माँ और बहन की जरुरत 2

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प्रेषक : आमिर
दोस्तों आपने मेरी कहानी “माँ और बहन की जरुरत 1” पड़ी होगी. अब इस भाग में बताता हूँ की आगे क्या हुआ. . . एक रात जब मैं मम्मी को चोद रहा था तो मम्मी ने मुझसे पूछा, “आमिर बेटा एक बात तो  बता.”क्या मम्मी” बेटा अब शुमैला बड़ी हो रही है उसकी शादी करनी है. इस उम्र मैं

लड़कियों की शादी कर देनी चाहिये वरना अगर वो कुछ उल्टा सीधा कर ले तो बहुत बदनामी होती है. मम्मी आप सही कह रही हो. अब उसके लिये कोई लड़का देखना होगा. हाँ बेटा, अच्छा एक बात तो बता तुमको शुमैला कैसी लगती है? क्या मतलब मम्मी?  मतलब तुझे अच्छी लगती है तो इसका मतलब वो किसी और को भी अच्छी लगेगी और उसे कोई लड़का पसंद कर लेगा तो उसकी शादी कर देंगे. हाँ मम्मी शुमैला बहुत खूबसूरत है. तू उसे कभी कभी अजीब सी नज़रो से देखता है?  मैं अपनी चोरी पकड़े जाने पर घबरा कर बोला, नही नही मम्मी ऐसी बात नही है?” कल तो तू उसकी चूचियों को घूर रहा था. नही मम्मी. पगले मुझसे झूठ बोलता है. सच बता. मैं शर्माते हुये बोला, मम्मी कल वो बहुत अच्छी लग रही थी. कल वो छोटा सा कसा कुर्ता पहने थी.

जिसमें उसकी चूचियाँ बहुत अच्छी लग रही थी. तुझे पसंद है शुमैला की चूचियाँ? मैं चुप रहा तो मम्मी ने मेरे लंड को अपनी चूत से जकड़ कर कहा, “बताओ ना वो थोड़े ना सुन रही है?” हाँ मम्मी. उसकी चूचियों को कभी देखा है? नही मम्मी.”देखेगा?”कैसे?” पगले कोशिश किया कर उसे देखने की जब वो कपड़े बदले तब या जब वो नहाने जाये तब.””ठीक है मम्मी पर वो दरवाज़ा बंद करके सब करती है. हाँ पर तू जब भी घर पर रहे तब पजामा पहना करो और नीचे अंडरवेयर मत पहना कर. अपने लंड को पजामे मैं खड़ा कर उसे दिखाया करो. सोते समय मैं लंड को पजामे से बाहर निकाल कर रखना मैं उसको तुम्हारे रूम मैं झाड़ू लगाने भेजू तो उसे अपना लंड दिखाया करो और तुम अब उसकी चूचियों को घूरा करो और उसे छुने की कोशिश किया करो.

 

मैं मम्मी की बात सुन कर मस्त हो गया उसे तेज़ी से चोदने लगा. वो तेज़ी से चुदती हुई हाए हाए करते हुये बोली, हाँ बहन को देखने की बात सुन कर इतना मस्त हो गया की मम्मी की चूत की धज्जीयां उड़ा रहा है. फिर मेरी कमर को अपने पैरो से कस कर बोली, चोद अपनी मम्मी को हाअआआआ आज मुझे चोद कल से अपनी बहन पर लाइन मारो और उसे पटा कर चोदो. फिर 4-5 धक्के लगा कर मैं झड़ने लगा. झड़ने के बाद मैं मम्मी से चिपक कर बोला,  मम्मी शुमैला तो मेरी छोटी बहन है, भला मैं उसके साथ ऐसा कैसे….? जब तू अपनी माँ के साथ चुदाई कर सकता है तो अपनी बहन के साथ क्यों नही? मम्मी आपकी बात और है.”क्यों?” मम्मी आप पापा के साथ सब कर चुकी हैं और अब उनके ना रहने पर मैं तो उनकी कमी पूरी कर रहा हूँ. लेकिन शुमैला तो अभी नासमझ और अनजान है, यही कहना चाह रहा हूँ? मम्मी.  

