी थी कि मेरा पूरा मुहं उसकी चूत में घुस रहा था, कुछ देर बाद उसकी चूत को चाटने से ही वो झड़ गई और उसकी चूत का पानी पीने के बाद में भी उसके मुहं में झड़ गया। अब पुष्पा आंटी भी मेरा पानी पी गई और फिर में कुछ देर बाद नहाने चला गया, तब मैंने पुष्पा को बोला कि चलो आंटी अब में अपने घर जाता हूँ शाम को में एक बार फिर से आ जाऊंगा, तब तक आप अपनी सबसे अच्छी दोस्त को बुला लेना।

फिर वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली कि हाँ ठीक है, में तेरे लंड का इंतजार करूंगी और में अपने घर बड़ा खुश होकर चला आया, लेकिन शाम को जब में पुष्पा आंटी के घर पर पहुंचा तब मैंने देखा कि वहां पर पुष्पा की एक दोस्त बैठी हुई है। दोस्तों उसके बूब्स दूर से कपड़ो में बहुत अच्छे गोलमटोल आकर्षक नजर आ रहे थे और उसकी उम्र भी करीब 40 के आसपास होगी। तभी कुछ देर बाद पुष्पा आंटी भी वहां पर आ गई और वो मुझसे उसका परिचय करवाते हुए कहने लगी कि बेटा यह मेरी दोस्त है और इसका नाम सरोज है, इसका मर्द मर चुका है और मैंने इसको हम दोनों के बीच की सभी बातें उस काम के बारे में अच्छी तरह से समझा दिया है और अब यह हमारे इस खेल में हमारा पूरा साथ अपनी मर्जी से देने को तैयार है। अब मैंने वो सभी बातें सुनकर खुश होकर सरोज की छाती पर अपना एक हाथ लगाया और तब छुकर मुझे महसूस किया कि उसके बूब्स एकदम टाइट थे। अब सरोज मुझसे कहने लगी कि बेटा तुम आज इसको जी भरकर दबाओ इनका मज़ा लो और मुझे भी वो सभी मज़े दो जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही हूँ।

फिर मैंने कहा कि सरोज तेरी चूत कैसी है? वो बोली कि तुम खुद ही देख लो ना तुम्हे अब रोका किसने है? मैंने पूछा कि क्या तेरी चूत पर बाल है? वो बोली कि हाँ है। फिर मैंने उसको कहा कि तुम अपनी झाटे साफ क्यों नहीं करती हो? वो कहने लगी कि अगर तुम कहो तो में अभी साफ कर लूँ और फिर मैंने उसको कहा कि चल अब अपनी चूत के दर्शन तो मुझे करा दे। फिर यह बात सुनकर खुश होते हुए सरोज ने झट से अपनी सलवार को खोल दिया और फिर अपनी पेंटी को भी उतार दिया, तब मैंने देखा कि सरोज की चूत बहुत सुंदर थी। अब मैंने पुष्पा आंटी को बोला कि चल पुष्पा अब तू भी नंगी हो जा और फिर मेरी बात को सुनकर पुष्पा भी तुरंत पूरी नंगी हो गई। दोस्तों जिसकी वजह से अब मेरे सामने दो औरते बिल्कुल नंगी खड़ी हुई थी और वो दोनों ही अपनी खा जाने वाली वजह से मेरे लंड को देख रही थी। फिर मैंने सरोज को कहा कि अब तुम दोनों अपनी अपनी चूत को एक दूसरे की चूत से रगाड़ो यह बात सुनकर तुरंत ही सरोज और पुष्पा अब अपनी अपनी चूत को एक दूसरे की चूत से रगड़ने लगी और कुछ देर बाद उन दोनों को ऐसा करने में बड़ा मज़ा आने लगा। अब वो दोनों जोश में आकर नीचे लेटकर अपनी गरम चूत को किसी अनुभवी रंडियों की तरह रगड़ रही थी।

फिर कुछ देर बाद में अपना मुहं उन दोनों की चूत के पास ले गया और मैंने अपनी जीभ को उनकी चिपकी हुई चूत पर फेरना शुरू कर दिया। अब में कभी पुष्पा की चूत को चाटता तो कभी सरोज की चूत को चूसता ऐसा करने में मुझे भी उनके साथ साथ बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने कुछ देर बाद सरोज को खड़ाकर दिया और में उसके बूब्स को चूसने दबाने लगा और पुष्पा नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी। दोस्तों सरोज के बूब्स आकार में बड़े होने के साथ ही बहुत कसे हुए भी थे, जिसकी वजह से मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और उसके बूब्स को चूसने पर मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा था। अब वो मुझसे बोली कि बेटा अब तुम मेरी इस प्यासी चूत पर भी थोड़ा रहम कर दो और इसको भी तुम चोदो या चाटो इसको तुम कब तक ऐसे ही तरसाते रहोगे? मैंने उसको पलंग पर लेटा दिया और में उसकी चूत को चाटने लगा। अब पुष्पा मेरे दोनों पैरों के बीच में आकर नीचे लेटकर मेरा लंड चाट रही थी और में सरोज की चूत में खोया हुआ था और इस बीच सरोज दो बार झड़ चुकी थी, जिसकी वजह से अब उसकी चूत से बहुत सारा रस निकलने लगा। फिर वो मुझसे कहने लगी कि बेटा इसको तुम पी लो मैंने उसकी चूत का पानी अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया और नीचे में पुष्पा के मुहं को चूत समझकर अपने लंड से झटके देने लगा।

