पड़ोसन की चूत को चमका दिया

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प्रेषक : देव …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम शंकर है और यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी है, जो मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना है और जिसको में आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी, वैसे में पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और ऐसा करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों में दिखने में ठीकठाक हूँ और बहुत गोरा भी हूँ। दोस्तों यह बात आज से करीब दो साल पहले की है, जब मेरी बिल्डिंग में जिसमें में खुद रहता था और उसी में एक बहुत सेक्सी आंटी रहती थी, उनका नाम कविता था, वो दिखने में बहुत ही हॉट थी और उसके फिगर का आकार 34-32-36 था और वो मेरे फ्लेट के पास में रहती थी और उनके पति एम.आर. थे तो इसलिए वो ज्यादातर अपने घर से बाहर ही रहते थे और कविता आंटी का एक बेटा भी था, शायद वो तीसरी क्लास में पढ़ता था।

दोस्तों कविता जब भी मुझे देखती थी तो स्माईल करती थी और में अपने फ्लेट में बिल्कुल अकेला रहता था तो वो कभी कभी मुझे अपने यहाँ पर खाना खाने के लिए बुला लेती थी और उनके कहने पर में उनके घर पर चला जाता था और फिर जब वो मुझे खाना देने के लिए मेरे सामने आकर नीचे झुकती थी तो उनके बूब्स मेरे सामने आकर लटक जाते थे और में उनके बूब्स को लगातार घूर घूरकर देखता था और बहुत मज़े लिया करता था। दोस्तों वो ज्यादातर बड़े गले की मेक्सी में ही रहती थी, जिसकी वजह से थोड़ा सा झुकने पर उनके बूब्स मेरे सामने लटक जाते थे और में हर दिन किसी ना किसी बहाने से उनके बूब्स को देखता था और उनके मस्त मज़े लेता था, में हर कभी उनके यहाँ पर चला जाता था और घूरकर उन्हें देखता था और में जब कभी भी उन्हें कहीं बाहर बाजार में कुछ लेने जाना होता था तो में उनके कहने पर उन्हें अपनी बाईक पर अपने साथ ले जाता था और फिर में जानबूझ कर ब्रेक मारता था और उनके पूरे मजे लेता था, लेकिन वो सब कुछ जानते हुए भी कभी भी मुझसे कुछ भी नहीं कहती थी, बस वो हमेशा मेरी तरफ मुस्कुराती रहती थी।

दोस्तों एक रात की बात है। उस दिन उनका पति घर पर नहीं था और उसके बेटे की तबियत अचानक से खराब हो गई तो उसने मुझसे बाजार से उसके लिए कुछ दवाई लाने के लिए बोला था। फिर में उनके कहने पर तुरंत दुकान पर चला गया और दवाई लेकर आ गया और फिर मैंने उनको वो दे दिया और अब मैंने उनसे कहा कि आंटी अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो में यहीं पर सो जाता हूँ, वैसे भी कल रविवार है और मुझे कल कॉलेज नहीं जाना है तो में यहीं पर रहता हूँ। फिर वो बोली कि मुझे इसमें कोई भी आपत्ति नहीं है, अगर ऐसा चाहते हो तो यहाँ पर रुक सकते हो और फिर में उनके मुहं से हाँ शब्द उनका जवाब सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुआ और अब में मन ही मन उसे आज रात को चोदने का विचार करने लगा। फिर में सबसे पहले बाथरूम में गया और मैंने उनके नाम की दो बार मुठ मारी और फिर में जानबूझ कर नाटक करते हुए वहीं पर ज़ोर से आह्ह्ह्ह की आवाज करते हुए गिर गया और ज़ोर से चिल्लाने लगा। मेरे गिरने चिल्लाने की आवाज को सुनकर कविता को लगा कि मुझे चोट लगी है तो वो दौड़ती हुई बाथरूम में आ गई। अब में जानबूझ कर उठने का नाटक करने लगा, लेकिन में उठ नहीं रहा था बस नाटक कर रहा था, जिसको देखकर उसे लगे कि मुझे बहुत ज़ोर से चोट लगी है। अब कविता अंदर आकर मुझे अपने गोरे मुलायम हाथों का सहारा देकर मुझे उठाकर अपने रूम में ले जा रही थी और में उसकी गरम गोरी मटकती हुई कमर पर अपना हाथ लगाकर मज़े ले रहा था और साथ साथ उसके मुलायम बड़े आकार के झूलते हुए बूब्स को छू रहा था और फिर छूकर मुझे महसूस हुआ कि उस दिन वो ब्रा नहीं पहनी हुई थी। फिर उन्होंने मुझे बेड पर लेटा दिया और फिर वो मुझसे पूछने कि बताओ तुम्हें कहाँ चोट लगी है? तो मैंने उफफ्फ्फ्फ़ आईईइ बहुत दर्द हो रहा है और में बोला कि कमर में और जाँघ में तो वो मुझसे बोली कि क्या में मालिश कर दूँ? फिर मैंने बोला कि हाँ कर दो, वो मेरे मुहं से हाँ शब्द सुनकर वहां से तेल लेने चली गई और फिर में तुरंत उठकर खड़ा हुआ और मैंने अपना लोवर उतार दिया और अपनी अंडरवियर को भी उतार दिया और अब में टावल लपेटकर उनके सामने लेट गया, तब तक कविता भी तेल लेकर आ गई थी और में दर्द का नाटक करके अपनी दोनों आखें बंद करके लेट गया और ऐसा नाटक करने लगा था, जैसे मुझे बहुत चोट लगी है और में नाटक करके धीरे धीरे दर्द से कराह रहा था।

