ऋतु चाची बनी कोठे की सस्ती रंडी 1

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प्रेषक : राजेश

हाय! सभी लंड वालो और चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम मैं इस पर नया नहीं हूँ मगर  यह मेरी पहली स्टोरी है बहुत दिनों से स्टोरी पढ़ रहा हूँ और हिला रहा हूँ ऐसा एक दिन भी नहीं होता जब इस पर लोगो ने हिलाया नहीं हो बड़ी ही मस्त वेबसाइट है और मस्त कहानियाँ है अब बकवास बन्द करके कहानी पर आते है अपनी पहली कहानी में मैं आपको अपने घर ले जाता हूँ और अपनी रांड़ माल ऋतु चाची से मिलवाता हूँ ऐसा कोई लंड ना होगा जो इस छिनाल को चोदना ना चाहे साली रांड़ गजब की कातिल माल है ऋतु चाची की उम्र लगभग 35 साल की होगी धमाका है ऋतु के दो बच्चे है.

मैं 8 वी क्लास में था जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई और ऋतु हमारे घर पर आई मगर चाचा का कहीं बाहर अफेयर चल रहा था और उन्होंने घर पर पड़ी इस रांड़ को प्यासा ही छोड़ के रखा था जल्द ही मेरी चाची जी के साथ काफ़ी बनने लगी और हम काफ़ी बाते करने लगे पर अभी तक मेरे मन में उसके लिये कोई खराब ख्याल नहीं थे एक बार मेरा एक दोस्त अर्पित आया हुआ था और उसने जब ऋतु चाची को देखा तो साला पागल हो गया मेरा काफ़ी अच्छा दोस्त था तो इसलिये हम काफ़ी खुले हुये थे उसने मेरे को बोला की यार राजेश क्या जबरदस्त माल है बे तेरी चाची साली रांड़ को पटक पटक कर चोदने में बहुत मज़ा आयेगा.

उस समय में क्लास 10 वी में था मैं और नया नया चूत का शौक चड़ा हुआ था अर्पित की बात सुनकर मेरा भी मन पलट गया और मैं भी ऋतु को अब अपनी चाची की तरह नहीं बल्कि एक  रांड़ की तरह देखने लगा साली रंडी जब किचन में काम करती थी तो पसीने के कारण उसके ब्लाउज पर लाइन बन जाती साली छिनाल की गठीली जवानी देख कर मेरा लंड तन जाता था मैने उसकी पेंटी और ब्रा चुराना शुरू कर दिया था और चाची जी की फोटो भी खीचता था रात को उनकी फोटो देख कर उनकी ब्रा और पेंटी में मूठ मारता था और सुबह उनकी अलमारी में रख देता था

मेरे लंड के पानी से भरी हुई पेंटी और ब्रा पहन के वो रंडी घूमती थी तो मेरा लंड पागल हो जाता था और मन करता था की वहीं पर लेटा कर साली की चूत मैं अपना लंड पेल पेल के रुला दूँ हरामी को ऐसा काफ़ी दिन तक चलता रहा और मैं और अर्पित उसके नाम की मूठ मारते रहे हम चाची के साथ घूमने भी जाने लगे हम मूवी शॉपिंग और कई बार लंच पर जाते थे अब हम ऋतु चाची से काफ़ी खुल गये थे मगर हमें समझ में नहीं आ रहा था की उसकी चूत तक कैसे पहुँचे अपनी इच्छा पूरी करने के लिये हम रंडियों के पास जाने लगे स्कूल के बाद हम दोनो कोठे पर जाकर रंडी बजाते थे.

बहुत ही जल्द हमारी दोस्ती अनवर नाम के एक भडवे से हो गयी अब तक हम क्लास 12 वी  मैं पहुँच गये थे और ऋतु चाची को एक बेटा भी हो गया था बड़े प्रेशर के बाद घरवालो के दवाब में आकर चाचा ने उसको बच्चे के लिये चोद तो दिया मगर साथ ही साथ उसकी चूत में आग भी लगा दी थी माँ बनने के बाद उसके बोबे और गांड और फैल गयी थी अब साली रांड़ को देख कर हम लोगों से रहा नहीं जाता था एक दिन अर्पित बोला : यार राजेश साले तू कब तक अपने घर का माल सड़ने देगा और रंडिया बजायेगा क्या जिंदगी भर तू अपनी रांड़ चाची की पेंटी में मूठ मारेगा अब तो कुछ करना मैने बोला : भाई अर्पित उस रांड़ को बजाना तो मेरे को भी है अब मेरे से भी नहीं रहा जाता तू ही कोई तरकीब बताना फिर अचानक से अर्पित ने बोला : क्यों ना हम अनवर से मदद माँगे वो साला लड़कियों को पटाने में माहिर है वो ज़रूर कोई रास्ता निकाल लेगा.

