एक चुदक्कड परिवार 2

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प्रेषक : गुमनाम
“एक चुदक्कड परिवार 1” से आगे कि कहानी . . . घर में मोहसीन का रूम अम्मी और अब्बू के साथ वाला रूम है और दोनो का एक बाथरूम है जिसका दोनो रूम की तरफ एक एक दरवाजा है. ज़ैनब का रूम मोहसीन के रूम की बगल में है और उनके रूम में भी एक बाथरूम है. मोहसीन देख

कर हैरान हुआ की अभी तक अब्बू के रूम में बत्ती जल रही थी. ज़ैनब के कपडे बुरी तरह भीग चुके थे और उसकी बड़ी बड़ी चुचि साफ झलक रही थी. मोहसीन नशे में भूल गया की वो उसकी सग़ी बहन है. उसका दिल कर रहा था की अपनी दीदी की चुचि को कस कर भींच डाले और घसीट कर बिस्तर में ले जाए. लेकिन फिर अपने ख्यालों से शर्मिंदा हो कर बोला,”अच्छा दीदी गुड नाइट. सुबह मिलते हैं… अगर कोई चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना..” ज़ैनब मुस्कुराती हुई अपने रूम में चली गयी।

ज़ैनब अपने रूम में जाकर अपने बाल सूखने के लिए टावल देखने लगी क्युकी बाथरूम में टावल नहीं था. जब टावल ना मिला तो वो उसी वक्त अपने भाई के बाथरूम से टावल लेने चली गयी. उधर मोहसीन भी अपने कपड़े चेंज करने बाथरूम में गया और उसने दरवाजा खुला ही छोड़ दिया. अम्मी के रूम की तरफ वाला बाथरूम का दरवाजा आधा खुला था. अम्मी के रूम से हँसने की आवाज़ें आ रही थी. मोहसीन हैरान हो गया की इस वक्त अम्मी के रूम में अब्बू के अलावा कौन है? कमरे में डबल बेड खाली था. शायद अब्बू और अम्मी ड्राईंग रूम में थे. तभी कमरे में रामू दाखिल हुआ. मोहसीन ये देख कर चौंक गया की उनका नौकर पूरी तरह से नंगा था. रामू का काले रंग का कसरती बदन बहुत सेक्सी लग रहा था. उसके पीछे पीछे आयेश दाखिल हुई. आयेश,, यानी मोहसीन की अम्मी भी नौकर की तरह नंगी थी. आयेश अधेड़ उमर की बेहद गोरी औरत थी. उसकी चुचि का साइज़ 36 होगा और उसकी गांड कुछ भारी थी और निप्पल ब्लॅक थे. मोहसीन का मुहँ खुला का खुला रह गया जब उसने अपनी अम्मी को नग्न अवस्था में अपने ही नौकर के साथ देखा।

 

इसका मतलब माजरा कुछ और ही है!! हमारा नौकर मेरी अम्मी को चोदता है! अम्मी कितनी सेक्सी है!!! अम्मी की चूत पर छोटे छोटे बाल थे और उसका गोरा बदन बहुत सेक्सी था. अपनी अम्मी को देख कर भी मोहसीन का लंड खड़ा हो गया. आयेश अब रामू के लंड को पकड़ कर हिलाने लगी. “कितना मोटा है ये जानवर!!! इसको इसके बिल में घुसना चाहिए!!! अब अब्बू और माला भी आ जाए तो खेल शुरू करें” अम्मी बोली और रामू ने आयेश की चुचि पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और बोला आयेश, मेरी जान, मैं तो तेरे जिस्म का आशिक़ हूँ… तुम मुझे अपनी माँ की याद दिला देती हो और मैं तुझे चोदने के लिए तड़प जाता हूँ…” तभी अब्बू माला को बाहों में उठा कर आए और उन्होंने माला को बिस्तर पर लिटा दिया. मोहसीन को एक और झटका लगा क्युकी अब्बू और माला भी नंगे थे. अब्बू का लंड रामू के लंड से कुछ छोटा था लेकिन काफ़ी मोटा था. लगता था की सभी ने शराब पी रखी थी. जब अब्बू ने रामू को आयेश की चुचि मसलते हुए देखा तो मुस्कुरा पड़ा।  

