माँ को चोदा मेरे पोपट ने

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प्रेषक : सोनू …

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम सोनू है और में आज अपनी एक सच्ची कहानी आप सभी को बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हुआ उसके बारे में.. यह उस वक़्त की बात है जब मुझे सेक्स के बारे में सब कुछ पता चल चुका था सेक्स क्या होता है और सेक्स कैसे किया जाता है? उसके बाद में कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढने लगा और मुझे सेक्स की पूरी जानकारी मिलने लगी में अब इस साईट पर हमेशा सेक्सी कहानियाँ पढ़ता हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है। फिर एक दिन मैंने भी अपनी एक सच्ची घटना इस पर लाने का निर्णय लिया और वो आज आपके सामने है। दोस्तों अब में आप सभी का और ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ। तो मैंने एक रात को अपनी मम्मी और पापा को सेक्स करते हुए देख लिया.. लेकिन उस वक्त वहाँ पर बहुत अंधेरा था और उस वजह से में कुछ खास नहीं देख सका.. लेकिन हाँ आवाज़ जरुर सुन सका था और तभी से में अपनी माँ को बुरी नज़र से देखने लगा और में हर रोज माँ के नाम की मुठ मारा करता था।

तभी एक दिन मम्मी, पापा का किसी बात को लेकर बहुत बड़ा झगड़ा हुआ और उस दिन से माँ मेरे साथ मेरे रूम में सोने लगी। तो में भी बहुत खुश था और फिर माँ मेरे पास में सो गई तभी रात की 2.30 बजे मेरी नींद खुल गई और मैंने माँ की तरफ देखा और अपने अरमानो पर काबू नहीं रख पाया क्योंकि जब मैंने देखा कि माँ सो रही है तब उनका गाऊन उनकी जांघ तक ऊपर चड़ा हुआ था। तो मैंने धीरे से माँ की जांघ पर हाथ रख दिया और तब तक मेरा लंड तो पूरी तरह से खड़ा हो गया था और में वैसे ही हाथ को कम से कम 15-20 मिनट तक घुमाता रहा और थोड़ी देर बाद थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए में अपने दूसरे हाथ से माँ के बूब्स को बहुत धीरे धीरे दबाने लगा.. लेकिन में बहुत घबरा रहा था और मेरी हालत बहुत पतली हो गई थी और मैंने कुछ देर बाद में खुद पर कंट्रोल किया और अपने लंड को समझाते हुए सो गया क्योंकि कहीं कोई समस्या खड़ी ना हो जाए इसलिए में ऐसा हर रोज करता था। फिर एक महिना बीत गया और मेरे पेपर भी खत्म हो गए और मेरे स्कूल की छुट्टियाँ भी लग चुकी थी और वो गर्मियों का मौसम था।

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तो कुछ दिन के बाद में और माँ हमारे गाँव चले गये और पापा और मेरी बहन कुछ दिनों के बाद में आने वाले थे.. हमारे गाँव में मेरे दादाजी और दादीजी रहते थे। तो हम उस दिन दोपहर में वहाँ पर पहुंच गये और सफर से बहुत थके हुए थे इसलिए हमने उस दिन सारा दिन सोकर निकाला और दूसरे दिन रात को माँ और में एक रूम में सोने के लिए चले गए। तभी माँ ने मुझसे पूछा कि क्यों तू मुझसे बिल्कुल भी प्यार नहीं करता ना? तो में चोंक गया और थोड़ा संभलते हुए कहा कि तूने मुझसे ऐसा क्यों पूछा? वो बोली कि इसलिए क्योंकि तू पहले जैसा अब मेरे पीछे माँ माँ करके नहीं आता। अब तू सिर्फ़ अपना वक़्त अपने दोस्तों के साथ बिताता है। तभी मैंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है माँ तू खुद अपने कामो में व्यस्त रहती है तो तुझे ना मेरे साथ बात करने की फ़ुर्सत रहती है और ना ही मुझे अपने गले से लगाने की। दोस्तों मैंने मौका देखकर चौका मारने का ट्राई किया और फिर माँ ने कहा कि तो अब आजा मेरे बेटा मेरी बाहों में आजा। तो मुझसे रहा नहीं गया और में भी झट से माँ के गले लग गया और तब मैंने माँ के बूब्स को महसूस किया कि वो कितने मुलायम है और कम से कम में माँ के साथ 5 मिनट तक लिपटा रहा और तब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था और माँ को भी ऐसा अहसास हुआ कि मेरा लंड खड़ा हो गया था। तब माँ ने सँभालते हुए मुझे अपने से आराम से दूर किया और कहा कि हम अब सो जाते है क्योंकि कल सुबह जल्दी भी उठाना है.. लेकिन मुझे तो अब सिर्फ़ माँ को चोदना था और कुछ देर बाद हम लेट गये.. लेकिन में सो नहीं पा रहा था। तो में उठकर बैठ गया और माँ के गाऊन को धीरे से ऊपर किया और अपना एक हाथ उनकी जांघो पर रगड़ने लगा.. तभी थोड़ी देर बाद मैंने उनकी कमर तक उनके गाऊन को उठा लिया और मेरे सामने मेरी माँ की सफेद रंग की पेंटी थी जो अंधेरे में चमक रही थी। फिर मैंने माँ की चूत पर धीरे धीरे अपनी दो उंगलिया घुमाई तो माँ की नींद खुलने लगी और मेरे हाथ घुमाने से उनके शरीर में हलचल होने लगी और में बहुत डर गया। तभी माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया और पूछने लगी कि यह क्या कर रहा था? तो में बहुत सहम गया.. लेकिन फिर भी थोड़ी बहुत हिम्मत करके मैंने अपने मुहं से आवाज़ निकाली और कहा कि में यह देखना चाहता था कि भगवान ने हमें सू सू करने के लिए पोपट दिया है.. लेकिन आप जैसी औरतों को क्या दिया है?

