सरपंच की बेटी के साथ सुहागरात

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प्रेषक : अभिषेक …

हैल्लो दोस्तों, ये बात आज से कोई 2 महीने पहले की है, में अपने ऑफीस के काम से एक गाँव में गया हुआ था। वहाँ पर मुझको उस गाँव के सरपंच से मिलना था। फिर जब में उस सरपंच के घर गया और दरवाज़ा खटखटाया तो एक कोई 25 साल की बहुत ही खूबसूरत सी औरत बाहर निकली तो में उसको देखता ही रह गया। उसकी हाईट यही कोई 5 फुट 6 इंच थी, गोरा रंग, उसने एक अच्छी सी ब्लू साड़ी पहनी हुई थी। अब में उसको देखता ही रह गया था। फिर मैंने उसको बताया कि में सरपंच से मिलना चाहता हूँ। उसने मुझको अंदर आने को कहा और अंदर एक रूम में बैठाया और बोली कि आप यहाँ बैठिए, पापा अभी आते है। तब में समझ गया कि ये सरपंच की बेटी है। फिर थोड़ी देर में वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मुझको पानी देकर चली गयी। फिर कुछ देर के बाद सरपंच मेरे रूम में आया और मैंने उसको बताया कि में यहाँ क्यों आया हूँ? और फिर काफ़ी देर तक हमारी बात चलती रही, क्योंकि हमारी कंपनी उस गाँव में एक प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती थी, जिसके लिए हमको सरपंच से बात करनी थी।

फिर सरपंच मेरी बात से बहुत खुश हुआ, क्योंकि उस प्रॉजेक्ट से उसके गाँव का बहुत विकास हो जाएगा और उस विकास का पूरा क्रेडिट उस सरपंच को मिलने वाला था, इसलिए सरपंच मुझसे बोला कि आपको जो भी मदद चाहिए होगी, में तुरंत करूँगा। तभी में सरपंच से बोला कि इस प्रॉजेक्ट के सिलसिले में मुझको कुछ दिन इस गाँव में रहना पड़ेगा, इसलिए मेरे लिए एक कमरे का इंतजाम करो और साथ में कोई आदमी जो मेरे लिए खाना वगैराह बना सके, मेरे कपड़े धो सके। तब सरपंच मुझसे बोला कि मेरा घर बहुत बड़ा है, आप इसी में रह लीजिए, आपको कोई परेशानी नहीं होगी। तब मैंने उसको मना किया कि मुझको कई बार लेट नाईट भी बाहर जाना पड़ेगा और मुझको प्रॉजेक्ट के सिलसिले में कई लोगों को बुलाना भी पड़ेगा, इसलिए मुझको कोई अलग मकान का इंतजाम करके दो।

तब वो बोला कि मेरा एक मकान गाँव से बाहर खेत के पास बना हुआ है, आप देख लीजिए अगर आपको पसंद हो तो वही रह लीजिए। मैंने कहा कि ठीक है और फिर में सरपंच के साथ उसका मकान देखने चला गया। तो वो मुझको पसंद आ गया, क्योंकि वो बिल्कुल अलग हटकर बना था, वहाँ में जैसे भी रहूँ किसी को कोई परेशानी नहीं होने वाली थी। फिर मैंने मकान के लिए हाँ कर दी और पूछा कि खाने और कपड़े धोने का भी कोई इंतजाम है या नहीं। तब वो बोला कि सर ये काम तो मेरी विधवा बेटी कर देगी, वो घर से आपके लिए खाना बनाकर ले आया करेगी और आपके कपड़े भी धो देगी, वैसे भी उसका टाईम पास नहीं होता है, क्योंकि मैंने बचपन में उसकी शादी कर दी थी और अभी उसका गौना (विदाई) नहीं हुआ था कि उसका पति मर गया। फिर इस तरह मेरे लिए मकान और खाने का इंतजाम हो गया और में अगले दिन ही अपना सामान लेकर वापस उस गाँव में रहने आ गया। में शाम को पहुँचा था और वहाँ आकर देखा कि सरपंच के साथ कुछ आदमी खड़े है।