बेटा अब तेरी बहन 18 की हो गई है. इस उम्र मैं लड़कियों को बहुत मस्ती आती है. आजकल वो कॉलेज भी जा रही है. मुझे लगता है की उसके कॉलेज के कुछ लड़के उसको फँसाने की कोशिश कर रहे हैं. पड़ोस के भी कुछ लड़के तेरी बहन पर नज़रे जमाये हैं. अगर तू उसे घर पर ही उसकी जवानी का मज़ा उसे दे देगा तो वो बाहर के लड़कों के चक्कर मैं नही पड़ेगी और अपनी बदनामी भी नही होगी. माँ आप सही कह रही हो मैं अपनी बहन को बाहर नही चुदने दूँगा. सच मम्मी शुमैला की बहुत मस्त चूचियाँ दिखती हैं. मम्मी अब तो उसे तैयार करो. करूँगी बेटा, मैं उसे भी यह सब धीरे धीरे समझा दूँगी. फिर अगले दिन जब मैं सुबह सुबह उठा तो देखा की वो मेरे रूम मैं झाड़ू लगा रही थी. मैं उसे देखने लगा. वो कसी हुई कमीज़ पहने थी और झुककर झाड़ू लगाने से उसकी लटक रही चूचियाँ हिलने से बहुत प्यारी लग रही थी. तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पा वो मूड गई और जल्दी से झाड़ू लगा कर चली गई.  

मैं उठा और फ्रेश होकर नाश्ता कर टी.वी देखने लगा. उस दिन छुटी थी इसलिये किसी को कही नही जाना था. मम्मी भी टी.वी देख रही थी. शुमैला भी आ गई और मैने उसे अपने पास बिठा लिया. मैं उसकी कसी कमीज़ से झाँक चूचियों को ही देख रहा था. मम्मी ने मुझे देखा तो चुपके से मुस्कुराते हुये इशारा करते कहा की ठीक जा रहे हो. शुमैला कभी कभी मुझे देखती तो अपनी चूचियों को घूरता पा वो सिमट जाती. आख़िर वो उठकर मम्मी के पास चली गई. मम्मी ने उसे अपने गले से लगाते हुये पूछा, क्या हुआ बेटी? कुछ नही मम्मी. वो बोली. तू यहाँ क्यों आ गई बेटी जा भाई के पास बेठ. मम्मी ववववाह भाईजान. वो फुसफुसाते हुये बोली. मम्मी भी उसी की तरह फुसफुसाई, क्या भाईजान. मम्मी भाईजान आज कुछ अजीब हरकत कर रहे हैं. वो धीरे से बोली तो मम्मी ने कहा, “क्या कर रहा तेरा भाई? मम्मी यहाँ से चलो तो बताऊ. मम्मी उसे ले कर अपने रूम की तरफ गई और मुझे पीछे आने का इशारा किया. मैं उन दोनो के रूम के अंदर जाते ही जल्दी से मम्मी के रूम के पास गया. मम्मी ने दरवाज़ा पूरा बंद नही किया था और पर्दे के पीछे छुपकर मैं दोनो को देखने लगा.  

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मम्मी ने शुमैला को अपनी गोद मैं बिठाया और बोली, क्या बात है बेटी जो तू मुझे यहाँ लाई है? मम्मी आज भाईजान मुझे अजीब सी नज़रों से देख रहे जैसे कॉलेज के..क्या पूरी बात बताऊ  शुमैला बेटी. मम्मी आज भाईजान मेरे इनको बहुत घूर रहे है, जैसे कॉलेज मैं लड़के घूरते हैं.” इनको. मम्मी ने उसकी चूचियों को पकड़ा तो वो शर्माते हुये बोली, “सच मम्मी. अरे बेटी अब तू जवान हो गई है और तेरी यह चूचियाँ बहुत प्यारी हो गई हैं इसीलिये कॉलेज मैं लड़के इनको घूरते हैं. तेरा भाई भी इसीलिये देख रहा होगा की उसकी बहन कितनी खूबसूरत है और उसकी चूचियाँ कितनी जवान हैं. मम्मी आप भी..वो शरमाई. अरे बेटी मुझसे क्या शर्म. बेटी कॉलेज के लड़कों के चक्कर मैं मत आना वरना बदनामी होगी. अगर तू अपनी जवानी का मज़ा लेना चाहती है तो मुझको बताना. 