रामू, आज के खेल में ये तो तय है की मेरे हिस्से में माला है और मेरी सेक्सी बीवी आज की रात तेरी है… खूब मज़े करेंगे दोनो के साथ… जब तक बच्चे वापिस आयेगे हम एक बाजी लगा चुके होंगे… जब वो सो जायेंगे तो दूसरी बाजी शुरू करेंगे… माला की चूत तो कई बार पानी छोड़ चुकी है और मेरी बीवी भी चुदने को तैयार है… ठीक से चोदना अपनी आयेश को… साली मस्त होकर चुदवायेगी अगर अपने लंड से चोदोगे इस रांड़ को… मैं तो पहले माला की चूत चाटूँगा… रामू ये बात सच है की दूसरे की बीवी ज्यादा मस्त लगती है..” अब्बू ने कहा तो माला ने अपनी जांघों को फैलाते हुए कहा..” अब्बू, मेरे अब्बू, तो देर किस बात की? आज की रात मैं तेरी बेटी और तू मेरा चोदु बाप और रामू अपनी आयेश का चोदु बेटा जो अपनी अम्मी को चोदेगा, साला मादरचोद और मेरा बाप अपनी बीवी को उसके अपने नौकर से चुदवायेगा.आयेश ने भी रामू को किस करते हुए कहा,’ इन बाप बेटी ने हम दोनो के लिए भी माँ बेटे का रोल तय कर रखा है… तो आज की रात रामू मुझे यानी अपनी अम्मी को चोदेगा और माला रंडी बन के अपने अब्बू से चुदवायेगी… क्यों ठीक है?” 

मोहसीन कन्फ्यूज़ होकर अपने माँ बाप के रूम का नज़ारा देख रहा था लेकिन उसका लंड बैठ नहीं रहा था. तभी उसने अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस किया. पलट कर देखा तो ज़ैनब दीदी खड़ी थी,” मोहसीन…टावल है…….ऊऊहह …ये क्या….है अल्लाह….अम्मी….अब्बू…..रामू……मोहसीन तुम ये देख रहे हो? तुझे शरम नहीं आती….छी…ये क्या सभी नंगे…है अल्लाह…रामू का कितना बड़ा है!!” लेकिन उसके भाई ने उत्तेजना में आकर अपनी बहन का मुहँ बंद कर दिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मोहसीन के हाथ अपनी दीदी के बोब्स पर कस गये और वो उनको मसलने लगा.” दीदी, अब मुझे अपने पर काबू नहीं है….अंदर देखो….अम्मी और रामू…अब्बू और माला…..मुझे अपनी दीदी चाहिए आज की रात….मेरे दिल में तूफान मचा है दीदी….मेरा साथ दोगी ना, दीदी?” 

ज़ैनब भी अब मोहसीन से चिपकने लगी क्यों की उसके तन बदन में भी वासना की आग दहक उठी थी. ज़ैनब अभी तक चुदी तो नहीं थी लेकिन उसकी दोस्ती कई मर्दों के साथ थी और वो कई बार उसकी चुचि मसलते थे, किस करते थे और यहाँ तक की चूत पर हाथ फेर देते थे।  

किसी ठीक जगह के ना होने के कारण वो अभी तक चुदी नही थी. लेकिन आज पार्टी में बियर पीकर उसकी वासना का कोई अंत ना रहा था. और फिर साथ वाले कमरे में उसकी अम्मी अपने  नौकर के साथ और अब्बू नौकरानी के साथ खुले आम चुदाई कर रहे देखकर ज़ैनब ने फ़ैसला कर लिया की अपना कुँवारापन आज की रात खत्म कर देगी. ” अल्लाह, मेरा बाप अपने से आदि  उम्र की औरत के साथ चुदाई कर रहा है एक ही बिस्तर में मेरी अम्मी छोटी जात वाले रामू का लंड चूस रही है!!! हे अल्लाह क्या मुझे लंड की ज़रूरत नहीं है? मैं इस आग में दहक रही चूत का क्या करूँ? काश रामू का लंड मुझे मिलता!!! लेकिन आज मैं बिना चुदवाए ना रहूंगी… मेरे खुदा अगर मुझे अपने भाई मोहसीन से भी चुदना पड़े तो चुद जाउंगी..!!!!” ज़ैनब सोच रही थी और सिसकती हुई अपनी चूत को मसल रही थी. उदर मोहसीन अपने दीदी की चुचि को ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. ” बोलो दीदी, क्या आज की रात आप मेरी बनोगी?  अगर आपने ना कर दी  तो मैं मर जाऊंगा… अब्बू माला को, रामू अम्मी को चोद रहे है, मेरा क्या कसूर है, दीदी?” 