फिर उन्होंने मेरा सामान घर में सेट कर दिया और अब इसी में रात के 9 बज चुके थे। फिर सरपंच मुझसे बोला कि अब में जा रहा हूँ और आपके लिए खाना भिजवाता हूँ, तब तक आप नहा लीजिए और फिर सरपंच चला गया। फिर मैंने दरवाज़ा बंद किया और नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। फिर बाथ लेकर मैंने एक टी-शर्ट और पजामा पहन लिया और रूम में टी.वी देखने लगा था। तो तभी दरवाजे पर लॉक हुआ, तो मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो देखा कि उसी दिन वाली वो लेडी दरवाज़े के बाहर खड़ी थी, आज उसके चेहरे पर एक स्माइल थी और वो मुस्कुराती हुई बोली कि साहब में आपके लिए खाना लाई हूँ, मैंने खुद बनाया है, अब आप शहर वालों को पता नहीं पसंद आएगा की नहीं। फिर मैंने उसको अंदर आने को कहा। तो वो अंदर आई और मेरे लिए खाना निकालने लगी, जितनी देर वो खाना लगा रही थी, में उसकी बॉडी को ही निहारता रहा, क्या मस्त जवानी थी? अब मेरा मन कर रहा था की अभी इसको अपनी बाँहों में भर लूँ और खाने की जगह इसको ही खा जाऊं, मगर मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और खाना खाने लगा।

फिर खाना खाते हुए मैंने ऐसे ही उसके साथ थोड़ी बहुत बात की और उसके खाने की बहुत तारीफ भी की। फिर ऐसा ही कुछ दिन तक चलता रहा। अब वो मुझसे काफ़ी हद तक खुल गयी थी और मुझसे हंसी मज़ाक भी कर लेती थी, उसका नाम रागिनी था। फिर एक दिन जब वो सुबह मेरे लिए चाय और नाश्ता लेकर आई। तो मैंने दरवाज़ा खोला और फिर वापस बेड पर आकर लेट गया। फिर तब उसने पूछा कि क्या हुआ साहब? आज आप कुछ ठीक नहीं लग रहे है। फिर मैंने कहा कि आज कुछ तबीयत ठीक नहीं है, पूरा बदन टूट रहा है और सिर भारी सा हो रहा है। फिर वो मेरा माथा छू कर देखने लगी और बोली कि बुखार तो नहीं है, लगता है आप बहुत थक गये है, आइए में आपकी मालिश कर दूँ, इससे आपको आराम मिलेगा। फिर मैंने उसको मना किया, मगर वो नहीं मानी और तेल लेकर आ गयी।

फिर उसने जमीन पर एक चटाई बिछा दी और बोली कि आप इस पर अपनी टी-शर्ट उतारकर लेट जाइए। फिर मैंने वैसा ही किया और सिर्फ़ पजामा पहनकर लेट गया। अब वो मेरे पैरो में मालिश करने लगी थी। फिर उसने उस वक़्त एक पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी। अब वो थोड़ी झुककर मेरे पैरो पर तेल लगा रही थी, जिससे उसके बूब्स ब्लाउज से बाहर आ रहे थे। अब यह देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था। फिर मैंने देखा कि वो तिरछी निगाह से मेरे लंड को देख रही थी। फिर मैंने ऐसे ही उससे बात करते हुए उससे पूछा कि रागिनी तुम्हारी उम्र क्या है? तो वो बोली 25 साल। तो तब मैंने कहा कि क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि तुम्हारी दुबारा शादी हो? तो तब वो बोली कि साहब कौन सी औरत ये नहीं चाहेगी कि उसको उसका मर्द प्यार करे? और में भी तो एक औरत हूँ, मगर मेरा मर्द तो बिना मुझको टच किए ही मर गया। अब तो मुझको ऐसे ही जिंदगी काटनी पड़ेगी और तरसते रहना पड़ेगा। तब मैंने कहा कि क्या शादी के बिना प्यार नहीं हो सकता क्या?

फिर वो बोली कि आप तो जानते है कि में गाँव में रहती हूँ और सरपंच की बेटी हूँ, इस गाँव में कोई ऐसा है ही नहीं जो मुझको प्यार कर सके। तो तब मैंने कहा कि क्या में भी नहीं हूँ? तो वो बोली कि धत आप क्यों मुझ जैसी गाँव की लड़की को प्यार करेंगे? तो में कुछ नहीं बोला और उठकर बैठ गया और उसकी आँखो में देखने लगा। तो वो कुछ देर तक तो मुझको देखती रही और फिर उसने शर्माकर अपनी आँखे बंद कर दी। तो तब मैंने उसको हग करके अपने सीने से लगा लिया। अब उसकी चूचीयाँ मेरे सीने से दब रही थी। तो वो कुछ नहीं बोली और फिर उसने भी मुझको हग कर लिया। फिर मैंने उसके गर्म होंठो पर अपने होंठ रखकर उसको चूसना शुरू कर दिया और अब मेरा एक हाथ उसके नर्म-नर्म बूब्स को सहलाने लगा था।