मम्मी आप तो जाइये हटिये. अच्छा बेटी एक बात तो बता, जब भाईजान तेरी मस्त जवानीयों को घूरते हैं तो तुझे कैसा लगता है? मम्मी हटिये मैं जा रही हूँ. अरे पगली फिर शरमाई, चल बता कैसा लगता है जब तुम्हारे भाईजान इनको देखते हैं?  अच्छा तो लगता है पर..पर वर कुछ नही बेटी, जानती है बाहर के लड़के तेरे यह देखकर क्या सोचते हैं? क्या मम्मी?  यही की हाये तेरे दोनो अनार कितने कड़क और रसीले हैं. वो सब तेरे इन अनारो का रस पीना चाहते हैं. मम्मी चुप रहिये मुझे शर्म आती है. अरे बेटी यही एक बात है इनको लड़के के मुँह मैं देकर चूसने मैं बहुत मज़ा आता है. जानती हो लड़के इनको चूस कर बहुत मज़ा देते हैं. अगर एक बार कोई लड़का तेरे अनार चूस ले तो तेरा मन रोज़ रोज़ चूसाने को करेगा और अगर कोई तेरी नीचे वाली चूत को चाट कर तुझे चोद दे तब तू बिना लड़के के रह ही नही पायेगी. अब मैं जा रही हूँ मम्मी मुझे नही करवाना यह सब. हाँ बेटा कभी किसी बाहर के लड़के से कुछ भी नही करवाना वरना बहुत दर्द और बदनामी होती है. हाँ अगर तेरा मन हो तो मुझे बताना.”मम्मी..”अच्छा बेटी चल अब कुछ खाना खा लिया जाये तेरा भाई भूखा होगा. जा तू उससे पूछ क्या खायेगा, जो खाने को कहे बना देना. फिर मैं भाग कर टी.वी देखने आ गया.  

थोड़ी देर बाद शुमैला आई और मुझसे बोली, भाईजान. जो खाना हो बता दीजिये मैं बना देती हूँ.  मम्मी आराम कर रही हैं. मैं उसकी चूचियों को घूरते हुये अपने होठों पर जुबान फेरते हुये  बोला,  क्या क्या खिलाओगी? वो मेरी इस हरक़त से शरमाई और नज़रे झुका कर बोली, जो भी आप कहें. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाया और चूचियों को घूरता हुआ बोला, खाऊगा तो बहुत कुछ पर पहले इनका रस पीला दो. क्या भाईजान किसका रस? वो घबराते हुये बोली. मैं बात बदलता हुआ बोला, मेरा मतलब है पहले एक चाय ला दे फिर जो चाहे बना लो. वो चली गई. मैं उसको जाते देखता रहा. 5 मिनिट बाद वो चाय लेकर आई तो मैने उससे कहा अपने लिये नही लाई. मैं नही पीऊगी. पीओं ना लो इसी मैं पी लो. एक साथ पीने से आपस मैं प्यार बड़ता है. वो मेरी बात सुन कर शरमाई फिर कुछ सोच कर मेरे पास बैठ गई तो मैने कप उसके होठों से लगाया तो उसने एक सीप लिया फिर मैंने एक सीप लिया. इस तरह से पूरी चाय ख़त्म हुई तो वो बोली, अब खाने का इंतज़ाम करती हूँ. 