दोस्तों में जानबूझ कर अंजान बन रहा था.. लेकिन माँ को समझ में आ गया तो माँ ने कहा कि तुझे मुझसे पूछ लेना चाहिए था.. में तुझे खोलकर दिखा देती। तो में मन ही मन बहुत खुश हो गया और मैंने माँ से कहा कि अब दिखाओ ना प्लीज़ एक बार। फिर माँ ने हाँ बोला.. लेकिन मुझसे वादा लिया कि में यह बात कभी भी किसी को नहीं बताऊंगा और मैंने भी वादा किया। फिर माँ ने अपनी पेंटी को मेरे सामने बाहर निकाली और मेरे सामने लेट गई और में तो देखता ही रह गया क्योंकि मेरे पापा मेरी माँ की जिस चूत में अपना लंड डालते थे वो आज मेरे सामने थी और में बहुत ख़ुश सा पागल हो गया। तो मैंने माँ से कहा कि में क्या उसे छूकर चूम लूँ? तो माँ ने थोड़ा सोचा और हाँ बोली क्योंकि पिछले एक महीने से माँ ने पापा के साथ सेक्स नहीं किया था। फिर मैंने माँ के दोनों पैर फैला दिए और बीच में बैठकर अपनी जीभ से चाटना चालू किया और अब मेरा लंड खड़ा हो गया था.. माँ की चूत पर थोड़े बाल थे और मुझे उनकी रसभरी चूत को चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने अपनी जीभ को आगे पीछे करके माँ की चूत के दाने को बहुत चाटा और फिर मौका देखकर माँ की चूत में अपनी दो उंगलियां भी डाल दी। माँ के मुहं से सिसकियों की आवाज़ आने लगी आह्ह्ह्ह उईईई। फिर माँ ने कहा कि अब तुम भी मुझे अपना पोपट दिखाओ और माँ के कहते ही में मैंने झट से अपनी अंडरवियर उतारी और माँ के सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया। तो माँ मेरे लंड को देखकर बहुत हैरान हो गई क्योंकि मेरा लंड मेरे पापा जितना बड़ा था.. कम से कम 6 इंच का था। तो माँ ने मुझसे कहा कि क्या रे तेरा इतना बड़ा लंड है और तू मुझे बोलता है कि तेरा पोपट है और माँ ने यह बात कहकर मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और थोड़ी देर मुहं में लेने के बाद उसने कहा कि अब तेरा यह लंड तू मेरी चूत में डाल दे। तो में बहुत खुश हो गया और मैंने माँ से कहा कि माँ में पहली बार कर रहा हूँ तुम थोड़ा संभाल लेना। तो माँ ने कहा कि ठीक है तू चिंता मत कर.. लेकिन अब ज्यादा मत तड़पा मुझे तेरे पापा ने मुझे बहुत तड़पाया है। फिर मैंने अपना लंड माँ की चूत पर रखा और एक ज़ोर का धक्का मारा और फिर मेरा लंड चूत के अंदर फिसलता हुआ चला गया। तो माँ के मुहं से एक छोटी सी चीख निकली.. लेकिन मैंने जोश में उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। फिर मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड माँ की चूत में चला गया.. माँ कुछ देर चीखने के बाद बोल रही थी हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से अह्ह्ह उह्ह्ह माँ हाँ और ज़ोर से। तो में पूरे जोश से धक्के दे रहा था और उस बीच माँ ने उनका पानी छोड़ दिया और अब में भी झड़ने वाला था और मैंने माँ से पूछा कि क्या करूं कहाँ गिराऊँ? माँ में झड़ने वाला हूँ। तो माँ बोली कि अंदर ही झड़ जा मेरे लाल.. मैंने 10-15 ज़ोर के झटके मारे और अपना पूरा वीर्य माँ की चूत में डाल दिया और में वैसे ही थककर उनके ऊपर ही लेट गया। तो माँ ने कहा कि तू तो अपने पापा से भी बहुत अच्छी चुदाई करता है.. माँ ने मुझे एक किस किया और कहा कि आज से में ज्यादा से ज्यादा तेरे साथ ही सोऊँगी। फिर उस रात मैंने माँ को और एक बार और चोदा.. माँ के बदन में बहुत आग थी और जब तक पापा गाँव वापस नहीं आए तब तक में ही माँ का पति था और हर रात उनको चोदता और उन्होंने भी बहुत चुदवाया जैसे कि मेरी माँ हवस की पुजारी हो ।।

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धन्यवाद …

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