फिर तब उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली कि प्लीज अभी ये मत करो, क्योंकि में बिल्कुल कुंवारी हूँ और मेरा एक अरमान था कि जब भी में फर्स्ट टाईम चुदवाई करवाऊँ, तो वो बिल्कुल सुहागरात की तरह हो, आज बापू दोपहर में रिश्तेदारी में जाने वाले है, में रात को आपका खाना लेकर आऊंगी तो तब यही रुक जाऊंगी, क्योंकि घर पर कोई और रोकने वाला नहीं होगा, तब आप मुझको अपनी दुल्हन बनाकर बहुत सा प्यार करना। तब मैंने कहा कि ठीक है मगर अभी जब शुरुआत हो गयी है तो कम से कम कुछ पिला तो दो और फिर मैंने उसका ब्लाउज सरकाकर उसका एक बूब्स बाहर निकालकर बहुत ज़ोर से चूस लिया। तो वो आअहह, आह करने लगी और फिर उसके बाद वो अपने घर चली गयी। फिर शाम को लगभग 6 बजे मेरा दरवाज़ा लॉक हुआ तो मैंने दरवाज़ा खोलकर देखा तो बाहर एक आदमी खड़ा था और उसके हाथ में एक बहुत बड़ा सा पैकेट था। फिर उसने बोला कि सरपंच जी के घर से ये सामान लाया हूँ, उन्होंने आपको देने को बोला था।

फिर में वो पैकेट लेकर अंदर आ गया और अंदर आकर खोला तो मैंने देखा कि उसमें बहुत सारे फूल थे और एक चिट्टी थी, जिसमें रागिनी ने लिखा था कि अपनी सुहागरात मनाने के लिए ये फूल भेज रही हूँ। इन फूलों से मेरी सुहागरात को यादगार बना देना। फिर मैंने अंदर बेडरूम में बेड पर एक न्यू वाईट बेडशीट बिछाई और वो फूल उस पर डाल दिए और पूरा रूम ऐसे सज़ा दिया जैसे सुहागरात में सजाया जाता है और खुद भी नहाकर शेव करके कुर्ता पज़ामा पहनकर तैयार हो गया। फिर रात को लगभग 9 बजे रागिनी आई तो मैंने उसको हग करने की कोशिश की। फिर वो मुस्कुराते हुए बोली कि जानू थोड़ा इंतजार तो करो, उसके हाथ में एक छोटा सा बैग था और फिर वो मुझसे बोली कि सब्र करो, सब्र का फल मीठा होता है, में जब आपको बुलाऊँगी, तो तब रूम में आना, तब तक उधर देखना भी नहीं और फिर वो रूम में चली गयी। फिर में बाहर बैठा इंतजार करता रहा।

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फिर लगभग 30 मिनट के बाद अंदर से आवाज़ आई जानूउऊउउ आओ ना। फिर में उठकर रूम में अंदर गया तो उसको देखता ही रह गया, उसने एक लाल साड़ी पहनी हुई थी और थोड़े से गहने और बहुत अच्छा मेकअप करके वो बिल्कुल दुल्हन बनी हुई थी और बेड पर थोड़ा सा घूँघट निकालकर बैठी हुई थी। फिर मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और उसके पास जाकर बेड पर बैठ गया और उसका घूँघट उठाया। अब उसने शर्म से अपनी नजरे झुका रखी थी। फिर मैंने उसकी आँखो पर अपने होंठ रख दिए, तो उसने अपना बदन ढीला छोड़ दिया। फिर मैंने उसको हग करके अपने सीने से लगा लिया और थोड़ी देर तक ऐसे ही बैठा रहा। अब उसकी धड़कन बहुत तेज चल रही थी। फिर वो उठी और बगल से गर्म दूध का गिलास उठाकर मुझको देने लगी और बोली कि इसको पी लीजिए। फिर मैंने वो दूध का गिलास उसके हाथ से लेकर साईड में रख दिया और उससे कहा कि जानू इस वक़्त ये दूध पीने का वक़्त नहीं है, मुझको तो कुछ और पीना है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उसने शर्माकर धीरे से पूछा कि और क्या पीना है? तो मैंने उसके दोनों बूब्स को सहलाते हुए कहा कि ये पीना है। फिर उसने शर्माकर धत बोला और कहा कि आप तो बहुत वो है। अब मैंने ऐसे ही उसके बूब्स को सहलाते हुए उसको गर्म करना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे उसका पल्लू हटाकर उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा था। तब उसने अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और बोली कि मुझको शर्म आ रही है। फिर मैंने उसका पूरा ब्लाउज उतार दिया और फिर उसकी साड़ी भी खोल दी। अब वो पेटीकोट और ब्रा में थी, उसने सफेद ब्रा पहनी हुई थी। फिर मैंने उसको हग किया और पीछे से उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया। अब में उसकी पीठ को सहला रहा था और उसकी गर्दन पर अपने होंठ से रगड़ रहा था। अब उसके मुँह से हल्की-हल्की आहह, ऊहहह की आवाज निकल रही थी। फिर मैंने उसकी पीठ को सहलाते हुए अपना एक हाथ उसके पेटीकोट में डालते हुए उसकी गांड को भी सहलाना शुरू कर दिया और फिर मैंने ऐसे ही थोड़ा जोर लगाकर उसका नाड़ा तोड़ दिया।