मैने उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुये कहा, अभी क्या जल्दी है थोड़ी देर रूको बहुत अच्छा प्रोग्राम आ रहा है देखो. मेरे खींचने पर वो मेरे उपर आ गिरी थी. वो हटने की कोशिश कर रही थी पर मैने उसे हटने नही दिया तो वो बोली, हाय भाईजान हटिये क्या कर रहे हैं? कुछ भी तो  नही टी.वी देखो मैं भी देखता हूँ. ठीक है पर छोड़िये तो ठीक से बैठकर देखूं. ठीक से बैठी हो, शुमैला मेरी छोटी बहन अपने बड़े भाई की गोद मैं बैठकर देखो ना टी.वी. वो चुप रही और हम टी.वी देखने लगे. थोड़ी देर बाद मैने उसके हाथो को अपने हाथो से इस तरह दबाया की उसकी कमीज़ सिकुड कर आगे को हुई और उसकी दोनो चूचियाँ दिखने लगी. उसकी नज़र अपनी चूचियों पर पड़ी तो वो जल्दी से मेरी गोद से ऊतर गई और तभी मम्मी ने उसे आवाज़ दी तो  वो उठकर चली गयी.  

मैं भी पहले की तरह पर्दे के पीछे छुप कर देखने लगा. वो अंदर गई तो मम्मी ने पूछा,  क्या हुआ बेटी आमिर ने बताया नही क्या खायेगा? वो मम्मी भाईजान ने.. क्या भाईजान ने, बताओ ना बेटी क्या किया तेरे भाई ने?  वो भाईजान ने मुझे अपनी गोद मैं बिठा लिया था और फिर ओर फिर.. और फिर क्या? और और कुछ नही. अरे अगर तेरे भाई ने तुझे अपनी गोद मै बिठा लिया तो क्या हुआ, आख़िर वो तेरा बड़ा भाई है. अच्छा यह बता उसने गोद मैं ही बिठाया था या कुछ और भी किया था? और तो कुछ नही मम्मी भाईजान ने फिर मेरे इन दोनो को देख लिया था. मुझे लग रहा है मेरे बेटे को अपनी बहन की दोनो रसीली चूचियाँ पसंद आ गई हैं तभी वो बार बार इनको देख रहा है. बेचारा मेरा बेटा, अपनी ही बहन की चूचियों को पसंद करता है. अगर बाहर की कोई लड़की होती तो देख लेता जी भर कर पर साथ में वो डरता होगा. अच्छा बेटी यह बता जब तुम्हारे भाईजान तेरी चूचियों को घूरता है तो तुमको कैसा लगता है? ज्जज्ज जी मम्मी वो लगता तो अच्छा है पर… पर क्या बेटी. अरे तुझे तो खुश होना चाहिये की तुम्हारा अपना भाई ही तुम्हारी चूचियों का दीवाना हो गया है.  

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अगर मैं तेरी जगह होती तो मैं तो बहाने बहाने से अपने भाई को दिखाती. “मम्मी.”हाँ बेटी सच कह रही हूँ. क्या तुझे अच्छा नही लगता की कोई तेरा दीवाना हो और हर वक़्त बस तेरे बारे मैं सोचे और तुझे देखना चाहे. तुझे चोदना चाहे. मम्मी आप भी. अरे बेटी कोई बात नही जा अपने भाई को बेचारे को दो चार बार अपनी दोनो मस्त जवानीयों की झलक दिखा दिया कर. वैसे उस बेचारे की ग़लती नही, तू है ही इतनी कड़क जवान की वो क्या करे. देख ना अपनी दोनो चूचियों को लग रहा है अभी कमीज़ फाड़कर बाहर आ जायेगी. जा तू भाई के पास जाकर टी.वी देख और बेचारे को अपनी झलक दे मैं खाने का इंतज़ांम करती हूँ. खाना तैयार होने पर में तुम दोनो को बुला लूँगी.” नेक्स्ट पार्ट नेक्स्ट टाइम आप को मेरी यह कहानी केसी लगी. आप मुझे जरुर बताये. 

धन्यवाद

 

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