ज़ैनब ने हाथ नीचे कर के अपने भाई का लंड पकड़ लिया और तड़पति आवाज़ में बोली,” मेरे भाई, मैं जानती हूँ की ये पाप है, लेकिन जिस्म पाप पुण्य नहीं देखता… हमारी अम्मी साली, उस  नौकर का लंड चूस रही है और हमारे अब्बू जान सब देख रहे है और नौकरानी की चूत चूस रहे है, ये क्या पाप नहीं है… अगर अल्लाह ताला ये सब देख रहा है तो हमारा मिलन क्यों नहीं हो सकता?  मोहसीन मेरे भाई तुम अपनी माँ को नौकर से चुदवाते देखना पसंद करोगे या अपने ज़ैनब दीदी के साथ ये सब करना चाहोगे?  मेरा बदन हवस की आग में जल रहा है! मैं चाहती हूँ की तुम मुझे उसी तरह चोद डालो जिस तरह साला रामू हमारी अम्मी को चोदता है…. चल इस दरवाज़े को बंद कर और मुझे अपने बिस्तर में ले चल मेरे भाई..”  

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खुले शब्दों में मिला इन्विटेशन मोहसीन के लिए खुदा का वरदान था. उसने ज़ैनब के सिर को पकड़ कर उसके भीगे हुए बाल खोल दिए और एक हाथ उसकी जांघों के बीच फुदकती हुई चूत पर रख दिया और बोला,” दीदी, मैं तो सोच रहा था की आप अपने भाई पर तरस ही नहीं करेंगी… आज की रात हम भाई बहन के लिए यादगार रात होगी क्यों की आज की रात मेरे लिए और आपके लिए सुहागरात से कम ना होगी.. मेरा लंड आपका और आपकी चूत मेरी होगी.. हमारे माँ बाप की चुदाई तो हम कभी भी देख लेंगे, लेकिन हमारी चुदाई का वक्त गुज़रा जा रहा है..” इसके साथ ही मोहसीन ने ज़ैनब को उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया।  

 
मोहसीन अपने कपड़े उतारने लगा और एक मिनिट में वो पूरी तरह नंगा हो गया. वो नहीं चाहता था की उसकी दीदी अपना मन ना बदल ले. काली काली झांठो में से उसका लंड आसमान की तरफ सिर उठा कर खड़ा था. जब उसने बिस्तर पर देखा तो हैरान रह गया. उसकी दीदी ने भी अपने जीन्स उतार दी थी और अपने शर्ट उतार रही थी. ज़ैनब दीदी अब केवल सफेद पेंटी और ब्रा में थी और बहुत कामुक लग रही थी. मोहसीन का लंड बेकाबू हो गया जब उसने अपने दीदी की आँखों में लाल डोरे देखे. ज़ैनब ने टाँगें चोडी कर रखी थी और उसकी चूत का हिस्सा भीग चुका था. ज़ैनब के घुँगराले बाल पानी की बूँदों से चमक रहे थे और उसको अपनी दीदी एक मस्त रांड़ जैसी लग रही थी जो अपने हाथ से अपनी चूत मल रही थी. मोहसीन को लगा की उसकी दीदी उसको अपनी चूत के लिए बुलावा दे रही है।  

 
मोहसीन एक पागल शेर की तरह बिस्तर की तरफ बढ़ा और जाते ही अपनी दीदी के होंठों को चूमते हुए उसकी पेंटी को नीचे सरकाने लगा और ज़ैनब अपने भाई से लिपटने लगी और उसके  लंड को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी,” म्‍म्म्ममममम….भाई तेरा तो बहुत बड़ा है…….इसको  मेरी चूत में घुसा दो…….बहुत तड़प रही है!!!” मोहसीन चाहता था पहले अपनी दीदी को नंगा करे, चूमे, चाटे, सहलाए, लंड को चुसवाए. वो उसकी चुचि को ज़ोर से मसल रहा था और उसके चूतड़ पर हाथ फेर रहा था दीदीमेरा लंड नहीं चुसोगी?” 