उसकी बात मेरे को समझ में आ गयी बात सच ही थी फिर हमने सोचा की क्लास 12 वी के एग्जाम के बाद यह वाला कार्यक्रम पूरा करेंगे एग्जाम के बाद मैं अर्पित और अनवर एक घंटे से बार मैं बैठ कर दारू पी रहे थे तभी अर्पित ने बोला : यार अनवर भाई आपसे थोड़ी सी मदद चाहिये बहुत ही सीक्रेट और जरुरी बात है अनवर : हाँ बोलो क्या हो गया तुमको साला इतना क्या जरुरी काम है हमने अनवर भाई को ऋतु चाची के बारे में बताया और उसकी फोटो भी दिखाई देखते ही अनवर बोला सालो तुम लोगों ने मेरे को इस रांड़ के बारे में पहले क्यों नहीं बताया यह तो साली मस्त छिनाल माल है मस्त पटाखा है अनवर भाई बोला : देखो लडको तुम्हारी चाची में दम है साली मस्त है मैं तुम लोगों की मदद कर सकता हूँ मगर एक शर्त है

मैं इस पटाखे को पहले में बुझाऊगां इसकी चूत बजाऊगां बाद में तुम्हे भी पक्का मौका मिलेगा और राजेश तुम बुरा मत मानना मैं इस रांड़ से धंधा भी करवाऊगां आज कल ऐसी घरेलू रखेलो की डिमाण्ड बहुत है मार्केट में बोलो डील मंजूर है अर्पित और मैं एक दूसरे को देखते रह गये और फिर हमने कहा मंजूर है उसके बाद अनवर भी चाची जी को पटाने का प्लान बनाने लगा अनवर भाई ने हमको कहा की हम लोग ऋतु चाची को एक बार मूवी के लिये लेकर आये मूवी के बाद अनवर भाई हम लोगों से मिले हमने उनको चाची जी से परिचय करवाया और कहाँ की यह हमारे अग्रेजी के टीचर है.

मूवी के बाद बात होते होते हम दोनो ने कहा की हमें आज बहुत ही जरुरी काम है और हम चले गये चाची जी और अनवर भाई शॉपिंग कर रहे थे अनवर भाई कोई 6 इंच 5 फुट के होंगे और उनकी तगड़ी बॉडी भी थी देखने में एकदम पहलवान चाची जी जल्द ही उनसे घुल मिल गयी शॉपिंग के बाद लंच करते हुये अनवर भाई ने चाची के खाने में नींद की गोली डाल दी जैसे ही गोली असर करने लगी अनवर ने तुरंत चाची को गाड़ी में डाल के अपने कोठे पर लेकर  आया हम भी उसके साथ आ गये कोठे पर जाकर अनवर भाई ने हमको एक केमरा दिया और वीडियो बनाने को कहाँ अनवर भाई बिस्तर पर शेर की तरह कूदे और चाची जी की चुचियों को मसलने लगे साली क्या मस्त माल है बे तेरी रखैल चाची इसकी तो मैं आज माँ चोद दूँगा बहुत दिन बाद ऐसा तगड़ा माल मिला है.

मैने बोला चोद दो अनवर भाई चोद दो मेरी चाची को इसकी चूत में बहुत खुजली है मिटा दो आज इसकी आग साली के बदन ने हमारी भी जवानी को परेशान कर रखा है मूठ मार मार के थक गये हैं अब आज तो इस रांड़ को अपनी रखैल बना दो अब अनवर भाई जल्दी से दारू के दो पेक लगाते हुये चाची जी की चूचि को मसलने लगे उसने चाची की लाल रंग की साड़ी को उतार के साइड पर फेक दिया और चाची के उपर बैठ के उनके डीप क्लीवेज को चाटने लगा धीरे धीरे ऋतु चाची को होश आने लगा था और वो भी गर्म गर्म सिसकियाँ भरने लगी थी अनवर भाई ने ऋतु चाची के ब्लाउज और ब्रा को खोल के फेक दिया और चाची जी के बोबो पर  अपना मुँह लगा कर पागल कुत्तों की तरह चूसने और चाटने लगे एक हाथ से एक बोबो को मसलते हुये वो दूसरे बोबे को चूस रहा था ऋतु चाची काम अग्नि मैं बहकते हुये तड़पने लगी और आहें भरने लगी मैं और अर्पित तो वीडियो बनाने में लगे हुये थे मुझे अपने सपनो की रांड़ ऋतु चाची को चूदते हुये देख कर बहुत मज़ा आ रहा था.