फिर जैसे ही उसका नाड़ा टूटा तो उसका पेटीकोट नीचे गिर गया। अब वो सिर्फ़ पेंटी में थी। फिर मैंने उसको ऐसे ही बेड पर लेटा दिया और खुद खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा था और खुद भी सिर्फ़ अंडरवेयर में आ गया और धीरे से उसके ऊपर लेटकर उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिए थे। अब मैंने उसके दोनों हाथ उसके सिर के ऊपर सीधा करके उसकी उंगलियों में अपनी उंगलियाँ फंसाकर कसकर पकड़ लिया था और उसके होंठो का रस पीने लगा था। अब ऐसे ही पीते-पीते मेरा खड़ा लंड उसकी चूत के ऊपर पेंटी को रगड़ रहा था। अब उसने अपनी आँखो को बंद किया हुआ था और फिर मैंने अपने एक हाथ से अपना अंडरवेयर उतार दिया और पूरा नंगा हो गया और फिर उसके बाद मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी और फिर ऐसे ही उसके ऊपर लेट गया और फिर उसके माथे से उसको चूमना शुरू किया और नीचे की तरफ आने लगा था। फिर जैसे ही मेरे होंठ उसकी चूत तक पहुँचे तो उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया और अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थी। उसकी चूत बिल्कुल पिंक कलर की थी और बिल्कुल साफ थी।

फिर उसने कहा कि यहाँ आने से पहले ही अपनी झाँटे साफ की थी। अब उसकी चूत से हल्का सा पानी निकल रहा था। फिर मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया और फिर थोड़ी देर के बाद में खड़ा हुआ और उसके सिर की तरफ जाकर उसके सिर के नीचे अपना एक हाथ लगाकर उसका सिर थोड़ा सा उठाया और उसके होंठो पर अपना लंड रगड़ दिया। फिर मेरे ऐसा करते ही उसने अपना हल्का सा मुँह खोला। फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया, जिसको उसने बहुत प्यार से चूसना शुरू कर दिया था। अब में उसकी चूचीयों को सहला रहा था। फिर ऐसे ही 10 मिनट तक में उसको अपना लंड चुसवाता रहा। फिर मैंने उसको बेड पर सीधा लेटाया और उसके पैर घुटनों से मोड़कर उसके दोनों हाथों में पकड़वा दिए। अब में उसकी दोनों टाँगो के बीच में आ गया था और उससे बोला कि अब थोड़ा सा बर्दाश्त करना, तुमको हल्का सा दर्द होगा। तो तब वो बोली कि में तैयार हूँ।

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फिर उसके बाद मैंने अपने लंड की टोपी उसकी चूत के छेद पर रगड़ी। तो उसके मुँह से सस्स्स्स, आह की आवाजे निकलने लगी और उसकी पूरी बॉडी ने एक झटका खाया। फिर मैंने अपने एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ा और अपने दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़कर मेरे लंड की टोपी को उसकी चूत के छेद पर रखा और फिर मैंने उसके दोनों कंधे पकड़कर हल्का सा धक्का मारा, जिससे मेरे लंड की टोपी उसकी चूत में घुस गयी थी। तभी उसके मुँह से चीख निकल गयी तो मैंने अपने लंड को वैसे ही रहने दिया और झुककर उसके निप्पल चूसने लगा था। अब वो दर्द से आहह, आहह कर रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद उसका दर्द कुछ कम हो गया तो मैंने उसके बूब्स को सहलाते हुए धीरे-धीरे अपने लंड को और अंदर किया। फिर थोड़ा अंदर जाने के बाद मेरा लंड किसी चीज से टकराकर रुक गया, वो उसकी चूत की सील थी जिससे में समझ गया था कि अब ये ज़ोर से चिल्लाने वाली है।