चूस देती हूँ भाई… मुझे भी तो इस लंड का स्वाद चखना है….अगर अम्मी रामू का काला लंड चूस सकती है तो मैं तेरा सुन्दर लंड क्यों ना चुसू..?” कहते ही उसने लंड मूह में डाल लिया. मोहसीन तो जन्नत में पहुँच गया. उसने लंड आगे पीछे करके अपनी बहन का मुहँ चोदना शुरू कर दिया.”म्‍म्म्मममम…आआआ….उूउउम्म्म्ममममममुझे बहुत स्वाद लग रहा है आपका लंड, तुम मेरे साथ 69 बना लो और मेरी चूत चाट लो और मुझे ये स्वादिष्ट लंड चूसने दोज़ैनब लंड मूह से बाहर निकाल कर बोली।  

 
मोहसीन ने अपनी दीदी की पेंटी नीचे सरका डाली और बिना बाल के चूत पर हाथ फेरा,’ मोहसीन….चाटो इसको….ये पिघल रही है..” और वो दीदी के ऊपर चढ़ कर उसकी चूत चाटने लगा और वो नीचे से आकर लंड चाटने लगी. ज़ैनब का गर्म चूत-रस उसके मुहँ में टपक रहा था. मोहसीन ने दीदी के नर्म चूतड़ पकड़ कर चूत चाटना जारी रखा जब की ज़ैनब उसके लंड और कभी उसके अंडकोष चाट रही थी।  

मोहसीन का लंड उसकी दीदी के थूक से भीग चुका था. फिर वो रुका और बोला,”दीदी अब मुझे चुदाई शुरू कर देनी चाहिए… ऐसा ना हो की लंड महाराज आपके मूह में ही उल्टी ना कर डालें… मेरा लंड तो बस आपकी चूत की गहराई में उतर जाना चाहता है..” ज़ैनब भी अब चुदसी हो चुकी थी और लंड का इंतज़ार नहीं कर सकती थी. मोहसीन ने उसे पीठ के बल लिटा दिया और उसकी टांगो को फैला दिया. ज़ैनब की उभरी हुई चुचि ऊपर नीचे हो रही थी. मोहसीन अपनी दीदी के ऊपर झुका और अपने खड़े लंड का सूपड़ा ज़ैनब की चूत के मुहँ पर टिकाते हुए बोला दीदी, क्या धकेल दूँ? अपनी दीदी की चूत को देख कर रहा नहीं जा रहा..” 

ज़ैनब बोली,” बहनचोद देर क्यों कर रहे हो?  मेरी चूत जल रही है और तुझे मज़ाक सूझ रहा है? क्या मैं तुझ से चुदाई के लिए विनती करूँ? अगर ऐसा है तो, प्लीज़ चोद डालो मुझे, मेरे भाई, डालो अपना लंड अपनी दीदी की चूत में… अब और मत तडपाओ, मोहसीन मेरे भाई…” 

ज़ैनब की इस मस्ती भरी आवाज़ सुनकर मोहसीन ने अपना सूपड़ा दीदी की गर्म चूत में धकेल दिया. ज़ैनब की चूत किसी आग की तरह दहक रही थी. भाई का लंड बहन की चूत में उतरता चला गया. ज़ैनब के मुख से एक कामुक सिसकारी निकल गयी,” ओह.. भाई, मर गयी मैं…..तेरा लंड मज़ेदार है मर गयीचोदते जाओ……..मसल डालो मेरी चूतअपनी बहन की आग बुझा दो बहनचोद….पूरा घुसेड दो अपना लंड!!!!” 