अब पुष्पा ने भी अपने मुहं को एकदम टाइट कर लिया था क्योंकि वो समझ गई थी कि में उसके मुहं को अपने लंड से चोद रहा हूँ। दोस्तों सरोज की चूत से मुझे कुछ नशा सा हो गया था, मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि जैसे मैंने उस समय तीन पेग पी लिए है, लेकिन अब भी मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर थी और मेरी जीभ से सरोज अब दो बार झड़ चुकी थी और में भी दो बार पुष्पा के मुहं में धक्के देते हुए झड़ चुका था, लेकिन पुष्पा मेरे पानी को पीने के बाद अब भी मेरे लंड को चाट रही थी। फिर बहुत देर तक उसकी चूत को चाटने के बाद में उठकर बैठ गया, मुझे उस समय सरोज और पुष्पा उनके खिले हुए चेहरे से बहुत खुश नजर आ रही थी। अब सरोज मुझसे कहने लगी वाह बेटा तू क्या मस्त मज़े देकर चूत को चाटता है? इसकी वजह से मेरी चूत तो आज से तुम्हारी जीभ की दीवानी हो गई है और अब मुझे तुम्हारा लंड नहीं तुम्हारी जीभ ही चाहिए। फिर मैंने उसको कहा कि सरोज तेरी इस चूत ने भी मुझे बिल्कुल पागल कर दिया था, मेरा मन करता जा रहा था कि में भी इसको लगातार चाटता ही रहूँ। अब पुष्पा कहने लगी कि मुझे भी तेरे इस लंड को चाटना बहुत अच्छा लगा, उसके बाद मैंने तेरे आंड को चूसा उनको मसल दिया।

फिर सरोज हमारे लिए चाय बनाने के लिए उठी, उसकी चूत और उसकी गांड को देखकर मेरा लंड एक बार फिर से कुछ ही देर में तनकर खड़ा हो गया, में भागता हुआ उसके पीछे चला गया और मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया और फिर मैंने अपना तना हुआ लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब सरोज वहीं पर नीचे झुक गई और में वहीं पर उसकी चूत को जोरदार धक्के मारने लगा और करीब बीस मिनट तक लगातार ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को धक्के मारने के बाद में उसकी चूत में झड़ गया। फिर वो हंसती हुई बोली बेटा आज तो बहुत मज़ा आ गया क्योंकि आज बहुत साल के बाद मेरी चूत को तुमने मारी है, मुझे तुमने आज अपनी इस चुदाई से बड़ा खुश कर दिया है। अब मैंने उसको कहा कि चल अब तू मेरे लंड को चाट चाटकर साफ कर दे, तभी बीच में पुष्पा बोली कि बेटा तेरा यह काम में कर देती हूँ और पुष्पा वहीं पर तुरंत ही नीचे बैठकर मेरा लंड अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ करने लगी। फिर कुछ देर के बाद सरोज जाकर हमारे लिए चाय बनाकर ले आई, हम लोग वहीं पर बैठकर चाय पीने लगे। दोस्तों उस समय हम सभी पूरे नंगे ही थे और फिर बातों ही बातों में सरोज ने बोला कि बेटा आज तक तुमने सबसे अच्छी चूत किसकी मारी है? मैंने बोला कि तेरी, मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो हंसने लगी।