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चाची के बोबो को लाल करने के बाद अनवर भाई ऋतु चाची के होंठो को अपने दातों से चबाते हुये उनकी जीभ को चूसने लगे ऐसा स्मूच मैने कभी नहीं देखा था मुझे डर लगने लगा की कहीं चाची की साँस ना रुक जाये और वो मर ना जाये अनवर भाई को रोकना अब मुमकिन ना था हम चाह कर भी ऋतु चाची को चोद नहीं सकते थे अनवर भाई अपनी हर रंडी को पहले खुद चखते थे बाद में अपने चमचो और कुत्तों को देते थे आज तो वो चाची को अपने लंड की रानी बना कर ही रहने वाले थे अपने स्मूच करने के बाद अनवर भाई ने चाची के पेटिकोट को उपर करके उनकी टाँगों से खेलना शुरू कर दिया.

इतने में ही चाची को अचानक से पूरा होश आ गया था मेरी और अर्पित की तो फट ही गयी थी ऋतु चाची ने अनवर भाई को धक्का दिया और वो पीछे हट गये गुस्से में आकर अनवर भाई ने ऋतु चाची को दो कड़क थप्पड़ लगाये और बोला : अपनी औकात में रहा कर साली रंडी तेरे को मालूम नहीं है हरामी तू किसके कोठे पर है ज़्यादा चू चा की ना तो तेरी बॉडी भी नहीं मिलेगी देख तेरा भतीजा तेरे को मेरे पास लाया है अब यह वीडियो बना रहा है शांति से यहाँ का माहौल गर्म कर नहीं तो पूरा देश तेरी जवानी से अपना बिस्तर गर्म करेगा बेच दूँगा में यह वीडियो समझी ऋतु चाची डर गयी और मेरे को बोली की राजेश तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ मैने बोला चुप बे साली दो टके की छिनाल तेरे कारण हम दोनो दोस्त रंडी चोद बन गये अब तू भी रंडी बन कर चुद सबसे अर्पित बोला : क्यों चाची जी बहुत गर्मी है ना आपकी जवानी में अब बेचो अपनी जवानी को इस कोठे पर यहाँ तो आपको रोज नये नये लंड मिलेंगे अपनी चूत की प्यास मिटाने को यह सब सुनके ऋतु चाची रोने लगी.

तब अनवर भाई ने उनको अपनी बाहों में भर के बोला ऋतु डार्लिंग क्यों रो रही हो देखो हम सब के साथ मस्ती करो और इन्जॉय करो यहा रोने धोने से क्या होगा तेरा रेट भी में ही रखूँगा तू जैसे मर्द के साथ सोना चाहोगी वैसा ही लाउगां टेन्शन मत लो अब यहाँ से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है यह बोलते बोलते उन्होने चाची का पेटिकोट खोल दिया और लाल रंग की उनकी पेंटी के उपर से चाची जी की चूत पर उंगली घूमना शुरू कर दिया चाची सारे रास्ते बंद होता देख धीरे धीरे मस्त होने लगी और अनवर भाई के सीने में लिपटने लगी और उनकी छाती चूमने लगी अनवर भाई ने बोला अब बनी ना तू अनवर की रांड़ आ जानेमन तेरे को अब जन्नत दिखाता हूँ यह कह के उन्होने चाची का हाथ अपने पजामे पर रखा.

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चाची ने बोला अनवर मियाँ यह क्या है अनवर भाई ने बोला जानेमन यह मेरा लंड है और तुम्हारा खिलोना खेलो इसके साथ ऋतु चाची जी ने अनवर भाई का पाजामा उतारा और उनकी चड्डी भी उतार दी और एक सस्ती रंडी की तरह अनवर भाई का लंड हिलाने लगी और उससे खेलने लगी अनवर भाई : और हिला मेरे लंड को रंडी और ज़ोर से हिला यह तेरे नामर्द भडवे पति का लंड नहीं है एक मर्द का लंड है चूस इसको साली हरामी छिनाल ऋतु चाची : अरे इतना भी मत जोश दिखाओ अनवर मियाँ मेरी तो किस्मत फूट गयी थी उस दिन जिस दिन मैने इस हरामी के नपुंसक चाचा से शादी की थी साला इनका खानदान ही नामर्दों से भरा है इसको और इसके भडवे दोस्त को इतनी लिफ्ट दी मैने सालों में मुझे एक बार चोदने का दम भी ना था आज पहली बार एक असली मर्द मिला है दिखा दो अपनी सारी मर्दानगी यह कह के ऋतु चाची जी अनवर भाई का 7 इंच बड़ा मोटे लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी अनवर भाई की आहें निकल गयी.