मोहसीन जोश में आकर ज़ोरदार टाप मारने लगा और पूरा लंड अपनी दीदी की चूत में डालने लगा. पहले तो ज़ैनब को दर्द हुवा लेकिन लंड ने रास्ता आसानी से बना लिया और वो अपने चूतड़ उठा कर भाई के धक्के का जवाब देने लगी. वो मोहसीन से लिपट रही थी और उसने अपनी टांगे अपने भाई की गांड पर लपेट रखी थी. मोहसीन लगातार धक्के मार रहा था और ज़ैनब उसको उत्साहित कर रही थी।  

ऊऊ.. बहनचोद चोदो मुझे भाई….चोदो भाई.. मुझ रंडी को चोदो.. बहुत आग लगी है मेरी चूत के अंदर”  मोहसीन का लंड उसकी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा था. वो उसकी चुचि को भींचने लगा और पूरी रफ़्तार से चोदने लगा।  

ज़ैनब के मुहँ से आवाज़ें आ रही थी ….ऊवहां..आह..आह..आह..आह”” दीदी आज तो सारी रात चूत मारूगा तुम्हारी….रामू अम्मी को चोद रहा है, अब्बू माला को और मैं तुझे चोदुंगा… अपनी दीदी को चोदुंगा..” 

भाई आआहह….चोद लो मुझे…..अपनी दीदी की चूत में डालो अपना लंड…. आ.. मोहसीन मेरे भाई…मुझे भी अम्मी की तरह चोद डालो… मेरी चूत अब तेरी चीज़ है.. जी भर के चोद….उई अम्मीबहनचोद गांड मत छेड़ ज़ैनब चीख पड़ी जब मोहसीन ने एक उंगली अपनी दीदी की गांड में धकेल दी।  

 
कुछ देर बाद मोहसीन ने अपनी दीदी की दोनो टांगो को अपने कंधे पर रख कर लंड को अपनी पोज़िशन लेकर एक धक्का लगाया और पूरा लंड चूत में घुसा दिया. ज़ैनब बस आआआआ.. हह.. कर के रह गयी. ज़ैनब ने आखें बंद कर ली और चुदाई का मज़ा लेने लगी. मोहसीन ने उसकी चुचियो को पकड कर बहुत तेज़ी से अपनी दीदी को चोदना शुरू कर दिया “ओह……. आआआ अया ऊऊऊऊऊओं ऊऊऊऊओ उम्म्म्ममममम” ज़ैनब ना जाने किस किस किस्म की आवाज़ें निकालने लगी और नीचे से कुल्ले उछाल उछाल कर चुदवाने लगी. मोहसीन ने धीरे से अपनी एक उंगली उसकी गांड मैं घुसा दी. नाआआअ………मादरचोद…मोहसीन….मत करो……मर गयी अम्मी…..आआआआआआआ हह आआआआआअऊऊऊऊऊऊओ बहनचोद………हह” की आवाज करने लगी.  

 
बेचारी ज़ैनब क्युकी अब उसकी दोहरी चुदाई हो रही थी. लंड पूरा अंदर घुसा हुआ था उसकी चूत के अंदर और गांड को उसके भाई की उंगली चोद रही थी. दोनो भाई बहन की साँसे बहुत तेज़ चल रही थी. कुछ देर के बाद मोहसीन का लंड छुटने के किनारे पर था और ज़ैनब की चूत भी पानी छोड़ने को थी. ज़ैनब का जिस्म अकड़ गया और दोनो ने तूफ़ानी चुदाई करनी शुरू कर दी।  

अहह दीदी……मैं गया…लंड झरा….ऊऊऊहह दीदी….मैं झर रहा हूँ…आपकी चूत में जन्नत है…..ऊऊओ दीदी मुझे कभी छोड़ मत देना…..मैं आपके बिना नहीं रह सकता… आपकी चूत में जन्नत है!!!!” मोहसीन कह रहा था और उसके लंड से पिचकारी छुट रही थी. उधर ज़ैनब भी चर्म सीमा पर थी और उसकी गांड मशीन की तरह उछल रही थी,’ ऊऊऊऊ …मोहसीन…. मेरे भाई…. फाड़ दे मेरी चूत…. ऊऊहह अम्म्मी… चुद गयी मैं आज…और ज़ोर से भाई…और ज़ोर से…  

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मेरे भाई!!!!” उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और दोनो भाई बहन आराम से एक दूसरे से लिपट कर लेटे रहे।  

अब कहानी समाप्त होती है… दोस्तों  

 
धन्यवाद । ।  

 

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