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अब सरोज बोली कि बेटा तेरा लंड सच में बहुत अच्छा है, में तेरे इस लंड और तेरी इस जीभ की दीवानी हो चुकी हूँ। फिर पुष्पा कहने लगी कि सच में अब तुम जब भी चाहो हम दोनों को चोद सकते हो और फिर में उनकी वो बातें अपने काम की तारीफ को सुनकर खुशी खुशी अपने घर पर आ गया। अगले दिन जब में अमित को मिलने उसके घर गया और अमित से में बातें करने लगा, तभी पुष्पा आंटी वहां पर आ गई। अब हम दोनों की आंखे मिली उसमे अब भी शरारत थी, वो मुझसे बोली कि बेटा तुम बहुत दिनों से आए नहीं हो क्यों एसी क्या बात है? मैंने कहा कि आंटी में किसी काम में बड़ा व्यस्त था इसलिए मुझे आपके घर पर आने का समय नहीं मिला। फिर वो मेरा यह जवाब सुनकर मेरी तरफ मुस्कुराकर वहां से रसोई में चली गई। तभी अमित का फोन बज गया और वो फोन पर बात करने में व्यस्त हो गया, में चुपचाप उठकर रसोई में चला गया और मैंने देखा कि पुष्पा वहां पर काम कर रही थी। अब मैंने पीछे से जाकर उसकी गांड पर अपना एक हाथ फेर दिया और वो बिना मुड़े, देखे बिना तुरंत समझ गई कि वो में हूँ। फिर वो मुझसे कहने लगी कि इस समय अमित घर पर है, मैंने उसको कहा कि मेरा लंड अब खड़ा हो गया है इसको आज अभी तेरी गांड मारनी है।

अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर बहुत घबराते हुए डरकर कहने लगी कि नहीं इस समय यह सब करना ठीक नहीं होगा, अमित को पता चल जाएगा और वो हम दोनों के लिए बहुत गलत होगा। फिर मैंने उसको कहा कि अमित को कुछ भी पता नहीं चलेगा और फिर मैंने उसी समय उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और अब में उसकी पेंटी को उतारने लगा। दोस्तों मुझे अच्छी तरह से पता था कि पुष्पा भी मुझसे अपनी गांड तो मरवाना चाहती थी, लेकिन उसको अमित का डर भी लग रहा था। अब मैंने अपना लंड पेंट से बाहर निकाला और एक ज़ोर का धक्का लगाते हुए उसकी गांड के छेद में डाल दिया और उसकी गांड में धक्के देने शुरू कर दिए। फिर उधर अमित अपने फोन पर अपने किसी दोस्त से बहुत हंस हंसकर बातें कर रहा था और इधर में उसकी माँ की गांड को धक्के मारने में लगा हुआ था। फिर कुछ देर के बाद मैंने गांड में धक्के देने के बाद उसकी चूत में भी अपना लंड डाल दिया और अपनी चूत में लंड जाने के बाद अब पुष्पा बहुत खुश हो गई, वो मुझसे बोली कि आज तू जल्दी से अपना पानी निकाल दे नहीं तो अमित आ जाएगा। फिर मैंने उसको बोला कि चुपकर साली, कुतिया, रंडी और मैंने अपने धक्कों की गति को पहले से तेज कर दिया और कुछ देर बाद मैंने उसको नीचे बैठा दिया और में उसके मुहं पर मुठ मारने लगा।

अब पुष्पा अपना पूरा मुहं खोलकर वहीं पर नीचे बैठ गई और उसकी नजर दरवाज़े पर भी थी, वो चुदाई के मज़े लेने के साथ साथ घबरा भी रही थी। फिर मैंने अपने हाथ से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और अपने पानी से उसका पूरा मुहं भर गया, जिसको पुष्पा चाटने लगी और लंड को चूसकर पीने भी लगी थी। फिर मैंने अपनी पेंट को ऊपर किया और में रसोई से बाहर आ गया और तब मैंने देखा कि अमित अभी भी फोन पर अपने किसी दोस्त से बातें करने में लगा हुआ था और कुछ देर बाद अमित ने अपना फोन रखा और वो सीधा रसोई के अंदर चला गया। दोस्तों तब तक पुष्पा ने अपने कपड़े ठीक कर लिए थे, लेकिन उसके चेहरे के कुछ हिस्से पर अब भी मेरे लंड का पानी लगा हुआ था, जिसको देखकर अमित अपनी माँ से कहने लगा कि मम्मी आपके चेहरे पर यह क्या लगा हुआ है? तब वो उसको बोली कि बेटा मैंने अपने चेहरे पर मलाई लगाई हुई है। दोस्तों उस दिन के बाद में हर हर जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता है, में पुष्पा आंटी और उनकी दोस्त सरोज आंटी को उनके घर में जाकर उनकी मस्त जमकर चुदाई करता हूँ। दोस्तों यह बात आज तक उनके घर में किसी को भी पता नहीं चली और हम तीनों मिलकर मस्त चुदाई के मज़े लेते रहे, मैंने उन दोनों को हर एक तरह से चोदा उनकी चूत, गांड, मुहं में अपना लंड डालकर उन दोनों को हमेशा अपनी चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट किया और वो दोनों भी मेरी इस चुदाई से हमेशा बहुत ज्यादा खुश रही ।।

धन्यवाद …

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