अनवर भाई : साली तेरे से भारी रंडी नहीं देखी है अब तक मैने क्या चूसती है अन्दर ले पूरा इसको मूँह में खा जा इसको आज तेरी चिकनी चूत को मेरा बड़ा लंड फाड़ देगा ऋतु चाची : हाँ मेरे राजा ऋतु चाची को पता नहीं क्या हो गया था अपनी सारी शर्म खोने के बाद उसमे और किसी भी और रंडी में अब कोई फर्क नहीं रह गया था.

अनवर भाई : आआहह और चूस्स्स और ज़ोर से…. साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू आआहह ऋतु चाची : आ रहा है ना मज़ा….अनवर भाई : हाँ रानी हाँ….अनवर भाई चाची जी की चड्डी उतारने लगे और चाची को बिल्कुल नंगा कर दिया वो चाची जी की चूत में उंगली करने लगे.

ऋतु चाची : आअहह धीरे से दर्द होता है.

अनवर भाई : दर्द में ही तो मज़ा है जानेमन.

ऋतु चाची : तेरी उंगली ने मेरा हाल यह कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल ही कर देगा.

अनवर भाई : आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहाँ है चूस इसको ज़ोर से.

अब अनवर भाई ने चाची को बिस्तर पर लेटा दिया और 69 पोज़िशन में जा कर उनकी चूत  को चाटने लगे और अपना लंड ऋतु चाची जी के मूँह में डाल दिया अपनी एक उंगली उन्होने चाची जी की गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी चाची जी की हालत ख़राब हो गयी थी ऋतु चाची : आआहह…. हाय मेरी जवानी….साली बेकार ही हो जाती… अगर आज आपका यह लंड ना मिलता और ज़ोर से घुसाओ उंगली फाड़ डालो मेरी गांड को अनवर भाई : हमारे और इस कोठे के होते हुये तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी तेरी इस चूत को तो में चूस चूस के बेहाल कर दूँगा और रही तेरी गांड वो तो मैं मारूँगा ही साली छिनाल बड़ा ही मस्त आइटम है तू.

साली कहाँ छुपी थी इतने दिनो से ऋतु चाची : आअहह मत रूको अब आअहह….आआआआहहाई यह क्या हो रहा है मुझे…. आआहह….अनवर भाई ने अपनी स्पीड और बड़ा दी और वो भी चाची की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया अनवर भाई की उंगलियाँ चाची की गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर भाई चाची की गांड पर थप्पड़ ही थप्पड़ लगाये जा रहे थे अनवर भाई : और ले रंडी… आज निकालता हूँ तेरी मस्ती साली एक नंबर की रांड़ है तू ऋतु चाची : आअहह धीरे से भगवान के लिये… बहुत दर्द हो रहा है.

अनवर भाई : इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाकर अपने पति जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी यहा तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी… तेरा भगवान भी नहीं…ऋतु चाची : आआहह….हाई….. थोड़े से तो प्यार से करो ना राजा..मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूँ…अनवर भाई : हाँ हाँ… साली भागेगी कहाँ तू तू अब अनवर भाई की रखैल है समझी और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है यह मुझे बहुत अच्छे से आता है भूल जा अब सब कुछ आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूँगा समझी… बोल… समझी या नहीं..ऋतु चाची : समझ गयी सब समझ गयी…आआहह… आअहह हाईई भगवान मेरी चूत…. आआहहहहहह और तेज और…..यह….. हाँ हाँ बस ऐसे ही…. हाइईइ आअहह….. आआहहहहा चाची जी ज़ोर से चिल्लाते हुये ठंडी हो गयी अनवर भाई का लंड अपने मुँह से निकाल के छोड़ दिया और अपने पहले मजे में ही पसीने पसीने हो गयी अनवर भाई : क्यों रंडी साली बस हो गयी तू ठंडी मेरे लंड को उकसाती है तू यह ले साली छिनाल अनवर भाई के थप्पड़ से चाची जी सहम गयी मेरी और अर्पित की हालत ख़राब हो चुकी थी हम अपना लंड हिलाते हिलाते दो बार अपना माल छोड़ चुके थे.

दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में ……..

धन्यवाद …

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