फिर मैंने उसको कसकर पकड़ लिया और उसके होंठो को अपने होंठो में दबा लिया, ताकि वो ज्यादा ज़ोर से चिल्ला ना पाए और अपनी पूरी ताकत से एक ज़ोर का धक्का मार दिया। मेरा लंड उसकी चूत की सील तोड़ता हुआ पूरा अंदर घुस गया। अब वो दर्द से बिल्कुल तड़पने लगी थी और अपना मुँह मेरे होंठो से छुड़ाने की कोशिश करने लगी थी, ताकि वो चिल्ला सके। मगर मैंने उसको कसकर पकड़े रखा और अपना लंड भी अंदर डालकर कुछ देर तक रुका रहा। फिर धीरे-धीरे वो शांत हो गयी। अब उसकी आँखो से दर्द से आँसू निकल आए थे। फिर मैंने उसके होंठो को आज़ाद किया और उसके बूब्स पीने लगा। अब उसके मुँह से कराहने की आवाजे निकल रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाता गया। अब उसको भी मज़ा आने लगा था और अब वो भी अपनी गांड उछाल-उछालकर चुदवाने लगी थी।

फिर में उसको ऐसे ही लगभग 10 मिनट तक चोदता रहा। अब इतनी देर में वो एक बार झड़ चुकी थी। अब उसको बहुत मज़ा आ रहा था और वो कह रही थी आहह और ज़ोर से चोदो, मेरी 25 साल की उम्र में इतनी खुशी मुझको कभी नहीं मिली, आअहह मुझको पूरा निचोड़ दो, मुझको बहुत अच्छा लग रहा है। फिर मैंने उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और देखा तो बेडशीट खून से भर चुकी है। फिर मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी गांड को पकड़कर फिर से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसको ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा था। अब मैंने अपने हाथ उसकी बगल से डालकर उसके दोनो बूब्स पकड़ लिए थे, जो मेरे धक्को से बहुत बुरी से तरह हिल रहे थे और ऐसे ही उसको चोदता रहा। अब वो मज़े से मुझसे चुदवा रही थी। तभी अचानक से वो ज़ोर से चिल्लाई कि मेरी चूत फिर से झड़ने वाली है और ज़ोर से चोदो और इतना बोलते ही उसकी बॉडी ने झटका खाया और वो फिर से झड़ गयी थी।

फिर थोड़ी देर के बाद मुझको लगा कि अब में भी झड़ने वाला हूँ, क्योंकि मैंने कंडोम नहीं लगाया था इसलिए मैंने अपना लंड बाहर निकालकर उसकी गांड के ऊपर ही अपनी पिचकारी छोड़ दी और फिर उसके बाद हम ऐसे ही नंगे कुछ देर एक दूसरे को हग करके लेट गये। फिर उसके बाद वो बाथरूम में चली गयी। अब उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, क्योंकि उसकी चूत कुछ फट गयी थी। फिर में भी उसके पीछे बाथरूम में चला गया और उससे बोला कि मेरा भी लंड साफ करो। फिर उसने अपनी चूत और मेरा लंड पानी से धोकर साफ किया, जिससे मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। फिर मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा। वो मेरे पैरो के पास जमीन पर बैठकर मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। फिर मैंने उसको गोद में उठाया और बेडरूम में ले आया और बेडरूम में रखी टेबल पर उसकी गांड टिकाकर उसके दोनों पैर ऊपर उठाकर अपने कंधो पर रखकर उसके सामने खड़े होकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और फिर से उसको बहुत बुरी तरह से चोदा। अब मेरी इस वाली चुदाई में उसको भी बहुत मज़ा आया था।

फिर इस तरह से उस रात हमने अपनी सुहागरात में लगभग 4 बार चुदाई की। अब सुबह उसकी हालत ऐसी हो चुकी थी कि वो बिल्कुल भी चल नहीं पा रही थी। फिर बहुत मुश्किल से वो अपने घर गयी, उसका बाप 3 दिन के बाद वापस आने वाला था और दिन के टाईम में मुझको भी अपने प्रॉजेक्ट के सिलसिले में व्यस्त रहना पड़ता था, इसलिए वो 3 दिन तक रोज रात को आकर मेरी बीवी बन जाती थी और हम बहुत चुदाई करते थे। फिर अगली कहानी में मैंने उसकी गांड भी मार दी और उसकी गांड से भी बहुत खून निकला था। अब इसी तरह में जब भी उस गाँव में जाता हूँ, तो वो मेरी बीवी का रोल प्ले करने के लिए आ जाती है और मेरे लंड की प्यास बुझा देती है ।।

धन्यवाद …

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