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अब वो मुझसे कहने लगी कि सबसे पहले में कमर में तेल लगा देती हूँ तो में उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत उल्टा लेट गया और वो अब मेरी कमर पर तेल लगाने लगी थी। दोस्तों में उसके मुलायम मुलायम हाथों का वो स्पर्श जो अहसास में उस समय महसूस कर रहा था, आप लोगों को अपने किसी भी शब्द में नहीं बता सकता। फिर वो कुछ देर बाद मुझसे बोली कि तुम अब सीधा घूम जाओ, में अब तुम्हारी जाँघ में तेल लगा देती हूँ। फिर में जल्दी से सीधा हुआ और वो अब मेरा थोड़ा सा टावल हटाकर अपने गोरे मुलायम हाथ में बहुत सारा तेल लेकर लगाने लगी थी और कुछ देर के बाद वो अब धीरे धीरे तेल लगाते लगाते ऊपर की तरफ आने लगी थी और फिर उसने गलती से अचानक से मेरे खड़े लंड को छुआ और झटके से अपना हाथ तुरंत पीछे हटा लिया और ना जाने क्या सोचने लगे और हल्का सा मुस्कुराने लगी। फिर मैंने कविता से बोला कि हाँ मेरे उसमें भी चोट लगी है, प्लीज वहां पर भी थोड़ा सा तेल लगा दो ना। अब वो मुझसे कहने लगी कि तुमने तो मुझसे कहा था कि तुम्हारी जाँघ में और कमर में चोट लगी है। तब मैंने मुस्कुराते हुए बोला कि हाँ उसमें भी चोट लगी है और वो भी मेरी तरफ देखकर हंसने लगी और अब वो टावल के अंदर से ही अपना हाथ डालकर तेल लगाने लगी और कुछ ही देर में मेरा लंड तनकर खड़ा होकर तंबू बन चुका था, जिसको उसने भी महसूस कर लिया था। तभी मैंने अचानक से अपना टावल खोल दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड अब बाहर आकर खड़ा हो गया तो वो मेरे खड़े फनफनाते हुए लंड को देखकर एकदम से चकित हो गई, लेकिन फिर भी अपनी फटी हुई आखों से मेरे लंड को देखती रही। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों अब मैंने सही मौका देखकर धीरे से उसकी मेक्सी के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और फिर उसका बूब्स दबाने लगा और वो मुझसे बिना कुछ कहे अपनी आखों को बंद करके मेरे साथ मज़ा लेने लगी। फिर मैंने उसकी मेक्सी को पूरा उतार दिया और अब में कविता को किस करने लगा और वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी थी, वो अब मेरे सामने पूरी नंगी हो चुकी थी और बिल्कुल काम की देवी लग रही थी, वो ऊपर से लेकर नीचे तक बहुत सुंदर थी। फिर मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर नीचे लेटा दिया और उसकी चूत को कुछ देर सहलाने के बाद अब मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाकर गोरी, चिकनी, गीली चूत को हल्के हल्के चूमना और उसके बाद चाटना शुरू कर दिया, वो तो जैसे कि बिल्कुल पागल ही हो गई थी, वो पूरे जोश में आकर सिसकियाँ लेते हुए मेरे सर को अपनी चूत के मुहं पर पूरे जोश से दबाने लगी थी, मुझे अपनी चूत में घुसा रही थी, वो अपने चूतड़ को हवा में उठाकर मुझसे और अंदर तक अपनी जीभ को डालकर चूसने के लिए कहने लगी, उफ्फ्फ्फ़ हाँ थोड़ा सा और अंदर घुसा उईईईईइ हाँ डाल दे पूरा अंदर आअह्ह्ह्ह वाह मज़ा आ गया और में अब बहुत मज़े लेकर उसकी चूत को चूस रहा था और फिर मैंने महसूस किया कि वो पांच मिनट के बाद झड़ गई, जिसकी वजह से मेरा पूरा उसके गरम लावे से भर गया और में उसका सारा स्पर्म पी गया और चाट चाटकर मैंने उसकी चूत को दोबारा चमका दिया। फिर कुछ देर बाद मैंने उससे कहा कि अब तुम मेरा लंड अपने मुहं में लो तो दोस्तों वो तो झट से मान गई, जिसकी वजह से में तो एकदम चकित हो गया कि वो इतना जल्दी कैसे मान गयी? शायद वो खुद भी मेरा लंड अपने मुहं में लेकर उसके मज़े लेना चाहती थी और फिर वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर बहुत मज़े से लोलीपोप की तरह चूसने लगी और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था, क्योंकि वो किसी अनुभवी की तरह बहुत आराम से पूरा अंदर बाहर करते हुए लंड को चूस रही थी, लेकिन थोड़ी ही देर के बाद में भी उसके मुहं में झड़ गया और वो भी मेरा पूरा वीर्य पी गयी।

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फिर भी कविता ने मेरा लंड चूसना बंद नहीं किया। उसके कुछ देर की मेहनत के बाद मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो चुका था और अब उसने मुझसे कहा कि प्लीज अब तुम मुझे जल्दी से चोद दो, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा, प्लीज अब तुम मेरी प्यास को बुझा दो और मुझे शांत कर दो प्लीज। फिर मैंने उसे ज़ोर से धक्का देकर बेड पर पटक दिया और उसके दोनों पैरों को उठाकर अपना लंड चूत के मुहं पर सेट करके मैंने एक ही झटके में अपना पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से वो बहुत ज़ोर से चिल्ला उठी, आह्ह्ह्हह आईईईईइ मार डाला उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्ईईईईईईईइ प्लीज थोड़ा धीरे करो। अब में बिना सुने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा था और में पूरे जोश में था और अब उसकी सिसकियों की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी, वो उफ्फ्फ्फ़ आईईईईई मर गई आह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे करो, में क्या कहीं भागी जा रही हूँ, आह्ह्ह्हह्ह और वो मुझसे कहने लगी कि में यहीं रहूंगी, प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो, आह्ह्हह्ह नहीं तो शोर सुनकर मेरा बेटा उठ जाएगा।

फिर में अब थोड़ा आराम आराम से धक्के देकर चोदने लगा था, में अब अपना लंड पूरा बाहर निकाल देता और फिर एक झटके में पूरा अंदर डाल देता, मेरे उस जोरदार धक्के से वो पूरी तरह से हिल जाती और ठप ठप हमारे दोनों के नंगे गरम बदन के टकराने की आवाज आने लगती। फिर कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने उससे बोला कि अब हम पोज़िशन बदलकर चुदाई करते है और मैंने अपने लंड को तुरंत खींचकर बाहर कर लिया। उसके बाद मैंने उसे डॉगी स्टाईल में बैठने के लिए कहा और उसने तुरंत वैसा ही किया। अब वो मेरे सामने डॉगी की तरह बैठ गई और मैंने उसके पीछे खड़े होकर अपने लंड को चूत के मुहं पर सेट किया और एक ही जोरदार धक्का देकर मैंने अपना पूरा लंड चूत में डाल दिया और फिर में उसको ताबड़तोड़ धक्के देकर चोदने लगा था और में बीच बीच में अपना पूरा लंड बाहर निकालकर दोबारा एक ज़ोर का झटका देकर पूरा अंदर डाल देता, जिसकी वजह से वो पूरा हिल जाती और चिल्ला उठती, आआअहह आईईईईइ और फिर वो मेरा नाम लेने लगी और मुझसे कहने लगी उफ्फ्फ हाँ शंकर और ज़ोर से धक्का देकर चोदो मुझे उफफ्फ्फ्फ़ हाँ आज तुम मुझे अपनी रंडी बना दो हाँ और ज़ोर से चोदो, आह्ह्ह्ह हाँ खून निकाल दो मेरी चूत से, मेरी चूत को पूरी तरह से संतुष्ट कर दो, आईईईईइ हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे उफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया, में बहुत समय से प्यासी हूँ, तुम आज मेरी प्यास को बुझा दो। दोस्तों तब तक वो दो बार झड़ चुकी थी और वो मेरा नाम ले रही थी, जिसकी वजह से मुझे और भी जोश आ रहा था। अब में धीरे धीरे अपनी स्पीड को बढ़ा रहा था और फिर में कुछ देर और धक्के देने के बाद उसकी चूत में ही झड़ गया। कुछ धक्के देने के बाद में थककर उसके ऊपर ही गिर गया और फिर हम दोनों वैसे ही लेटे रहे। फिर उसके थोड़ी ही देर बाद वो मेरे लंड से एक बार फिर से खेलने लगी थी, वो मेरे लंड को हिलाने सहलाने लगी थी, जिसकी वजह से मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया और दोबारा चुदाई करने के लिए एकदम तैयार खड़ा था। दोस्तों यह थी मेरी चुदाई की कहानी अपनी पड़ोसन के साथ जिसमें मैंने उसके साथ मिलकर बहुत मज़े किए और अपनी चुदाई से उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया और उसको बहुत जमकर चोदा ।।

धन्यवाद …

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